उन्नाव की इस पैडवुमन ने नहीं मानी हार, जज्बे को लोग कर रहे सलाम

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लखनऊ। सैनेटरी पैड पर बात करने को आज भी कई क्षेत्रों में गंदा व अपवित्र माना जाता है। यही नहीं टीवी पर इसका विज्ञापन चलता हो तो चैनल बदल दिया जाता है। लोगों की इस सोच को बदलती हुई नजर आ रही हैं उन्नाव की पैडवुमन ‘पद्मिनी’।

हिंदी अखबार ”नवभारत टाइम्स” के मुताबिक, यूपी के उन्नाव जिले के हसनगंज कस्बे में रहने वाली पद्मिनी ने सैनिटरी पैड की फैक्ट्री लगाकर रूढ़ियों को चुनौती जो दी है। बरेली से एमएससी कर चुकी पद्मिनी की शादी 2008 में हसनगंज कस्बे के ओमप्रकाश से हुई थी। इस काम में वो तभी सफल हो पाईं जब उनके पति ने उनका पूरा दिया। उन्होंने बताया कि मैंने दिल्ली में एक सेमिनार में शामिल होने के बाद महिलाओं की बेहतरी के लिए पद्मिनी ने सैनिटरी पैड की फैक्ट्री लगाने के बारे में सोचा। पति को लगा कि मैं मजाक कर रही हूं। मेरे मजबूत इरादे को देखते हुए उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया।

ये दंपनी अब 8 लोगों को रोजगार भी दे रहा है। इन्होंने सरकारी स्कीम के तहत काम शुरू करने के लिए 2.94 लाख रुपये जमा कराए। चार मशीनों के साथ उन्हें पैड बनाने की ट्रेनिंग मिली। पिछले कुछ महीनों से सैनिटरी पैड बनाने का काम शुरू किया। पद्मिनी बच्चियों को पैड देकर जागरूक कर रही हैं।

पद्मिनी ने बताया कि गांव की महिलाएं पीरियड्स के वक्त कपड़े का इस्तेमाल करती थीं। मैंने उन्हें इसके नुकसान औ फैलने वाली बिमारियों के बारे में बताया। कई महिलाओं ने इसकी वजह से बात तक करना बंद कर दिया। लेकिन मेरी मेहनत धीरे-धीरे रंग लाई और जिसके बाद काफी कुछ बदला। उनका कहना है कि महिलाएं धीरे-धीरे अपने स्वास्थ्य के लिए जागरूक हो रही हैं।

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