किसान बदहाल, बिचौलिए मालामाल, ये है खेती का हाल !

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नई दिल्ली। पूरे देश में किसान की हालत पस्‍त है। इसकी बड़ी वजह बिचौलिए हैं, क्योंकि बिचौरियां किसान की उपज का सही दाम नहीं दे रहे हैं। थोक बाजारों में किसानों को अपनी सब्जियों की कीमत 1 रुपए प्रति किलो या उससे भी कम मिल रही है, वही सब्जियां लोगों को 20 से 50 रुपए प्रति किलो की कीमत पर मिल रही है।इसकी वजह से किसानों की हालत और ज्यादा खराब हो गई है।

हाल ही में महाराष्ट्र के एक किसान को उसके बैंगन की कीमत सिर्फ 20 पैसे प्रति किलो मिली। इतने नुकसान को देखकर उसे इतना गुस्सा आया कि उसने अपनी सारी फसल को आग लगा दी। इसके अलावा महाराष्ट्र के एक किसान संजय साठे को उसकी फसल की कीमत सिर्फ 1 रुपए प्रति किलो मिली। संजय साठे ने इसका विरोध किया और PM मोदी तक अपनी बात पहुंचाई। उन्होंने कहा- मैंने 750 किलो प्याज उगाया था। लेकिन मुझे 1 रुपए प्रति किलो की कीमत मिल रही थी। जब मैंने थोड़ा मोलभाव किया तो 1140 पैसे की दर से मैंने अपनी फसल बेची। हरियाणा के करनाल स्थित होलसेल मार्केट में पालक, गाजर और धनिया जैसी चीजें 2 रुपए से लेकर 7 रुपए प्रति किलो की दर पर मिल रही हैं। क्योंकि राज्य सरकार की फसल एमएसपी स्कीम आलू और टमाटर पर केंद्रित हैं तो इन किसानों के पास इतनी कम कीमत पर अपनी फसल बेचने के अलावा और कोई चारा भी नहीं है। पुणे की बात करें तो यहां की खुदरा बाजार में भले टमाटर 20 रुपए किलो बिक रहा है, लेकिन इस साल टमाटर की बंपर फसल ने किसानों की हालत खराब कर दी है। थोक बाजार में किसानों को अपनी फसल 3-6 रुपए किलो के हिसाब से बेचनी पड़ रही है।

आखिर यह स्थित क्यों है?

देश में उत्पादित करीब 40 प्रतिशत ताजा खाद्य पदार्थ ग्राहकों तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। इसके कई कारण होते हैं,जैसे कि कोल्ड स्टोरेज की कमी और जल्दी खराब हो जाने वाली फसलें। इसका मतलब है कि किसानों के पास अपनी फसल को जल्दी से जल्दी निकालने के अलावा कोई चारा नहीं बचता।

कितने किसानों ने खुदकुशी की है

किसानों की दुर्दशा तो हर राज्य में है, लेकिन मध्यप्रदेश इनमें सबसे ऊपर है। 2006 से 2016 तक देश में 1 लाख 42 हजार किसानों ने परेशान होकर खुदकुशी की थी। मध्यप्रदेश में साल 2016 में ही 1321 किसानों ने जान दे दी। केंद्र सरकार ने लोकसभा में मार्च 2018 में बताया कि 2013 के बाद मध्यप्रदेश में किसानों की खुदकुशी की ये सबसे ज्यादा घटनाएं रहीं।अधिकतर किसानों ने कीटनाशक पीकर तो कुछ ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। किसानों पर सबसे अधिक मार बेमौसम बारिश और सूखे से पड़ती है और कई बार दाम गिरने से भी इनकी कमाई पर असर पड़ता है।

पूरे देश में 2014 से 2016 तक किसानों की खुदकुशी की घटनाएं कम हुईं, लेकिन मध्यप्रदेश में 21 फीसदी ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की। लोकसभा में साल 2016 में केंद्र सरकार ने बताया था कि उस साल भारत में कुल 6351 किसानों ने खुदकुशी की थी, जिसमें से 9 फीसदी किसान छ्त्तीसगढ़ के थे। इस तरह किसानों की खुदकुशी के मामलों में छत्तीसगढ़ का स्थान पांचवां था। बता दें कि छत्तीसगढ़ में करीब 43 लाख किसान हैं। राज्य का 77 फीसदी हिस्सा ग्रामीण है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 17 फीसदी कृषि से आता है।

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