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ग्रामीण क्षेत्रों में 90 फीसदी लोग हाइपरटेंशन के शिकार

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  • रिपोर्ट में दावा : 2016 में हाई ब्लडप्रेशर ने ली 16 लाख भारतीयों की जान

नई दिल्ली। एक ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 3 भारतीय हाइपरटेंशन यानी उच्‍च रक्‍तचाप की बीमारी के शिकार हैं। वर्ष 2017 में हुई कुल मौतों में से 17.5% का कारण हाइपरटेंशन रहा। 2017 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2016 में 16 लाख मौतें हाइपरटेंशन के कारण हुई हैं। उधर, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 10 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 20 फीसदी उच्च रक्तचाप वाले लोगों का ब्‍लडप्रेशर नियंत्रण में है।

किसने जारी किए आंकड़े ?

ये आंकड़े वॉशिंगटन स्थित ‘इंस्‍टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड एवोल्युशन’ द्वारा ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ से लिये गए हैं। इसके अनुसार, भारत में बीमारी के कारण होने वाली मौतों का चौथा कारण हाइपरटेंशन है, जो 2016 में 16 लाख से अधिक लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार था। बता दें कि यह आंकड़ा मॉरीशस की आबादी से ज्यादा और भूटान की आबादी के दोगुने से भी ज्यादा है।

क्या है हाइपरटेंशन ?

हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप वह स्थिति होती है, जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें तनाव, फास्ट फूड, व्यायाम की कमी, धूम्रपान का सेवन आदि शामिल है। किसी व्‍यक्ति के रक्तचाप की सामान्य रेंज 120/80 एमएमएसजी होती है। हाइपरटेंशन बढ़ने से इसका असर शरीर के मुख्य अंगों जैसे ब्रेन, किडनी, हृदय, आंख आदि पर होता है। सिर में दर्द, घबराहट, नाक से खून बहना, छाती में दर्द और ठीक से नींद न आना इसके लक्षण हैं।

क्‍या कहना है ICMR का ?

‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव कहते हैं, ‘हाइपरटेंशन या उच्‍च रक्तचाप भारत में समयपूर्व मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। यह सभी तरह के स्ट्रोक के मामलों में 29 फीसदी और भारत में 24  फीसदी दिल के दौरे के लिए सीधे जिम्मेदार है।’ एक और अध्‍ययन के अनुसार, भारत में 60 फीसदी मौतों का कारण हृदय रोग, मधुमेह, पुराने श्‍वांस रोग, कैंसर और अन्य गैर संक्रमणीय बीमारियां हैं। इनमें से 55 फीसदी की मौत समय से पहले हो जाती है।

केवल 10 फीसदी ग्रामीणों का बीपी नियंत्रण में

इंडियास्‍पेंड की अक्‍टूबर 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में 33 फीसदी लोगों और ग्रामीण भारत में 25 फीसदी लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत है। अगर औसत निकालें तो भारत में करीब 29.8 फीसदी लोगों को उच्च रक्तचाप है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 25 फीसदी ग्रामीणों और 42 फीसदी शहरी भारतीयों को अपने उच्च रक्तचाप के बारे में जानकारी है। केवल 25 फीसदी ग्रामीण और 38 फीसदी शहरी भारतीय उच्च रक्तचाप का इलाज करा रहे हैं। ‘जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक,  इलाज कराने वालों में से केवल 10 फीसदी ग्रामीण और 20 फीसदी शहरी आबादी का बीपी नियंत्रण में है।

हाइपरटेंशन का इलाज आसान, लेकिन लोग गंभीर नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च रक्तचाप को रोकना, निदान या इलाज करना आसान है, लेकिन ज्यादातर भारतीय इस समस्या से अनजान हैं और यहां तक ​​कि कुछ ही लोगों में यह नियंत्रण में है। उच्च रक्तचाप का इलाज सामान्य व सस्ती दवाओं के साथ किया जा सकता है, लेकिन लोग इसके प्रति गंभीर नहीं हैं। वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग के निदेशक और ‘हाइपरटेंशन जर्नल’ के संपादक  सी. वेंकट एस. राम कहते हैं, ‘अक्सर रोगी यह सोचकर कि वे ठीक हो गए हैं,  दवाएं लेना बंद कर देते हैं, जो आगे चलकर खतरनाक हो सकता है।’

देश में डॉक्टरों की कमी भी बड़ा कारण

एक सच यह भी है कि देश 5 लाख डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। संसद की स्‍थायी समिति के अनुसार, 2014 के अंत तक देश में 7.4 लाख डॉक्टर थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, प्रति हजार आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए, जबकि भारत में 1,674 लोगों पर एक डॉक्टर है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार सर्जरी, स्त्री और शिशु रोग जैसे चिकित्सा के बुनियादी क्षेत्रों में 50 फीसदी डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण इलाकों में तो यह आंकड़ा 82 फीसदी तक पहुंच जाता है। अगर देश में अगले पांच सालों तक हर वर्ष 100 मेडिकल कॉलेज भी खोले जाएं तो भी वर्ष 2029 से पहले मरीजों और डॉक्टरों के अनुपात में सामंजस्य बिठा पाना मुमकिन नहीं होगा।

भारत के 50% से ज्‍यादा डॉक्‍टर हाइपरटेंशन से पीडि़त  

आईएमए, एचसीएफआई और एरिस लाइफसाइंसेस की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 50 फीसदी से ज्यादा चिकित्सक हाइपरटेंशन की बीमारी से ग्रस्त हैं। यह अध्‍ययन भारत के 33 शहरों में किया गया। इसमें पाया गया कि 56 प्रतिशत डॉक्टरों का ब्‍लडप्रेशन रात को अनियमित रहता है। निश्चित रूप से यह खतरे की घंटी है।

कैसे बचें हाइपरटेंशन से ?

डॉक्‍टरों का कहना है कि जो लोग पैक्ड फूड, रेस्तरां का खाना और फास्ट फूड के शौकीन हैं, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। प्रॉसेस्‍ड फूड जैसे जैम, केचप और तरह-तरह के स्नैक्स से बचने की भी सलाह दी गई है। ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अगर हम रोजाना खाने वाली चीजों से 3 ग्राम नमक घटाकर सेवन करें, तो सेहत में काफी सुधार आएगा। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक व हार्ट अटैक की आशंका एक तिहाई कम हो जाएगी। विशेषज्ञों ने उच्च रक्तचाप को रोकने और नियंत्रित करने में जीवन शैली में बदलाव पर भी जोर दिया है। शराब और तंबाकू से परहेज, शरीर का वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम, फल व सब्जियों का अधिक सेवन उच्च रक्तचाप को कम कर सकता है।

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