• देश में तेजी से प्रचलन में आ रहा है बिटक्‍वॉइन, हालांकि इसके इस्‍तेमाल के खतरे भी

निवेश और जल्दी पैसा दोगुनातिगुना करने के लिए शेयर, एमएलएम (मल्‍टी लेबल मार्केटिंग) और पोंजी स्‍कीम के स्थान पर इन दिनों वर्चुअल करेंसी काफी लोकप्रिय हो रही है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी इस करेंसी में पैसा लगाने वालों की कमी नहीं है। बिटक्‍वॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी के सहारे हजारों की किस्मत बुलंद हो चुकी है, हालांकि कुछ धोखा भी खा चुके हैं। इन सबके बाद भी इस पर लोग दांव लगा रहे हैं। इसकी विश्वसनीयता अभी कायम है। इसी का परिणाम है कि 36 रुपए से शुरू हुए बिटक्‍वॉइन की कीमत आज लाखों में पहुंच चुकी है। वर्चुअल करेंसी इंडस्ट्री से परिचित करा रहे हैं रजनीश राज

दुनिया में आज करीब 100 से अधिक वर्चुअल करेंसी चलन में हैं, लेकिन भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय बिटक्‍वॉइन है। ताजा जानकारी के मुताबिक, देश में 137 लाख बिटक्‍वॉइन सर्कुलेशन में हैं, जिनकी बाजार कीमत 2.7 अरब डॉलर है। भारत में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर दिन इससे नए लोग जुड़ रहे हैं। ऐप आधारित बिटक्‍वॉइन एक्सचेंज ऐप जेबपे के एंड्रायड मंच पर उसे डाउनलोड करने वालों की संख्या पांच लाख से ऊपर पहुंच गई है। इसमें रोजाना 2,500 से ज्यादा का इजाफा हो रहा है।

दुनिया भर में प्रचलित कुछ वर्चुअल करेंसी

क्या है बिटक्‍वॉइन

आखिर किस बला का नाम है बिटक्‍वॉइन? जैसा कि आप जानते ही होंगे कि मानव सभ्यता के विकास के साथ ही मुद्रा का विकास भी प्रारंभ हुआ। हालांकि किसी भी वस्तु के लेन-देन के लिए मुद्रा का चलन बहुत बाद में शुरू हुआ। मुद्रा के प्रचलन से पूर्व सामानों के जरिए ही लेन-देन की परम्‍परा थी। कई पड़ावों को पार करते हुए वर्तमान मुद्रा का स्वरूप सामने आया है। आईटी विशेषज्ञ आनन्द शुक्ला बताते हैं कि बिटक्‍वॉइन एक वर्चुअल करेंसी है जिसकी कीमत समय-समय पर निर्धारित होती रहती है।

पारंपरिक मुद्राओं के उलट, यह किसी देश या बैंक से नहीं जुड़ा होता है, न ही इसका कोई भंडार (रिजर्व) होता है। इस पर कोई सरकारी नियंत्रण भी नहीं है। इस मुद्रा को किसी भी बैंक ने जारी नहीं किया है। इस पर कोई टैक्स भी नहीं लगता है। डिजिटल मुद्रा के भुगतान का सुदृढ़ नेटवर्क है और यह पूरी तरह विश्वास पर कायम है। माना जाता है कि 2009 में इसे लांच किया गया था। सच कहा जाए तो बिटक्वाइन पूरी तरह गुप्त करेंसी है और इसे सब से छुपाकर रखा जा सकता है। इसे दुनिया में कहीं भी सीधा ख़रीदा या बेचा जा सकता है।

बिटक्‍वॉइन के खतरे

देश के दूसरे हिस्सों की तरह उत्तर प्रदेश में भी बिटक्‍वॉइन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, हालांकि लोग इसके खतरों से भी वाकिफ हैं। बिटक्‍वॉइन का प्रयोग करने वाले अभिनव गुप्ता ने बताया कि यह मुद्रा के लेन-देन का एक आसान तरीका हो सकता है, लेकिन इस पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।

इसका प्रयोग करने वाले जानकार बताते हैं कि बिटक्‍वॉइन का इस्तेमाल पैसे को देश से बाहर भेजने के लिए किया जा रहा है। कुछ ऑनलाइन पोर्टल इसे स्वीकार भी कर रहे हैं। अवैध वस्तुओं और सेवाओं को बिटक्‍वॉइन से बदला जाता है। ड्रग्स बेचने वाले और सोने के तस्करों तक में यह काफी लोक​प्रिय है। कुछ लोगों का कहना है कि सेक्स ट्वाय या नशीली दवाएं मंगवानी हैं तो भी बिटक्‍वॉइन का प्रयोग सरल रहता है, क्योंकि इससे पहचान छुपी रहती है।

उमेंद्र कहते हैं कि अकुशल खिलाड़ी इस क्षेत्र में धोखा भी सकता है, जैसा कि उनके साथ हुआ है। बिटक्‍वॉइन की चोरी के भी कई मामले हुए हैं। जिस तरह भौतिक मुद्रा की चोरी की जाती है, उसी तरह बिटक्‍वॉइन के वॉलेट की भी चोरी हो सकती है। इसे ट्रैक करना कठिन होता है।

बिटक्वाइन का इस्तेमाल फंड ट्रांसफर, इंटरनेट पर सीधे लेनदेन, सामान खरीदने और गैरकानूनी खरीद-बिक्री में होता है। शायद यही कारण है कि चीन में इसे प्रतिबंधित भी किया गया है। देखा जाए जो शुरुआत में कंप्यूटर पर बेहद जटिल कार्यों के बदले ये क्रिप्टो करेंसी कमाई जाती थी। यह करेंसी सिर्फ़ कोड में होती है। बिटक्‍वॉइन किसी सेंट्रल बैंक के कंट्रोल में नहीं है और बिटक्‍वॉइन का सौदा किससे हुआ, यह पता लगा पाना मुश्किल है। इसकी कीमत वितरण में आई बिटक्‍वॉइन की संख्या से ही तय होती है।

कैसे काम करता है यह

आईटी के जानकारों के अनुसार बिटक्‍वॉइन किसी मोबाइल एप या कंप्यूटर प्रोग्राम से अधिक कुछ भी नहीं है, जो एक व्यक्तिगत बिटक्‍वॉइन वॉलेट मुहैया कराता है। इसका इस्तेमाल करने वाले को यह बिटक्‍वॉइन भेजने और लेने में सक्षम बनाता है। इस प्रक्रिया में पहले तो एक एकाउंट बनाया जाता है, फिर उस एकाउंट में फंड का ट्रांसफर किया जाता है, ताकि बिटक्‍वॉइन खरीदे जा सकें। डॉलर में इसका मूल्य बदलता रहता है।

पहचान छिपी लेकिन पारदर्शी व्यवस्था

कुछ लोगों का कहना है कि बिटक्‍वॉइन में मुद्रा दुनिया के किसी भी कोने में तुरंत भेजी और पाई जा सकती है। हालांकि इसमें पहचान छिपी रहती है लेकिन पूरी पारदर्शिता रहती है। इसके लिए किसी भी बैंक या बिचौलिए की जरूरत नहीं होती है। इसमें सारा लेन-देन पूरी तरह से सार्वजनिक होता है। इसके इन्हीं गुणों की कारण निवेशक बिटक्‍वॉइन को पसंद कर रहे हैं।

कई देशों में मिल रही है मान्यता

नेटिजन (कंप्यूटर-साक्षर लोग) के बीच लोकप्रिय वर्चुअल मुद्रा बिटक्‍वॉइन के खतरों को नजरअंदाज कर कई देश इसे मान्यता देने के पक्षधर भी हैं। दुनिया के कई देश ‘वर्चुअल करेंसी इंडस्ट्री’ को प्रमोट करने का पक्ष भी ले रहे हैं। अमेरिका और यूरोप में सरकारें इन्हें रेग्यूलेट करने की बात कर रही हैं। कनाडा में बिटक्‍वॉइन का एक एटीएम भी खुला है जिसमें ग्राहक बिटक्‍वॉइन के बदले कैश या कैश के बदले बिटक्‍वॉइन ले सकते हैं। जर्मनी के वित्त मंत्रालय ने इसे ‘खाते की एक इकाई’ (यूनिट ऑफ एकाउंट) के तौर पर मान्यता भी दे दी है।