भारत में विद्युतीकरण का नाता है सामाजिक-आर्थिक स्‍तर से

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण की दर अब भी चिंता का विषय

फराह जेहरा

भारत सरकार और सभी राज्‍य सरकारें ‘सबको बिजली’ देने के कार्यक्रम पर खासा जोर दे रही हैं. मकसद है गांव-गांव और घर-घर बिजली पहुंचाना. इसके परिणाम भी उत्‍साहजनक दिखाई दे रहे हैं. लेकिन एक बड़ी बाधा है, यह कि ऊंची जाति वाले और अमीर लोग तक ही बिजली पहुँच पा रही है. गरीब और निचली जाति के लोग अब भी ‘पॉवर’ से दूर हैं.

पिछले दशक के दौरान भारत में बिजली के विस्तार की दर में काफी इजाफा हुआ है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में ‘सबको बिजली’ योजना के तहत भारत में बिजली की पहुँच 79.2 प्रतिशत थी। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार घरों में बिजली पहुँचने की दर में 56% से 67% तक वृद्धि हुई है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (RGGVY) ने गांवों में बिजली पहुचाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। हालांकि ऐसी महत्‍वपूर्ण योजना के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण की दर अब भी चिंता का विषय है।



स्रोत : मनरेगा, मई, 2015

ग्रामीण भारत में विद्युतीकरण के ट्रेंड की जाँच करने के लिए यूजिनी डुगुआ, रुईनैन लियू और कोलंबिया विश्वविद्यालय के डॉ. जोहानेस उर्पेलेनेन ने  2014-15 में एक शोध अध्ययन कराया। इसके अंतर्गत उत्तरी और पूर्वी भारत के छह राज्‍यों के 714 ऐसे गांवों को शामिल किया गया जो विद्युतीकरण में काफी पीछे थे। इस शोध अध्‍ययन को मॉर्सल रिसर्च एंड डेवेलपमेंट प्रा. लि. ने पूरा किया, जो लखनऊ की अनुसंधान परामर्श कंपनी है।

जाति और आर्थिक असमानता प्रमुख कारक

जनगणना के 2011 और 2014 और 2015 के आंकड़ों से पता चलता है कि राष्‍ट्रीय विद्युतीकरण कार्यक्रम के तहत भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का उपयोग काफी बढ़ा है। लेकिन आर्थिक रूप से संपन्‍न व उच्‍च जाति के लोगों वाले गांवों और सामान्‍य गांवों के बीच बिजली के उपयोग में काफी असमानता है. यह स्थिति आज भी जस की तस है. अध्ययन से यह तथ्य भी सामने आया कि गरीब और अनुसूचित जाति बहुल गांवों की तुलना में अमीर और उच्च जाति के लोगों वाले गांवों में बिजली की पहुंच ज्‍यादा है। उच्च जाति के लोगों की तुलना में छोटी जाति के 14-15 प्रतिशत घरों में ही बिजली का उपयोग हो रहा है।

राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना अपने उद्देश्‍यों में काफी हद तक सफल रही। इस योजना के कारण बड़ी संख्‍या में ऐसे गांवों में बिजली पहुंची जहां के लोग तबतक अंधेरे में रहने को विवश थे। हालांकि गरीब ग्रामीणों को फ्री में बिजली कनेक्‍शन दिया गया था लेकिन हर महीने बिजली बिल का भुगतान ऐसे लोगों के लिए संभव नहीं था. और यही वजह इस योजना की राह में बड़ी बाधा थी।

हालांकि यह योजना प्रमुख रूप से गरीब परिवारों के लिए थी, लेकिन आर्थिक कारणों ने इसे प्रभावित किया। आंकड़े बताते हैं कि छोटी जाति के परिवारों की तुलना में उच्च जाति के घरों के लोग बिजली का उपयोग अधिक करते हैं। इससे पता चलता है कि बिजली की पहुँच का जाति से भी लेना देना है!

विद्युतीकरण में ग्रिड और माइक्रो ग्रिड के विस्‍तार की भूमिका भी है. हालांकि  ऑफ ग्रिड विद्युतीकरण की रणनीति ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के विस्तार को  बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित तबकों के लोग अगर राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़े हुए हैं तो ऑफ ग्रिड समाधान की कोई आवश्यकता नहीं है।

‘ऊर्जा क्रांति’ और सभी को बिजली पहुंचाने की योजना के तहत उत्‍तर प्रदेश सरकार ने 2017 में बीपीएल परिवारों को मुफ्त कनेक्शन और 18 घंटे बिजली देने की घोषणा की है। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को उचित दर पर कनेक्शन देने की बात कही गई है। इस साल के केंद्रीय बजट में ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम के लिए 4843 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सरकार को अगर ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को सफल बनाना है तो समाज में फ़ैली आर्थिक असमानता को भी दूर करना होगा. अगर गरीब ग्रामीण उपभोक्‍ता कनेक्‍शन लेने के लिए तैयार भी हो जाते हैं, तब भी हर महीने बिजली बिल का भार उठाना उनके लिए समस्या ही रहेगा।