इस हफ्ते (12 जनवरी) बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई फिल्म मुक्काबाज’ ने खूब तारीफें बटोरीं। फिल्‍म को देखकर लगता है कि अब क्रिकेट को छोड़ दूसरे खेलों को भी फिल्‍मों में अहमियत मिलने लगी है। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी ‘मुक्काबाज’ में आप बॉक्सिंग के प्रति उनके जूनून को देख सकते हैं। इस फिल्म की स्क्रिप्‍ट फिल्म के लीड हीरो विनीत कुमार सिंह ने खुद कुछ सालों पहले लिखी थी।

विनीत ने इस स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाने के लिए बहुत से प्रोड्यूसर से अप्रोच किया, साथ ही शर्त रखी कि वो खुद इस फिल्म में लीड रोल निभाएंगे। उनकी स्क्रिप्ट तो बहुत से प्रोड्यूसर को पसंद आई लेकिन उनकी शर्त मानने को कोई तैयार नहीं था, इसीलिए उन्हें इस स्क्रिप्ट के साथ लम्बा इंतजार करना पड़ा। फाइनली अनुराग कश्यप उनकी ये शर्त मानने को तैयार हो गए। अनुराग ने विनीत से कहा फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले आप जमकर बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करो, जब पूरी तह तैयार को जाओगे तभी लीड रोल मिलेगा। विनीत ने दिन-रात रिंग में बॉक्सिंग की प्रैक्टिस की और आखिर अनुराग की शर्तों पर खरे उतरे।

इस फिल्म की कहानी शुरू होती है बरेली की छोटी गलियों से जहां श्रवण सिंह (विनीत कुमार सिंह) अपने बड़े भाई के साथ रहता है। उसकी जिंदगी का सिर्फ एक की उद्देश्‍य है – मुक्केबाजी में नाम कमाना। परिवार की तंग हालत के चलते श्रवण मुक्केबाजी की ट्रेनिंग के लिए दबंग भगवानदास मिश्रा (जिम्मी शेरगिल) वहां आ जाता है, लेकिन भगवानदास श्रवण को बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देने के बावजूद उससे अपने घर का काम करवाता है। श्रवण को ये बात रास नहीं आती है। उसे लगता कि उसकी जिंदगी का मकसद तो बॉक्सिंग है, फिर वो यहाँ क्या कर रहा है। श्रवण के गुस्से का बांध एक दिन टूटता है और वो भगवान दास को मुक्का मार देता है। भगवान दास इस बात का बदला लेने के लिए उसके कॅरियर के बीच बाधाएं डालना शुरू कर देता है।

भगवान दास की भतीजी सुनैना (जोया हुसैन) उसके साथ उसी के घर में रहती है, जो दिखने में बेहद खूबसूरत है। वह सुन तो सकती है लेकिन बोल नहीं सकती। श्रवण की नजर जब पहली बार उस पर पड़ती है तो वह उसे अपना दिल दे बैठता है। लेकिन भगवानदास को इन दोनों का प्रेम रास नहीं आता और वह इन दोनों को अलग करने के लिए साजिशें रचना शुरू कर देता है। फिल्म की आगे की कहानी इनकी लव स्टोरी और मुक्केबाजी के बीच शुरू हुई जंग पर आधारित है।

फिल्म में सुनैना का रोल कर रही जोया हुसैन ने अपने किरदार पर काफी मेहनत की है, जो काबिले तारीफ है। वहीं मुक्‍केबाज श्रवण का किरदार निभा रहे विनीत की बॉक्सिंग और एक्टिंग उम्मीद से भी उम्दा है। जिम्मी शेरगिल ने भी भगवानदास के खतरनाक किरदार को बखूबी निभाया है। वहीं बात करें अनुराग कश्यप की तो उन्होंने फिल्म में गुंडाराज व जातिवाद से जूझते खिलाड़ियों के संघर्ष को पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। साथ ही इस फिल्म में यूपी का तड़का लगाने के लिए जबरदस्त डायलॉग डिलेवरी भी की गई है, जो आपको हंसने पर मजबूर कर देगी। ‘माइक टायसन हैं हम उत्तर प्रदेश के’, ‘एक ठो धर दिए न तो प्राण पखेरू हो जाएगा आपका’ जैसे डायलॉग दर्शकों को जरूर पसंद आएंगे।