यूपी की विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद में 61 पदों में से 18 खाली

स्टाफ की कमी से सीएसटी का कामकाज बुरी तरह प्रभावित

 सौजन्‍य त्रिपाठी

जिस महकमे की जिम्मेदारी विज्ञान को बढ़ावा देने की है, वह खुद स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यह हाल है उत्‍तर प्रदेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी) का। सीएसटी की स्‍थापना यूपी में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के मकसद से की गई थी। केन्द्र सरकार द्वारा 61 पद स्वीकृत होने के बावजूद सीएसटी (CST) कर्मचारियों की कमी का सामना कर रही है। यहां लंबे समय से कई पद खाली पड़े हैं। कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद अब तक रिक्त पदों को भरने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की गई है।



सूत्रों के मुताबिक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद, उप्र के लिए ए, बी, सी, डी श्रेणियों में 63 पद स्‍वीकृत हैं लेकिन अब इसको घटाकर 61 कर दिया गया है। दो साल से सीएसटी में क्रमश: 12 और 18 पद पद खाली पड़े हैं। इनमें संयुक्त निदेशक, कंप्यूटर और विद्युत अनुभाग में इंजीनियर ऑपरेशंस, स्‍पेशल एयर कंडीशनिंग ऑफि‍सर, कंप्यूटर ऑपरेटर, विद्युत सहायक, सहायक क्लर्क और चपरासी के पद शामिल हैं। स्टाफ की कमी की वजह से सीएसटी का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

रिसर्च का काम

परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के विश्‍वविद्यालयों,  चिकित्सा व कृषि विश्‍वविद्यालयों,  पीजी कॉलेजों, शोध संस्थानों के माध्यम से शोध परियोजनाएं चलाई जाती हैं। वर्तमान में कुल 80 शोध परियोजनाएं चल रही हैं और 40 शोध परियोजनाएं प्रारम्भ की जानी हैं। परिषद बच्‍चों और छात्रों में विज्ञान को बढ़ावा देने के साथ ही उनको नए-नए विचारों और प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए प्रेरित करती है। सीएसटी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करती है जिसका मुखिया महानिदेशक होता है।

रिक्त पदों की स्थिति