लखनऊ नगर निगम ने कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इसका उल्‍लंघन करने पर 500 रुपये का जुर्माना है।

इसके बावजूद कचरा जलाने की घटनाएं रोज होती हैं, इन पर कोई रोक नहीं।

दुनिया के सबसे ज्‍यादा प्रदूषित शहरों में इलाहाबाद तीसरे नंबर पर।

दुनिया के टॉप 20 प्रदूषित शहरों में भारत के 10 शहर शामिल।

सौजन्‍य त्रिपाठी / धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

लखनऊ नगर निगम का कहना है शहर में कहीं भी कचरा नहीं जलाया जाता है और यहां कचरा जलाने पर प्रतिबंध पूरी तरह से लागू है। लेकिन असलियत कुछ और ही बयान करती है। शहर में कहीं भी निकल जाइए, सुबह-शाम जगह-जगह कूड़े के जलते हुए ढेर आपको देखने को मिल जाएंगे। यही नहीं, आईआईएम रोड पर स्थित घैला घाट में कूड़े की डंपिंग के लिए बने ग्राउंड पर तो हर समय कचरा सुलगता देखा जा सकता है। यह हाल केवल लखनऊ का ही नहीं है, देश के ज्‍यादातर शहरों में कचरा जलाने पर प्रतिबंध कागजी खानापूरी ही बनकर रह गया है। अगर हम अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढि़यां बीमारियां साथ लेकर पैदा होंगी और हम हाथ मलते रह जाएंगे।



कचरा

शहरों में जलता हुआ कचरा

असल में सरकार या नीति नियामक संस्‍थाओं द्वारा नीतियां बना देना ही काफी नहीं है। इनका अपेक्षित परिणाम तभी मिलता है जब इन नीतियों को लागू करने वाले सख्‍ती से इसका पालन कराएं। लखनऊ नगर निगम ने खुद कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाया है और ऐसा करने वाले व्यक्ति पर 500 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। इसके बावजूद जगह-जगह धड़ल्‍ले से खुले में कचरा जलाया जा रहा है। विडंबना यह है कि निगम के कर्मचारी ही इन नियमों का पालन नहीं करते। रोज सड़कों पर सफाई करने के बाद इकट्ठा कचरे को वे खुद ही सड़क किनारे जलाते हैं। ऐसा शहर के ज्‍यादातर हिस्‍सों में देखा जा सकता है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश में कूड़े-कचरे और और फसल के अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। एनजीटी ने पिछले दिनों इस संबंध में यूपी, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की सरकारों को नोटिस भी जारी किए हैं और कहा है कि वे अपने नागरिकों को इस बारे में जागरूक करें कि कचरा जलाने से निकलने वाले धुएं का सेहत पर कितना हानिकारक प्रभाव पड़ता है। एनजीटी के अनुसार, कचरा जलाने से वायु प्रदूषण में लगभग 30% का इजाफा होता है। हालांकि कचरा जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन यह अप्रभावी ही साबित हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लुधियाना दुनिया का 12वां सबसे ज्‍यादा प्रदूषित शहर है, जहां सबसे ज्‍यादा कचरा जलाने के मामले सामने आए हैं।



कचरा

जलता हुआ कचरा. Image credit: Muqeed

कचरा जलाने से सेहत को नुकसान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कचरे में प्लास्टिक, पॉली बैग और अन्य नष्‍ट न होने वाली गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री होती हैं। कचरा जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हेक्‍साक्‍लोरोबेंजीन,  नाइट्रोजन डाई आक्‍साइड, मीथेन और डाइऑक्सींस जैसी विषैली गैसें और खतरनाक महीन कण निकलते हैं, जो वायुमंडल में पहुंच जाते हैं। इनसे साँस, त्वचा आदि से सम्बन्धित बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है। इनसे सबसे ज्‍यादा प्रभावित बच्‍चे, महिलाएं और बुजुर्ग होते हैं। सर्दियों के मौसम में कूड़ा जलाने पर वायुमंडल में धूल और धुएं की एक मोटी परत जमा हो जाती है जिससे प्रदूषण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे वायुमंडल में सांस लेने पर यह हमारी सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित होता है। इससे व्‍यक्ति की उम्र कम हो जाती है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति ओबाक बरामा के दिल्‍ली दौरे से अमेरिका लौटने के बाद आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस एक विजिट के बाद ही प्रदूषण के कारण उनकी उम्र 10 दिन कम हो गई। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जो देशवासी इसी वातावरण में रह रहे हैं, उनकी सेहत का क्‍या हाल होगा ?

छह महीने में सिर्फ आठ चालान !

लखनऊ नगर निगम ने दिसंबर 2016 में कचरे को जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जब उत्तरी भारत का एक बड़ा हिस्सा लगातार कई दिनों तक गहरे धुंध और धुएं की चपेट में आ गया था। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 6 महीनों में कचरा जलाने पर केवल 8 चालान किए गए हैं और 58 निगम कर्मचारियों को दंडित किया गया है। दंड के रूप में उनका एक दिन का वेतन काटा गया।

नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी अख्तर मेहंदी आब्‍दी का कहना है कि कचरा जलाने पर प्रतिबंध लागू करना आसान नहीं है क्योंकि नगर निगम को सूर्यास्त के बाद चालान काटने का अधिकार ही नहीं है। उन्‍होंने कहा कि कचरा जलाने में ज्‍यादातर कमजोर वर्गों के लोग शामिल होते हैं, जो झुग्गी बस्तियों में रहते हैं या दिहाड़ी मजदूर हैं और वे जुर्माना देने में समर्थ नहीं हैं।

कचरा जलाने पर रोक न लगने का एक बड़ा कारण यह है कि नगर पालिका द्वारा नियुक्त सफाई कर्मचारियों को कूड़े-कचरे के निस्‍तारण का कोई प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता है। इस पर रोक तभी लगेगी जब कर्मचारियों को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाए और उन्‍हें कचरा जलाने से सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाए। इसके अलावा, कचरे का कोई वर्गीकरण भी नहीं किया गया है जिसके अनुसार उसे अलग-अलग नष्‍ट करने का प्रावधान हो।

कचरा

दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर

दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में यूपी के 4 शहर

मई, 2016 में आई विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍लूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक इलाहाबाद यूपी का सबसे प्रदूषित शहर है, जबकि लखनऊ चौथे स्‍थान पर है। वहीं देशभर में इलाहाबाद तीसरे और लखनऊ चौथे स्‍थान पर है। इस लिस्‍ट में कानपुर यूपी का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है।

टॉप 10 सूची में भारत के चार शहर

डब्‍लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे ज्‍यादा प्रदूषित शहरों में ईरान का जबोल शहर पहले नंबर पर है। प्रदूषण के मामले में अमेरिका के शहर सबसे पीछे हैं। भारत के शहरों में पहला नाम मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर का है। ग्‍वालियर को दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है। वहीं इलाहाबाद को दुनिया का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर तो पटना को छठा और रायपुर को सातवें सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया है। दिल्‍ली 11वें स्‍थान पर है।

वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण

वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में प्राकृतिक व मानवीय दोनों शामिल हैं। प्राकृतिक कारणों के तहत आंधी-तूफान के समय उड़ती धूल, ज्वालामुखियों से निकली राख, कोहरा, वनों में लगी आग से उत्पन्न धुआं और नष्‍ट होने वाले पदार्थों से निकली मीथेन गैस वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। वहीं दूसरी ओर मानवीय कारणों के तहत औद्योगिकीकरण, खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला, गोबर के कंडे, मिट्टी तेल का इस्‍तेमाल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, थर्मल पावर के लिए कोयले का दहन, आणविक ऊर्जा, कृषि कार्यों में कीटनाशकों का उपयोग व धूम्रपान आदि शामिल हैं।

प्रदूषण निगल लेता है हर साल 30 लाख जानें

डब्‍लूएचओ के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल 30 लाख से ज्‍यादा लोग अकाल मौत की शरण में चले जाते हैं। हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण ही था। इनमें खाना बनाने के दौरान कोयला, लकड़ी और जैव ईंधन स्‍टोव का इस्‍तेमाल और गाडि़यों से निकलने वाला धुआं प्रमुख कारण थे।