घोटाले की जड़ें तेल कंपनियों, राज्य सरकार के विभागों और नेताओं तक समाई हुई हैं

धमाके से शुरू हुई कार्रवाई अब दिखावे तक सिमटी

जो पम्प सील हुए हैं उनमें जिन मशीनों में चिप नहीं थी वह चालू कर दिए गए।

मशीन में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद पहले जांच होगी फिर चोरी साबित होने के बाद ही उन पर कार्रवाई की जाएगी।

धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी / सौजन्‍य त्रिपाठी

अब इसे कार्रवाई के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकना ही कहा जाएगा। उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने पेट्रोल पंपों पर मशीन में चिप और रिमोट से घटतौली का धमाकेदार खुलासा किया और एक ही रात में राजधानी के अनेक पेट्रोल पम्पों को सीज कर कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एक-दो दिन और कार्रवाई हुई लेकिन बहुत तेजी से मामला फुस्स होता दिखाई पड़ रहा है।

जहाँ शुरुआत में गिरफ्तारी और पम्प सीज किए जा रहे थे वहीँ अब न तो गिरफ्तारी हो रही है न पम्प सीज हो रहे हैं। और तो और, मामले का खुलासा करने वाली एसटीएफ को मात्र सहायक की भूमिका में डाल दिया गया है। असल में लखनऊ के पेट्रोल पंप संचालक 1 मई की आधी रात अचानक हड़ताल पर चले गए थे। 2 मई को अफसरों और पेट्रोल पंप मालिकों की बैठक में समझौता हुआ और मामला पलट गया।



क्या हो रहा है अब

जिस डिस्‍पेंसर मशीन में चिप मिल रही है, सिर्फ उसे सील किया जाएगा, पूरे पेट्रोल पंप को नहीं सील किया जाएगा। यानी किसी पंप पर छह डिस्‍पेंसर मशीनें हैं और वहां दो मशीनों में चिप से चोरी पाई गई तो सिर्फ दो डिस्‍पेंसर मशीनें ही सील होंगी और बाकी चार चलती रहेंगी। अब इस बात की क्‍या गांरटी है कि बाकी चार मशीनों से वे अगले दिन से चोरी नहीं करने लगेंगे ? लखनऊ शहर में 94 और जिले में करीब 180 पेट्रोल पंप हैं। आखिर पुलिस और प्रशासन कब तक एक-एक डिस्‍पेंसर मशीन की निगरानी करेगा ?

पेट्रोल पंपों की जांच के लिए हर जिले में छह अफसरों की टीम बनाई गई है। ये टीमें चार स्तर पर जांच करेंगी। पहले स्तर पर देखा जाएगा कि पेट्रोल पंप पर चिप लगी है या नहीं और तेल की घटतौली हो रही है। ऐसी स्थिति में पेट्रोल पंप मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। दूसरे स्तर पर अगर मशीन में चिप मिलती है लेकिन घटतौली नहीं हो रही है तो मशीन को सील कर दिया जाएगा और चिप डिस्पेंसर के पल्सर यूनिट के सर्किट को निकाल कर जांच के लिए भेजा जाएगा। तीसरा, किसी पेट्रोल पंप पर अगर सील टूटी पाई जाती है या फिर मशीन के अंदर छेड़छाड़ के सुबूत मिलते हैं तो भी संबंधित डिस्पेंसर यूनिट को सील कर दिया जाएगा और पल्सर यूनिट को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। इसके अलावा अगर किसी मशीन में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं पाई जाती है तो वह मशीन चालू रहेगी।

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क्या है घुटने टेकने की वजह

अगर हम कहें कि प्रशासन ने पेट्रोल पंप मालिकों के सामने एक तरह से सरेंडर कर दिया तो अतिशयोक्ति न होगा। फि‍र सरकार और पुलिस-प्रशासन के यह कहने का कोई मतलब नहीं रह जाता कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। कायदे से होना तो यह चाहिए था कि घटतौली करने वाले पूरे पेट्रोल पंप को सील कर, उनके मालिकों की गिरफ्तारी कर सख्‍त संदेश दिया जाता। तेल के धंधे से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 90 फीसदी पम्पों पर चोरी होती है। अगर पम्प सीज करते जाते तो देश में पेट्रोल-डीज़ल-सीएनजी मिलना बंद हो जाता। एक पम्प मालिक ने बताया कि तेल कम्पनी के अफसर, बाट-माप और सप्लाई विभाग के लोग हर महीने पैसा लेते हैं और इनको सब जानकरी होती है। इस सूत्र ने सवाल उठाया कि चिप लगा कर चोरी के मामले में एक भी सरकारी कर्मचारी या तेल कम्पनी के अफसर पर केस दर्ज हुआ?

तीन प्रमुख वजहें गिनी जा सकती हैं –

ताकतवर लोग : ज्यादातर पम्प रसूखदार लोगों के हैं जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। इन पर हाथ डालना बहुत मुश्किल है।

तेल कम्पनियाँ : तेल में मिलावट, चोरी रोकने की जिम्मेदारी पेट्रोल कंपनियों की होती है। गलत काम इनकी मिलीभगत के बगैर मुमकिन ही नहीं है, यानी यह सीधे-सीधे केंद्र सरकार (तेल मंत्रालय) से जुड़ा हुआ है।

राज्य के अफसर : राज्य सरकार के बाट-माप विभाग और सप्लाई विभाग के लोग या तो जांच नहीं करते या मिलीभगत में शामिल हैं।

क्या कहते हैं अफसर :

एसटीएफ के आईजी राम कुमार ने कहा है कि अब जांच में एसटीएफ की भूमिका सिर्फ सहयोगी की रहेगी। अगर किसी को कुछ समझना होगा तो एसटीएफ के अधिकारी उनकी मदद करेंगे। सभी जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तरह से समझा दिया गया है कि पेट्रोल चोरी के लिए कहां-कहां चिप लगाई जा सकती है। सिर्फ मशीन में ही नहीं, बल्कि टैंक में भी चिप लगे होने के बारे में उन्‍हें बताया गया है।

लखनऊ की एडीएम आपूर्ति अलका वर्मा का कहना है कि सप्लाई विभाग की टीमें एसटीएफ, बाट-माप और इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई कर रही हैं। जिन पेट्रोल पंप पर गड़बड़ियां मिल रही हैं, उन्हें सीज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

आईओसी के चीफ जनरल मैनेजर मनोज कुमार अवस्थी कहते हैं कि जिस भी पेट्रोल पंप पर घटतौली या कोई अन्‍य गड़बड़ी पाई जाएगी, उसे सील कर दिया जाएगा। पेट्रोल पंप एसोसिएशन की सामान्य डिस्‍पेंसिंग मशीनों की जांच न करने की मांग पर अवस्‍थी ने कहा कि यह पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर निर्भर है। वहीं लखनऊ पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्‍यक्ष रंजीत गौड़ ने राज्य सरकार पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया।



इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के रिटेल मैनेजर ए. वर्मा ने कहा कि खुदरा विक्रेताओं ने तेल चोरी करने के कई तरीके खोज लिए हैं, लेकिन जैसे ही कोई गड़बड़ी पता चलती है हम तुरंत कार्रवाई करते हैं। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि एसटीएफ के पेट्रोल चोरी के इस खुलासे पर वह क्‍या कहेंगे तो उन्‍होंने चुप्‍पी साध ली। हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम के अधिकारियों के अनुसार, कई पेट्रोल पंप मालिकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्‍त है और अपने खिलाफ कार्रवाई होते देख वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। अधिकारियों ने लखीमपुर खीरी की घटना की याद भी दिलाई जहाँ पेट्रोल पम्प मालिक ने आईओसी के क्षेत्रीय अधिकारी मंजुनाथ की हत्‍या कर दी थी।

किस विभाग का क्‍या रोल :

पेट्रोल पंप के संचालन में जिला आपूर्ति विभाग, ऑयल मार्केटिंग कंपनी (ओएमसी), ओरिजनल इक्‍यूपमेंट मैन्‍युफैक्‍चरर (ओईएम) और बाट-माप अधिकारी की प्रमुख भूमिका होती है। डिपो से तेल की आपूर्ति की जांच आपूर्ति विभाग करता है। उसकी जिम्‍मेदारी यह देखना है कि पेट्रोल पंपों पर तेल की आपूर्ति पर्याप्‍त मात्रा में होती रहे। ओएमसी पेट्रोल पंप पर खर्च होने वाले उपलब्‍ध तेल का लेख-जोखा रखता है। पेट्रोल पंप पर मशीनों की देखरेख का काम ओईएम का है। बाट-माप अधिकारी मशीन पर सील लगाते हैं।

जिन पर संदेह उन्हें के सहारे जांच :

आशंका जताई जा रही है कि पेट्रोल चोरी के इस खेल में ओरिजनल इक्‍यूपमेंट मैन्‍युफैक्‍चरर (ओईएम) और बाट-माप अधिकारी शामिल हैं क्‍योंकि बिना इनकी मिलीभगत के ऐसा करना संभव नहीं है। एक तो इन पर संदेह है और अब सरकार इन्‍हीं की मदद से पूरे प्रदेश में पेट्रोल पंपों की जांच करने की बात कह रही है।

अब तक क्या हुआ

एसटीएफ ने 27 अप्रैल को छापेमारी शुरू की थी। डिस्‍पेंसर में चिप लगाकर और रिमोट से पेट्रोल चोरी करने वालों की पोल खुलने के बाद यूपी एसटीएफ के छापे में लखनऊ में अब तक दो दर्जन से ज्‍यादा पेट्रोल पंप सील हो चुके हैं। एसटीएफ ने जितने भी पंपों पर छापा मारा, तकरीबन सभी में पेट्रोल की घटतौली पाई गई। पांच पेट्रोल पंप मालिकों, नौ पंप प्रबंधकों सहित 23 लोगों को गिरफ्तार किया है।

छापे की शुरुआत बाराबंकी के एक शख्‍स राजेन्‍द्र की गिरफ्तारी के बाद हुई, जिसने बताया कि उसने पेट्रोल चोरी में इस्‍तेमाल होने वाली एक हजार इलेक्‍ट्रॉनिक चिप्‍स पेट्रोल पंपों में लगाई है। एसटीएफ का अनुमान है कि चिप लगे पेट्रोल पंपों से औसतन 12 से 15 लाख रुपये महीने के पेट्रोल की चोरी होती है। इस तरह सिर्फ एक आदमी जो पकड़ा गया है, उसके लगाए हुए चिप से करीब 150 करोड़ रुपये महीने की पेट्रोल चोरी हो रही है। यूपी में करीब 6000 पेट्रोल पंप हैं जिनमें तकरीबन 60000 नोजल हैं।

राजेन्‍द्र का कहना है कि 90 फीसद से ज्‍यादा पेट्रोल पंपों पर चोरी हो रही है और यह काम दिल्‍ली में बड़े पैमाने पर होता है। हर लीटर पर 50 मिलीलीटर से 100 मिलीलीटर तक पेट्रोल की चोरी होती है। मिसाल के लिए अगर किसी ने अपनी कार में 35 लीटर पेट्रोल डलवाया तो उसे करीब 3 लीटर पेट्रोल का नुकसान हो जाएगा।