जानिए क्या है ऑनलाइन स्टॉकिंग और इसकी वजह से कितनी सजा मिल सकती है?

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लखनऊ। पिछले दिनों खबर आई थी कि एक टॉप कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट अभिषेक शर्मा ने ऑनलाइन स्टॉकिंग की वजह से 25 मंजिले से कूदकर अपनी जान दे दी। क्या आप जानते हैं आखिर ये ऑनलाइन स्टॉकिंग है क्या और इसकी वजह से कितनी सजा मिल सकती है? चलिए आपको बताते हैं।

क्या है ऑनलाइन स्टॉकिंग

आजकल सोशल मीडिया की एक तरह से सभी को लत गई है। सोशल मीडिया की इतनी ज्यादा आदत हो गई है कि जो भी हमें वहां दिखता है हम उसी को सच मानते हैं और जैसा सोशल मीडिया हमें निर्देश देता है हम उसी के अनुसार चलने लगते हैं। लेकिन जैसे-जैसे इनके यूजर्स बढ़ रहे है खतरा भी बढता जा रहा है। आजकल ऑनलाइन स्टॉकिंग के कई लोग शिकार होते है क्योंकि इसके बारे में लोगों को पता नहीं होता।

साइबर स्टॉकिंग एक तरह क मानसिक शोषण की प्रवृत्ती है, जो पीड़ित के जीवन को न केवल तहस Œनहस कर सकती है, बल्कि उसे मनोरोग, मृत्यु या आत्महत्या तक किसी भी त्रासदी में धकेल सकती है। जब ऑनलाइन माध्यम का प्रयोग करके किसी को परेशान करने के लिये ई-मेल या मैसेज भेजा जाता है तो उसे साइबर स्टॉकिंग कहते हैं। इस समस्या से भारत जैसे विकासशील देश ही नहीं बल्कि अमेरिका एवं ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी पीड़ित हैं। इस समस्या के पीड़ितों में महिलाओं एवं बच्चों का प्रतिशत लगभग तीन-चौथाई (75%) है जबकि 25% पीड़ित पुरुष हैं।

जानिए कितनी सजा मिलती है?
अपने देश में स्त्री सुरक्षा के लिए बने कानूनों की एक लंबी फेहरिस्त मौजूद है। आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 500, 506 और 509 के तहत सजा मिल सकती है। साइबर स्टॉकिंग को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 सी एवं 354डी के तहत अपराध घोषित किया गया है।अधिनियम 2000 के तहत भी अपराध घोषित किया गया है।

इंटरनेट के माध्यम से अश्लीलता का व्यापार भी खूब फलफूल रहा है। ऐसे में पोर्नोग्राफी एक बड़ा कारोबार बन गई है। जिसके दायरे में ऐसे फोटो, विडियो, टेक्स्ट, ऑडियो और सामग्री आती है, जो यौन, यौन कृत्यों और नग्नता पर आधारित हो। ऐसी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से प्रकाशित करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिए प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है। दूसरों के नग्न या अश्लील वीडियो तैयार करने वाले या ऐसा एमएमएस बनाने वाले या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से इन्हे दूसरों तक पहुंचाने वाले और किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश भेजने वाले लोग इसी कानून के दायरे में आते हैं। पोर्नोग्राफी प्रकाशित करना और इलेक्ट्रॉनिक जरियों से दूसरों तक पहुंचाना अवैध है, लेकिन उसे देखना, पढ़ना या सुनना अवैध नहीं माना जाता। जबकि चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना भी अवैध माना जाता है। इसके तहत आने वाले मामलों में आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 67 (ए), आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 500, 506 और 509 के तहत सजा का प्रावधान है। जुर्म की गंभीरता के लिहाज से पहली गलती पर पांच साल तक की जेल या दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है लेकिन दूसरी बार गलती करने पर जेल की सजा सात साल तक बढ़ सकती है।

आईपीसी की धारा 354 सी- ताक-झांक या छिप कर देखना

कोई व्यक्ति किसी महिला को छिप कर देखे या उसके फोटो का गलत तरह से इस्तेमाल करके सार्वजनिक कर दे। इसके अलावा किसी महिला को घूरकर देखना पर पहली आशय के लिए कम से कम 1 साल और ज्यादा से ज्यादा 3 साल के कारावास या जुर्माने या दोनों से ही दंडित किया जा सकता है। दूसरी बार ऐसा करने पर कम से कम 3 साल या ज्यादा से ज्यादा 7 साल की जेल हो सकती है।

आईपीसी की धारा 354 डी – पीछा करना

अगर कोई शख्स महिला का पीछा करता है या फिर उससे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करता है और यह महिला की मर्जी के खिलाफ किया जाता है , तो इसे स्टॉकिंग माना जाएगा। ऐसे मामले में आईपीसी की धारा -354 डी के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है। इसमें दोषी पाए जाने पर 3 साल तक कैद हो सकती है। दोषी को पहले बार 3 साल की सजा मिलती है और अगर दूसरी बार अगर वो व्यक्ति ऐसा ही करते हुए पाया गया तो उसे 5 साल की जेल होगी और जुर्माना देना होगा।

ऑनलाइन स्टॉकिंग में ये हुई थी सजा
भारत में साइबर स्टॉकिंग का पहला मामला वर्ष 2001 में दर्ज किया गया। इस मामले में दिल्ली निवासी मनीष कथूरिया को एक महिला की अश्लील फोटो एवं फोन नंबर वेबसाइट पर डालने के जुर्म में भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत गिरफ्तार किया गया।

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