OMG! चिकन-मटन को छोड़‍िए, असम के इस गांव में 200 रुपए किलो मिलता है चूहा

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नई दिल्ली। ज्यादातर लोगों को नॉनवेज बहुत पसंद होता है। नॉनवेज को लोग अलग-अलग तरह से बनाकर खाते हैं। आज हम आपको असम के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लोग चिकन – मटन नहीं चूहा खा रहे हैं। यहां चूहा 200रु. किलो मिलता है।

गांव के किसान अपने खेतों में फसल बचाने के लिए चूहों को मारते हैं। चूहा असम के गरीब किसानों और आदिवासियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। कुमारिकाता गांव के सम्‍बा सोरेन कहते हैं, हम खेतों में जाल लगाते हैं और चूहों को फंसाते हैं। फिर इन्‍हें बाजार में कच्‍चा या फिर उबालकर बेचा जाता है। गुवाहाटी से 90 किलोमीटर दूर भारत-भूटान सीमा से लगे कुमारिकाता गांव में बाजार लगता है। रविवार के दिन लगने वाले इस बाजार में भारी संख्‍या में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं और यहां चूहे के मांस की सबसे ज्‍यादा बिक्री होती है। इस बाजार में चिकन और मटन के मुकाबले चूहे का मांस ज्यादा लोकप्रिय है।

किसानों का दावा है कि चूहे पकड़ने से हाल के दिनों में उनकी फसल को होने वाले नुकसान में कमी आई है। चूहों को पकड़ने का तरीका बताते हुए एक विक्रेता ने कहा कि रात के समय जब वह अपने बिल के पास आते हैं, तब उनका शिकार किया जाता है। इस दौरान वह बिल के नजदीक लगाए गए चूहेदान में फंस जाते हैं।

चूहे का मांस बेचने का काम अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लोग करते हैं, उनके लिये चाय बागान में काम करने के अलावा यह आमदनी का एक और जरिया है।

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