• सेना ने राष्‍ट्रपति मुगाबे को किया नजरबंद, उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा बने अंतरिम राष्‍ट्रपति
  • 93 साल के मुगाबे 37 सालों से थे राष्ट्रपति, अपनी पत्‍नी की राष्‍ट्रपति पद पर चाहते थे ताजपोशी

रजनीश राज

1980 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद जिम्बाब्वे की सत्ता पर काबिज 93 वर्षीय राबर्ट मुगाबे को सेना ने नजरबन्द कर दिया है। उनकी जगह उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा को अंतरिम राष्‍ट्रपति बनाया गया है। राबर्ट मुगाबे ने उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा को पिछले साल बर्खास्त कर दिया था। उपराष्ट्रपति की बर्खास्तगी को लेकर राबर्ट मुगाबे और सेना प्रमुख चिवेंगा में टकराव पैदा हो गया था। मनांगाग्वा की बर्खास्तगी से पहले सेना प्रमुख का मुगाबे की पत्नी ग्रेस से कई बार टकराव हुआ था। सेना प्रमुख मनांगाग्वा की बर्खास्तगी को रद्द करने की मांग कर रहे थे। कहा जा रहा है कि ग्रेस के उकसाने पर ही मुगाबे ने मनांगाग्‍वा को हटाया था। ग्रेस को अगले राष्ट्रपति के लिए मनांगाग्वा का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है।

सेना ने कहा, यह तख्तापलट नहीं

जिम्बाब्वे की सेना का कहना है कि उनकी कार्रवाई तख्तापलट नहीं है। सेना अब भी राबर्ट मुगाबे को कमांडर-इन-चीफ बता रही है, लेकिन मुगाबे के हाथ में कमान होती तो सेना के पास जब चाहे तब पासा पलटने का अधिकार कैसे होता। अफ्रीका में अब तक जो हुआ है, उसके हिसाब से सरकारी टीवी पर कब्जा करना, सड़कों और हर अहम रास्ते पर सेना की मौजूदगी और राष्ट्रपति भवन में जबरन घुसना – ये सभी तख्तापलट की तरफ इशारा करते हैं। बस एक काम जो नहीं किया गया है – वह है संविधान को बर्खास्त करना।

जिम्‍बाब्‍वे में अब क्‍या होगा

जिम्बाब्वे की सत्ता पर सेना के नियंत्रण के बाद अब क्या होगा और सेना का अगला रुख क्या होगा, पूरी दुनिया की नजरें इस पर लगी हैं। एक संभावना यह है कि जिम्बाब्वे में हुए तख्तापलट के बाद दक्षिण अफ्रीका के रक्षा मंत्री, राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और सेना के उन जनरलों से मिल सकते हैं जिन्होंने मुगाबे को घर में नजरबंद कर रखा है। सूत्रों के मुताबिक मुगाबे कुछ शर्तों पर अड़े हुए हैं। हालांकि जिम्बाब्वे में कोई भी मुगाबे को उनके पद पर देखना नहीं चाहता।

उधर, बर्खास्त किए गए उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्‍वा के गद्दी संभालने की पूरी संभावना है। हालांकि अगर बर्खास्त उपराष्ट्रपति एमर्सन को सत्ता सौंपी जाती है तो उनकी राह आसान नहीं होगी। उनकी विश्वसनीयता मुगाबे की तरह नहीं है। एमर्सन भी जिम्बाब्वे की आजादी की लड़ाई के अहम चेहरा रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वो सेना, खुफिया एजेंसियों और सत्ताधारी पार्टी के बीच कड़ी जोड़ने काम करते हैं। उन पर जिम्बाब्वे में गृहयुद्ध के दौरान दमन और विपक्ष पर हमले करने के भी आरोप हैं। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी एमडीसी का कहना है कि वह अंतरिम सरकार का हिस्सा बनने पर विचार करेगी।

विवादों से गहरा रिश्ता रहा है मुगाबे का

अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्नी का विवादों से पुराना नाता रहा है। उनका पूरा नाम रॉबर्ट गैबरियल मुगाबे है। मुगाबे को प्रभावशाली वक्ता, विवादों में घिरा रहने वाला व्यक्ति एवं लोगों को ध्रुवीकृत करने में माहिर समझे जाने वाले राजनीतिज्ञ के रूप में जाना जाता रहा है। स्वतंत्रता युद्ध के बाद वे अफ़्रीकियों के नायक के तौर पर उभर कर सामने आए थे।

वे पहली बार 1960 में ज़िम्बाब्वे अफ़्रीकन नेशनल यूनियन पार्टी के नेता के तौर प्रसिद्ध हुए थे। उस समय रोडेशिया में गोरे लोगों का अल्पसंख्यक राज चल रहा था। इसके ख़िलाफ़ नेशनल यूनियन ने 1964-1979 के दौरान छापामार युद्ध छेड़ रखा था। देश में उनके शासनकाल के दौरान धीरे-धीरे भड़के असंतोष ने ही उग्र रूप लिया है। उन पर निजी हित में काम करने के आरोप लगते रहे हैं। इससे स्वतंत्रता सेनानियों में भी नाराजगी थी। फिलहाल जिम्बाब्वे की घटना ने सेना-सत्ता के बीच चलने वाले संघर्ष का नया उदाहरण प्रस्तुत किया है।

रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्‍नी ग्रेस मुगाबे

राष्‍ट्रपति पद पर चाहते थे पत्‍नी की ताजपोशी

93 साल के रॉबर्ट मुगाबे इस उम्र में दांवपेंच की राजनीतिक चाल बखूबी समझ कर चल रहे थे। वह 37 सालों से राष्ट्रपति हैं और अब तुरुप का पत्ता चलते हुए अपनी पत्नी की ताजपोशी चाहते थे। इस क्रम में बीते दिनों उन्होंने उपराष्ट्रपति एमर्सन मनांगाग्वा को उनके पद से हटा दिया था। हरारे में ये भी चर्चाएं थीं कि मुगाबे का अगला कदम आर्मी चीफ शिवेंगा की बर्खास्तगी होगी। इससे पूर्व ही सेना ने सत्ता अपने हाथ में ले ली। दरअसल मनांगाग्वा राष्ट्रपति की दौड़ में थे और उन्हें उनसे खतरा लगने लगा। मुगाबे ने अपनी पत्नी ग्रेस को रेस में शामिल करने के लिए ऐसा किया। पत्नी प्रेम में उठाया गया यह कदम उनको भारी पड़ गया। मनांगाग्वा की सेना में लोकप्रियता का अंदाजा वे नहीं लगा पाए और उसके बाद जो कुछ भी हुआ, वह आज सबके सामने है।

1980 से रॉबर्ट मुगाबे ब्रिटेन से आजाद हुए गरीब देश जिम्बाब्वे की सत्ता संभाल रहे हैं। उनकी तानाशाही को पहले सेना का व्यापक समर्थन हासिल था, लेकिन हाल के सालों में रॉबर्ट ने कई दिग्गजों को पार्टी से निकाला जो आजादी की लड़ाई में शामिल थे। पार्टी से निकाले गए दिग्गजों ने साल 2016 में एक अलग फ्रंट बनाने की घोषणा की ताकि रॉबर्ट की सत्ता को चुनौती दी जा सके। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रॉबर्ट मुगाबे सिर्फ नाम मात्र के राष्ट्रपति रहे हैं जबकि असल में देश मनांगाग्वा और उनके सहयोगी ही चलाते हैं।

कौन हैं ग्रेस मुगाबे?

मुगाबे से लगभग 41 साल छोटी 52 वर्षीय ग्रेस साउथ अफ्रीकी मूल की महिला हैं। जब वह प्रेसिडेंट ऑफिस में सेक्रेटरी थीं, तभी उनका राष्ट्रपति मुगाबे से अफेयर शुरू हुआ। ग्रेस ने पति से तलाक लेकर मुगाबे से शादी कर ली और मुगाबे से उन्हें दो बच्चे हुए। मुगाबे की पहली पत्नी का बीमारी से निधन हो गया था। ग्रेस खर्चीली महिला के तौर पर जानी जाती हैं। यहां तक कि उन्हें गूची ग्रेस भी कहा जाने लगा। हाल के सालों में उनका राजनीतिक रुतबा और दखल बढ़ा है। बावजूद इसके ग्रेस के समर्थकों की संख्या काफी सीमित है। उनकी आदतें ऐसी हैं कि दोस्त कम दुश्मन ज्यादा बने हैं। जिम्बाब्वे गरीबी और भुखमरी से जूझ रहा है, लेकिन उनके ऐशो-आराम की कहानी अक्‍सर आम होती है।

ग्रेस आलीशान जिन्दगी के लिए जानी जाती हैं। दिल खोलकर अपनी पसंद की चीजों पर खर्च करती हैं। देश में उनके शाही खर्च के चर्चे होते हैं। पिछले ही महीने एक लेबनानी ने ग्रेस से 10 लाख डॉलर वसूलने के लिए अदालत की शरण ली। उन्होंने इस व्यक्ति से 100 कैरेट की एक हीरे की अंगूठी ली थी। दुबई और दक्षिण अफ्रीका में उनके आलीशान घर हैं। अपनी बेटी की शादी में ग्रेस ने 30 लाख पौंड सरकारी खजाने से खर्च किया था। हाल ही में उन्होंने तीन लाख पौंड कीमत की रॉल्स रॉयल खरीदी। ग्रेस पर हाल ही में जोहानसबर्ग में एक मॉडल पर हमले का आरोप लगा था। इसके अलावा हांगकांग में फोटो खींच रहे फोटो जर्नलिस्ट पर वे टूट पड़ीं थी। चूंकि उन्हें राजनयिक प्रतिरक्षा हासिल थी इसलिए इन मामलों का पटाक्षेप हो गया।