इस तरह बनेगी सड़क तो खतरनाक प्लास्टिक से मिलेगी मुक्ति, मौतें भी होंगी कम

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चेन्नई। जल, जंगल और जमीन के लिए जानलेवा साबित हो रहे प्लास्टिक का उपयोग अब सड़क बनाने में किया जाएगा। भारत में इस तरह की सड़के बनने की शुरुआत हो चुकी है। चेन्नई के जंबुलिंगम स्ट्रीट को प्लास्टिक से बनाया गया है। इसे देखकर आपके मन में यही ख्याल आएगा कि क्या सचमुच प्लास्टिक से सड़क बन सकती है?

जंबुलिंगम स्ट्रीट भारत की पहली प्लास्टिक सड़कों में से एक है। ऐसी सड़क बनाने के लिए विशेष गोंद का उपयोग किया जाता है। प्लास्टिक के कचरे से सड़कें बनने से स्वच्छ भारत अभियान को नई दिशा मिलेगी। उड़ीसा के राउरकेला ने भी इस तकनीक को आजमाया है। यहां राउरकेला क्लब से लेकर सेक्टर-2 शक्तिनगर चौक तक एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया। खास बात यह है कि उड़ीसा में प्लास्टिक डिस्पोजल को लेकर इतना बड़ा प्रयोग पहली बार किया गया है।

प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करके बनाई जाने वाली सड़कें मानसून के दौरान टिकाऊ होती हैं। जिससे बारिश के मौसम में गड्ढे नहीं बनते हैं। डामर से बनने वाली सड़कों में सबसे ज्यादा गड्ढे बनते हैं क्योंकि बारिश की मौसम में डामर बह जाता है। गड्डों की वजह से सबसे ज्यादा लोगों की जान जाती हैं। आंकड़ों के मुताबिक पांच साल के दौरान गड्ढों से 14,926 लोगों की मौत हुई है। इस मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यूं तो समान्य दिनों में लोगों को ये गड्ढे दिख जाते हैं और वह इनसे बचकर भी निकल जाते हैं। लेकिन बारिश के दिनों में इनसे बच पाना नामुमकिन सा होता है। सड़कों पर पानी के निकास की उचित व्यवस्था न होने से इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिसके कारण सड़क के गड्ढे कई बार दिखाई नहीं पड़ते।

प्लास्टिक से बनी सड़कों की उम्र सामान्य सड़कों की तुलना में 25 फीसद अधिक होती है। एक आकलन के अनुसार देश में प्रतिदिन करीब 15 हजार टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसमें से करीब नौ हजार टन प्लास्टिक को री-साइकिल कर काम में ले लिया जाता है।

प्लास्टिक से बनी सड़कों के लिए गिट्टी व तारकोल मिलाने के दो तरीके हैं। पहला गर्म गिट्टी के साथ प्लास्टिक को मिलाया जा सकता है। इसके अलावा तारकोल के साथ प्लास्टिक को मिलाकर बाद में गिट्टी मिलाई जा सकती है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत प्लास्टिक कचरे के छोटे छोटे टुकड़े कर उन्हें गर्म डामर में मिलाया जाता है। इस मिश्रण को पत्थरों पर डाला जाता है। प्लास्टिक कचरे में पॉलीथिन, टॉफी-चॉकलेट के रैपर से लेकर शॉपिंग बैग तक शामिल होते हैं।

सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से तीन फायदे होंगे। इससे शहर, गांव, कस्बों में उड़ते पॉलिथीन और प्लास्टिक के कचरे से निजात मिलेगी, इससे सड़कें ज्यादा मजबूत बनने के साथ लागत भी घटेगी और इससे प्लास्टिक कचरा बीनने वालों को आमदनी का एक जरिया मिलेगा तथा गांव-शहर स्वच्छ होंगे वह अलग। प्लास्टिक की वजह से फैलते प्रदूषण को भी रोका जा सकेगा।

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