कैशलेस को झटका – भारत में 21% लोगों का बैंक खाता नहीं

जौनपुर व मऊ में हुए शोध का दावा बिना बेहतरीन ट्रेनिंग के स्मार्ट कार्ड का उपयोग नहीं कर सक्ते ग्रामीण

शोध के अनुसार आज भी २१% लोगों के पास खाते नहीं हैं

नोटबंदी के बाद भारत सरकार कैशलेस यानी बिना नकदी लेन – देन को जोरदार तरीकेसे बढ़ावा देने में जुटी है। लोगों को नकदी की बजाय डिजिटल लेनदेन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन इसकी सफलता की राह में एक बड़ी चुनौती भारत की उस 21%एडल्ट आबादी को इसके दायरे में ले आना है, जो आज भी बैंकिंग प्रणाली से बाहर है, यानी उनके बैंक में खाते ही नहीं हैं।



भारत में बैंकिंग प्रणाली की पहुंच थोड़ी कम है। आज भी भारत की 21 प्रतिशत आबादी बैंकिंग के दायरे से बाहर है। विश्व बैंक के 2014 के ग्लोबल फिनडेक्‍स डेटाबेस के अनुसारभारत, चीन और इंडोनेशिया में पूरी दुनिया की 38 प्रतिशत वयस्‍क आबादी ऐसी है जिनका बैंक खाता नहीं है. यही नहीं,  उनमें पैसे का मैनेजमेंट और बचत के मामले में जागरूकता भी नहीं है.

वर्ष 2011 में, माइक्रोफाइनांस ऑपरचुनिटी (MFO) ने फिनो पेटेक और मास्टरकार्ड फाउंडेशन के साथ मिलकर भारत, फिलीपींस, जाम्बिया और मलावी में एक प्रोजेक्‍ट शुरू किया। भारत में मॉर्सल रिसर्च और डेवेलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से उत्तर प्रदेश के जौनपुर और मऊ जिले के 122 गांवों में अध्ययन‍ किया गया। इसका उद्देश्य यह पता करना था कि पढ़े लिखे उपभोक्ताओंको इस बारे में किस तरह मदद पहुंचाई जा सकती है। अध्‍ययन से यह बात सामने आई कि यदि जागरूकता अभियान चलाया जाए तो लोगों को उनके पैसे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इस परियोजना के तहत उपभोक्ताओं को बायोमीट्रिक स्मार्ट कार्ड दिए गए। उन्‍हें कार्ड के इस्‍तेमाल के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया गया। उन्‍हें एक एक्टिविटी बुक भी दी गई ताकि यह देखा जा सके कि उन्‍होंने स्मार्ट कार्ड का इस्‍तेमाल कैसे किया।

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एटीएम कार्ड

मऊ और जौनपुर जिलों में लगभग 4,95,822 कार्ड का वितरण करने के साथ प्रोजेक्‍ट कीशुरुआत हुई। परियोजना के लिए एमआईएस डाटा शीट बनाने के लिए 1599 गांवों में कार्ड का उपयोग करने वालों को प्रशिक्षण दिया गया। उपभोक्ताओं कोडायरी दी गई जिसमें हिसाब लिखना था. 33 सप्ताह तक 187 लोगों से डाटा एकत्र किया गया.

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FINO कार्ड का प्रभाव

शोध अवधि के दौरानसिर्फ 5.1% उपभोक्ताओंने कार्ड का इस्तेमाल किया. यानी लोगों के रवैये में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया। हालांकिजब उनसे बात की गई तो पता चला कि उनसे नियमित संपर्क नहीं होने से यह हालात बने. वास्‍तव मेंFINO एजेंट कार्ड के इस्‍तेमाल में मदद के लिए लोगोंके पास नियमित रूप से गए ही नहीं,  जबकि उपभोक्‍ताओं की वित्तीय डायरी से पता चला कि उन्‍होंने लेनदेन के लिए कार्ड का इस्‍तेमाल बड़े पैमाने पर किया। यही नहीं, इन उपभोक्‍ताओं में कुछ बचत करने काएक पैटर्नभी दिखा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने का मुख्‍य उद्देश्‍य यह था कि उपभोक्‍ताओं को लेनदेन के लिए कार्ड का अधिक से अधिक उपयोग करने के प्रति जागरूक किया जाए लेकिन एजेंट की लापरवाही के कारण यहप्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावी नहीं साबित हो पाया।



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पैसा ट्रांसफर करने की मशीन

उपभोक्ता शिक्षा का महत्व

कार्ड का उपयोग करने वालों ने इस बात को स्वीकार किया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से पैसे के प्रबंधन के मामले में उनको फायदा हुआ. कुछ लोग अधिक विश्वास के साथ कार्ड का उपयोग करने के लिए आश्वस्त दिखे तो कुछ की दिलचस्‍पी इस बात में ज्‍यादा दिखी कि वह अपने कार्ड को सुरक्षित कैसे रख सकते हैं। यह भी देखने में आया कि जिन लोगों को वित्तीय डायरी और प्रशिक्षण दिया गया था, उन्‍होंने कार्ड का अधिक उपयोग किया।

एक दिलचस्प पहलू यह देखने को मिला कि महिलाओं के व्यवहार में महत्वपूर्ण बदलाव आया।जिन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया, उन्‍होंने पैसे का हस्तांलेन देन अधिक किया और बहुत कम उधार लिया।

शोध अध्ययन का उद्देश्‍य ऐसे लोगों को शिक्षित करना था जो बैंक से नहीं जुड़े थे। इसके अलावा इसका उद्देश्‍य यह पता लगाना भी था कि कैसे इस तरह के कार्यक्रम की मदद से एक बड़ी आबादी को, जो बैंकिंग सिस्‍टम से अनजान है,  नकदहीन बैंकिंग प्रणाली की ओर प्रेरित किया जा सकता है।

आईटी मंत्रालय ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम के साथ प्रशिक्षण अभियान शुरू किया था। बाद में, प्रशिक्षण का नेतृत्‍व करने वालों ने खुद स्वीकार किया कि सत्तारूढ़ पार्टी में ही ऐसे लोगों की एक बड़ी संख्‍या थी जो कैशलेस व्यवस्था और ई-बैंकिंग से अनजान थे। इसके अलावा,ये लोग खुद भी कागज़ रहित लेनदेन अपनाने को इच्छुक नहीं थे। अभियान के दौरान प्रशिक्षकऐसे बहुत से लोगों के पास गए जिन्‍हें कैशलेस लेनदेन में कोई समस्या आ रही थी।

अंतत: एमएफओद्वारा किए शोध अध्ययन से यह निष्‍कर्ष निकला कि सरकार की कैशलेस लेनदेन की दूरगामी योजना को सफल बनाने के लिए प्रेरक कार्यक्रमों के साथ-साथ एक अच्छी तरह से डिजाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चलाने की जरूरत है।

Guy Stuart

“The distribution of payments, whether from government or employers or from one person to another, through digital channels has the potential to increase transparency and security. But for these benefits to accrue to low-income people in all areas of the country, two things need to happen: agents networks need to provide reliable, high-quality customer service; and smart card holders need to have a basic understanding of how to keep their accounts safe.”

Executive Director, Microfinance Opportunities, Fellow, Ash Center, Harvard University