दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में आखिर तय हो गया कि आम आदमी पार्टी (आप) दिल्ली में जनाधार खोती जा रही है। एमसीडी में पहले भी भाजपा प्रभावशाली थी और अब तो पूरी तरह छा गयी है लेकिन उसकी और ‘आप’ की राजनैतिक लड़ाई में नुकसान सिर्फ आम जनता को ही हुआ है। दिल्ली की सबसे गरीब बस्तियों की बात करें तो वहां का तो सामाजिक ताना बाना ही टूटता जा रहा है. इन गरीब झुग्गी झोपड़ियों में अब लोगों को शादी भी मुश्किलें खडी हो गई हैं.

दीपाली अग्रहरि, लखनऊ



देश की टॉप रिसर्च कंपनियों में से एक “मोर्सेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट” के डायरेक्टर अतुलेश कुमार शुक्ला का कहना है कि दिल्ली की झुग्गी बस्तियों की मूलभूत जरूरतों के अलावा एक सामाजिक समस्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। और वो है, परिवारों में बहन-बेटियों और बेटों की शादी की समस्या।

अतुलेश बताते हैं कि इस समस्या का कारण बस्तियों में बेहद गंदगी का होना है. इस वजह से बस्ती के बाहर के लोग यहाँ रिश्ता तो दूर, मेल जोल तक रखना पसंद नहीं करते.

अतुलेश कुमार शुक्ल ने हाल ही में टेक्सस यूनिवर्सिटी के साथ दिल्ली की स्लम बस्तियों पर रिसर्च पूरा किया है। रिसर्च के दौरान ही उन्हें लोगों ने बताया कि स्लम से बाहर लोग उनके घर की बेटियों को शादी करके नहीं ले जाना चाहते और न ही अपने घर की लड़कियों को यहाँ ही भेजना चाहते हैं।

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