• वायु प्रदूषण की नई राजधानी बना लखनऊ

एक ताजा अध्‍ययन के अनुसार, विश्व के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में 10 भारत के हैं और हर चार में से एक मौत का कारण प्रदूषण है। एड्स और मलेरिया से कहीं अधिक मौतें वायु प्रदूषण के कारण होती हैं। आज लखनऊ वायु प्रदूषण की नई राजधानी बन चुका है। यह कोई अचानक आई आपदा नहीं है और न ही सिर्फ कुछ दिनों की समस्या है, फिर भी हम सचेत नहीं हैं। सच तो यह है कि वायु प्रदूषण पर्यावरण, स्वास्थ्य के साथ ही हमारी अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। दुनिया में प्रदूषण से मरने वाली 92% आबादी कम या मध्यम आय वाले मुल्कों से है। शोध के मुताबिक, प्रदूषण के कारण ही इन मुल्कों की जीडीपी वृद्धि दर में 2% की गिरावट दर्ज होती है। वायु प्रदूषण के खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करा रहे हैं रजनीश राज

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अगर वायु प्रदूषण कम हो जाए तो भारतीयों की औसत आयु 4 वर्ष तक बढ़ सकती है। भारत और चीन में वायु प्रदूषण इस हद तक बढ़ चुका है कि दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में से आधी सिर्फ इन दो देशों में ही होती हैं। इन तथ्यों से साफ है कि स्थिति अत्यंत भयावह है।

लखनऊ में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए 16 नवम्‍बर को फायर ब्रिगेड और नगर निगम के टैंकरों से पानी का छिड़काव किया गया

लखनऊ देश का सबसे प्रदूषित शहर

हवा में घुलते जहर ने 14 नवम्‍बर को न सिर्फ प्रदेश की राजधानी लखनऊ को देश का सबसे प्रदूषित शहर बना दिया, बल्कि देश के सबसे प्रदूषित 5 शहरों में सभी यूपी के ही हैं। इनमें लखनऊ के अलावा गाजियाबाद, कानपुर, मुरादाबाद और नोएडा शामिल हैं। लखनऊ ने तो प्रदूषण में गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया। लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्‍यूआई) 484 रिकॉर्ड किया गया जो पिछले एक महीने में सर्वाधिक है। पिछले कुछ दिनों से देश का सबसे प्रदूषित शहर रहे गाजियाबाद का एक्यूआई लखनऊ से कम (467) रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ का एक्यूआई सूक्ष्मतम कण ‘पीएम 2.5’ के अधिक होने से बढ़ गया है। यानी वाहनों के धुएं, निर्माण कार्यों के चलते सीमेंट और मौरंग की धूल व डीजल के जलने पर निकलने वाली हानिकारक गैसों ने प्रदूषण में इजाफा किया।

नेचर जर्नल की रिपोर्ट

नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अगर कारगर उपाय नहीं किए गए तो वर्ष 2050 तक हर साल तकरीबन 66 लाख लोग अकाल मृत्यु के शिकार हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में प्रदूषित हवा की वजह से हर साल तकरीबन 33 लाख लोग असमय अपनी जान गंवा रहे हैं।

मेडिकल जर्नल लैन्सेट की रिपोर्ट

मेडिकल जर्नल लैन्सेट के अनुसार, भारत में हर साल 25 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण अपनी जान गंवाते हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया में प्रदूषण से मौत के मामले में भारत सबसे आगे है। रिसर्च के मुताबिक, भारत में होने वाली हर चार में से एक मौत प्रदूषण से होती है, जो कुल होने वाली मौत का 24.4% है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में 90 लाख से ज़्यादा लोग प्रदूषण के चलते जान गंवाते हैं। ये आंकड़ा दुनिया में मरने वाले लोगों का 16% है। अगर दूसरे तरीके से समझें तो ये आंकड़ा एड्स, क्षयरोग और मलेरिया जैसी बीमारी से मरने वालों से तीन गुना ज़्यादा है।

बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट

दुनिया भर में वायु प्रदूषण को स्वास्थ्य के एक बड़े खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। डब्ल्यूएचओ की बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में होने वाली हर 9 में से एक मौत के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है।

सीएसई की रिपोर्ट

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरन्मेंट (सीएसई) के अनुसार, हाल के वर्षों में उत्तर भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा असर लोगों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सर्वे बताते हैं कि देश के मुख्य शहरों में, जिनमें लखनऊ भी शामिल है, बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

क्या हो रहे हैं उपाय

  • वायु प्रदूषण पर प्रभावी रोकथाम हेतु पूरे राज्य में वृक्षारोपण पर दिया जा रहा है बल
  • वायु प्रदूषण कम करने के लिए बीएस—IV वाहनों का हो रहा है पंजीकरण
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सीएनजी के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर दिया जा रहा है जोर
  • ट्रकों के शहरों में प्रवेश पर लगाया जा रहा है अंकुश
  • भारी डीजल कारों से ग्रीन टैक्स की वसूली का प्रावधान
  • ऑड-ईवन जैसा हो रहा है प्रयोग
  • पटाखों की बिक्री पर लगाया जा रहा है प्रतिबंध

ये भी हो रहा है असर

  • देश की राजधानी में 12 साल से कम उम्र के 15 लाख बच्चे ऐसे हैं जो खेलने-दौड़ने की उम्र में पैदल चलने पर ही हांफ रहे हैं।
  • जापान, जर्मनी जैसे कई देशों ने दिल्ली में अपने राजनयिकों की नियुक्ति की अवधि कम करना शुरू कर दिया है ताकि यहां का जहर उनकी सांसों में कुछ कम घुले।

लखनऊ में कई विभागों की जिम्मेदारी तय

लखनऊ में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली की तर्ज पर फार्मूले की तलाश तेज हो गई है। 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को प्रतिबंधित भी किया जा सकता है। फिलहाल जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने निम्नलिखित विभागों की जवाबदेही तय की है –

1. नगर निगम, 2. आवास विकास परिषद, 3. मंडी परिषद, 4. एलडीए, 5. मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, 6. यूपीएसआरटीसी,          7. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  

आपका कहना है

एक माह तक वायु प्रदूषण के स्तर की गहन जांच की जाएगी। संबंधित विभागों को पर्यावरण के नुकसान का आकलन कर एक माह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। उसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी, लखनऊ

बेहद अफसोसनाक है कि देश में कई तरह के कड़े कानूनों के बावजूद वायु प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। दुनिया भर के देशों में चीन और हिन्दुस्तान में कूड़े का करीब 40 फीसदी से ज्यादा हिस्‍सा जला दिया जाता है। हैरानी की बात नहीं कि ये दोनों ही देश आज भयंकर प्रदूषण की चपेट में हैं। कूड़ा जलाने से न केवल हवा जहरीली होती है बल्कि बीमारियां भी बढ़ती हैं। जलते कूड़े से कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जिनसे सांस से जुड़ी समस्याएं हर उम्र के लोगों में बढ़ रही हैं। हमारे देश में प्लास्टिक की बोतल, टायर और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान समेत हर तरह का कचरा जला दिया जाता है, यह भी वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है।

अमृतेश श्रीवास्तव, पर्यावरण विशेषज्ञ

वायु प्रदूषण के कारण सांस सम्बन्धी रोगों के बढ़ने के साथ ही मौत तक हो सकती है। सांस के रोगियों को प्रदूषित माहौल में कम निकलना चाहिए। सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

डॉ. मनीष मिश्रा, चिकित्सक