ज्‍यादातर कंडोम (condom) अंतरराष्‍ट्रीय मानकों को ध्‍यान में रखकर बनाए जाते हैं

आईसीएमआर के सर्वेक्षण में हुआ बड़ा खुलासा

60 प्रतिशत से अधिक पुरुष करते हैं छोटे कंडोम की मांग

बीमारियों से बचाव और गर्भ नियंत्रण के लिए कंडोम एक सुरक्षित और लोकप्रिय उपाय है लेकिन भारत में कंडोम को लेकर एक अलग समस्या है। यह समस्या है साइज़ की। दरअसल भारत में मिलने वाले कंडोम (condom)साइज़ में जरूरत के हिसाब से बहुत बड़े होते हैं जिस कारण पुरुष इनको पसंद नहीं करते। वैसे तो दुनिया भर में पुरुष अपने लिंग के साइज़ को लेकर चिंतित रहते हैं, ऐसे में कंडोम का बड़ा साइज़ भारतीय पुरुषों में अलग तरह की चिंता बढ़ा रहा है। देश और दुनिया में इस बारे में हुए रिसर्च की पड़ताल की है धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी ने –

भारत में मार्केट में मिलने वाले कंडोम साइज में बहुत ही बड़े होते हैं क्‍योंकि वे अंतरराष्‍ट्रीय मानकों को ध्‍यान में रखकर बनाए जाते हैं। यही कारण है कि उसे इस्तेमाल करने से पुरुष कतराते हैं। यह जानकारी निकल कर आई है भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक सर्वेक्षण से।



आईसीएमआर ने पूरे देश में 1000 से ज्‍यादा लोगों पर अध्‍ययन कराया। पता चला कि भारत में 60 प्रतिशत से अधिक पुरुष छोटे कंडोम (condom) की मांग करते हैं। अध्‍ययन में निष्‍कर्ष निकला कि कंडोम बनाने में जिस अंतरराष्‍ट्रीय साइज का ध्‍यान रखा जाता है, उसकी तुलना में भारतीय पुरुषों के लिंग तीन से पांच सेंटीमीटर तक छोटे हैं। पुरुषों की परेशानी को देखते हुए आईसीएमआर बहुत जल्द मार्केट में छोटे कंडोम लाने की तैयारी में है।

आईसीएमआर में प्रजनन स्वास्थ्य के विशेषज्ञ डॉ. चंदर पुरी कहते हैं कि भारत की जरूरतों के हिसाब से कंडोम (condom) बनाने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने इसे गंभीर समस्‍या बताते हुए कहा कि हर पांच में से एक कंडोम या तो फट जाता है या निकल जाता है जिससे इसकी सफलता की दर अत्‍यंत कम हो जाती है। वैसे भी भारत में पहले से ही अन्‍य देशों की तुलना में एचआईवी संक्रमण की संख्या सबसे ज्यादा है।

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यह कोई समस्‍या नहीं

डॉ. पुरी कहते हैं कि आम तौर पर भारतीय दुकान पर जाकर छोटे कंडोम (condom) मांगने में शर्म महसूस करते हैं इसलिए देश में कंडोम के लिए वेंडिंग मशीन होनी चाहिए जहां हर साइज के कंडोम उपलब्‍ध हों। हालांकि भारत में भी छोटे कंडोम की बिक्री होती है, लेकिन लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है और न ही वे इस पर बात करते हैं।

‘मैक्सिम’ पत्रिका के भारतीय संस्करण के पूर्व संपादक सुनील मेहरा कहते हैं कि भारतीय पुरुषों को इस बात से चिंतित होने की जरूरत नहीं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस साइज के कंडोम बन रहे हैं। असल चीज उनका आकार नहीं, बल्‍कि यह है कि आप उनका इस्‍तेमाल कैसे करते हैं।

अफ्रीकी सबसे आगे

क्या वाकई में अफ्रीकी लोगों के लिंग का आकार एशियाई लोगों की तुलना में बड़ा होता है, यह पता करने के लिए उत्‍तरी आयरलैंड की अल्‍सटर यूनिवर्सिटी ने 116 देशों में एक सर्वेक्षण कराया। सर्वे में यह मिथक 100 प्रतिशत सही पाया गया। लिंग के साइज़ के आधार पर बनाई गई सूची में टॉप 20 देशों में ज्‍यादातर अफ्रीकी देश हैं जबकि नीचे से 15 देशों में सभी एशिया के हैं। अफ्रीका, घाना, गैबॉन,‍ जमैका, हैती और कांगो जैसे अफ्रीकी देश सूची में 16 सेंटीमीटर से अधिक औसत के साथ टॉप पर हैं, जबकि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नार्वे, आस्‍ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देश 12.9 और 14.7 सेंटीमीटर औसत के साथ मध्‍य क्रम में आते हैं। चीन, जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्‍लादेश सूची में आखिरी 15 देशों में हैं। भारत का नंबर इसमें 112वां है। भारतीय पुरुषों के लिंग की औसत लम्बाई 10 सेंटीमीटर बताई गई है। उत्‍तर कोरिया सूची में 115वें और दक्षिण कोरिया 116वें नंबर पर है।

आकार को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं

अमेरिकी लोग अपने लिंग के आकार को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं। लेकिन अब अमेरिका के ही प्रतिष्ठित किन्‍से इंस्‍टीट्यूट द्वारा किए गए ताजा अध्‍ययन में कहा गया है कि इसको लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं। लिंग का औसत आकार 5 से लेकर 7 इंच तक होता है। अध्‍ययन में यह भी पाया गया कि 100 में से सिर्फ एक पुरुष का लिंग 7 इंच से बड़ा होता है। इससे आप आश्‍वस्‍त हो सकते हैं कि आपके साथ 98 अन्‍य लोग उसी नाव में सवार हैं, इसलिए इसको लेकर तनाव में आने की कोई जरूरत नहीं है।