• लखनऊ के मनकामेश्वर मठ मंदिर की महंत देव्‍यागिरि ने लांच की वेबसाइट
  • कहा – युवाओं को इससे जोड़ने के साथ ही वैदिक शिक्षा को भी आगे बढ़ाएंगे

लखनऊ। मनकामेश्वर मठ  मंदिर की महंत देव्‍यागिरि ने शनिवार (25 नवंबर) को इंदिरानगर के पारिजात गेस्ट हाउस में ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ वेबसाइट का लोकार्पण किया। कार्यक्रम की मुख्‍य अतिथि देव्‍यागिरि जी ने कहा कि यह वेबसाइट सनातन धर्मावलंबियों को वैदिक रीति रिवाज के अनुसार पूजन हेतु हितकर साबित होगी। इसके माध्यम से विद्वान् पुरोहितों द्वारा कम खर्च में पूजा-पाठ और अन्‍य संस्‍कार संपन्‍न कराए जा सकेंगे।

‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ की लांचिंग के मौके पर महंत देव्‍यागिरि को तिलक लगातीं दीपाली अग्रहरि

महंत जी ने कहा कि किसी भी पूजा के लिए उस पूजा के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। जिस काम के लिए हम पूजा करा रहे हैं, उसका क्या फल मिलेगा इसका भी पता होना जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ के माध्यम से आज की युवा पीढ़ियों को जोड़ना है और उनके रोजगार के लिए भी काम करना है। इसके माध्यम से न सिर्फ लखनऊ वासियों को बल्कि पूरे भारत में हम युवाओं को जोड़ने का प्रयास करेंगे और वैदिक शिक्षा को भी आगे बढ़ाएंगे।

दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ के लोकार्पण समारोह का शुभारम्‍भ करते पंडित शेषमणि शुक्‍ल और महंत देव्‍यागिरि

समारोह के विशिष्‍ट अतिथि संस्‍कृत के विद्वान पंडित शेषमणि शुक्‍ल ने वेदों और उपनिषदों के महत्‍व को रेखांकित किया। उन्‍होंने बताया कि समय के साथ हमारे रीति-रिवाज में बदलाव आया जिसने हमारी युवा पीढ़ियों को वैदिक शिक्षा से दूर कर दिया। जैसे कि महाभारत में 10 हजार श्‍लोक थे जो आज करीब सवा लाख हो गए हैं, क्योंकि समय-समय पर सबने अपने–अपने अनुसार उसमें बदलाव किए। उन्‍होंने कहा कि पहले लोगों के पास भौतिक साधन कम थे, लेकिन वे अधिक व्‍यवस्थित थे। आज ठीक इसके उलट है। आज लोग भौतिक रूप से संपन्‍न तो हैं, लेकिन व्‍यवस्थित नहीं हैं। इसलिए आज आवश्‍यकता इस बात की है कि वेदों और उपनिषदों में लिखी बातों को हम आत्‍मसात करें।

इस मौके पर ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ के को-फाउंडर अनुराग मिश्र, मॉर्सल रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमि. के मैनेजिंग डायरेक्‍टर भारतेंदु त्रिवेदी, the2is.com के वरिष्‍ठ सलाहकार नीलमणि लाल समेत कई गणमान्‍य लोग उपस्थित थे।

पंडितजी हैं डॉट कॉम : परिचय

आज जीवन के भागमभाग में लोगों के पास इतना समय नहीं कि वे घर में छोटी-बड़ी पूजा के लिए सही समय पर सही पंडित को ढूंढ पाएं। इसका उनके वर्तमान और भविष्य पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही सही नियम न पता होने से की गई पूजा भी सफलतापूर्वक संपन्‍न नहीं होती। इस समस्या के निदान के लिए हमने एक ऐसी ऑनलाइन सुविधा ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ शुरू की है जिससे आपको किसी भी पूजा–पाठ के लिए पंडित को ढूंढने और पूजा सामग्री के लिए कहीं जाना नहीं पड़ेगा। हम उन्हें आप तक घर बैठे ही पहुंचाएंगे।

इस वेबसाइट के जरिए कोई भी, कभी भी बेहद आसानी और सरलता से योग्य एवं शास्त्रसिद्ध पंडित से संपर्क कर सकता है। सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों एवं कर्मकांडों को वैदिक विधियों व शुद्ध मंत्रोचारण से संपन्न करवाने में ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ यजमान और पंडितजी के बीच एक सेतु है। इस वेबसाइट द्वारा वैदिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने एवं आडम्बर रहित शुद्ध मंत्रोच्चारित पूजा संपन्न करवाने की पहल की गई है।

पंडितजी खुद आपके घर पूजन सामग्री लेकर आएंगे और पूजन सामग्री से लेकर पंडितजी की दक्षिणा का खर्चा आपको अलग से नहीं देना होगा, बल्कि यह सारा खर्च जब आप हमारी वेबसाइट से पंडित बुक करेंगे, उसमें जुड़ जाएगा।

इनका कहना है

प्राचीन समय में जब यज्ञ और पूजा-पाठ का आयोजन होता था तो मंत्रों का सही उच्‍चारण होता था, लेकिन आज जानकारी के अभाव में ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’ के जरिए हमारा प्रयास इसी अभाव को दूर करना है ताकि समाज पर इसका सकारात्‍मक प्रभाव पड़े।

  • कल्‍पना यादव, फाउंडर, ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’

‘आज धर्म, भक्ति, कर्मकाण्ड, संस्कार तथा अन्य अनेक मांगलिक विधानों का वास्तविक तात्पर्य गौड़ हो चुका है। इसका कारण अध्ययन और परिश्रम का अभाव तो है ही, साथ ही स्वार्थ परायणता भी उपर्युक्त विधानों के ह्रास के लिए कम उत्तरदायी नहीं है। फलस्वरूप कर्मकाण्डों, संस्कारों को निरा आडम्बर माना जाने लगा है और उन्हें संदेहात्मक दृष्टि से देखा जाने लगा है।

‘जाने बिनु न होई परतीती, बिनु परतीती होई नहीं प्रीती’

हमारा प्रयास भूत और भविष्य को वर्तमान की संधि पर जोड़ने का है। उद्देश्य बड़ा है और इसे साधने में हिन्दू धर्मानुयायियों और भारतीय संस्कृति और सभ्यता के पोषक व्यक्तियों के सहयोग की आकांक्षा है।’

  • अनुराग मिश्र, को-फाउंडर, ‘पंडितजी हैं डॉट कॉम’

‘धर्म की सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। Panditjihain.com  के जरिये हम लोगों तक विद्वान् पंडित पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे लोगों को सही पूजा तो मिलेगी ही, साथ ही सही जानकारी भी पहुंचेगी। यही हमारा प्रयास है।’

  • भारतेन्दु त्रिवेदी, मैनेजिंग डायरेक्टर, मॉर्सल रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रा.लि.