इंसुलिन की कमी से डायबिटीज रोगियों को हो सकती है बड़ी दिक्कत

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लंदन। दुनियाभर में डायबिटीज महामारी की तरह फैल रही है और डायबीटीज को कंट्रोल करने में इस्तेमाल होने वाली दवा इंसुलिन की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन अगले कुछ सालों में लाखों-करोड़ों लोग ऐसे होंगे जो इंसुलिन के इंजेक्शन से वंचित रह जाएंगे। हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बताया गया है कि इंसुलिन की बढ़ती डिमांड को देखते हुए अगर उसकी आपूर्ति और कीमत में कमी नहीं की गई तो बहुत से डायबीटीज के मरीजों को इंसुलिन नहीं मिल पाएगा।

क्या होता है इंसुलिन
इंसुलिन शरीर में बनने वाला एक तरह का हार्मोन होता है। यह शरीर में रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने का काम करता है। इंसुलिन की कमी या इन्सुलिन का सही तरह से कार्य न कर पाने से डायबिटीज के लक्षण विकसित होने लगते हैं।

नहीं मिल पाएगा इंसुलिन
लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलोजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, साल 2030 तक टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लगभग 8 करोड़ लोगों को इंसुलिन की जरूरत होगी। 2030 तक इस दवा की मांग में 20 फीसद की बढ़ने की संभावना है, लेकिन इनमें से लगभग आधे से ज्यादा लोग इस दवा को हासिल नहीं कर पाएंगे। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी जिसका सही समय पर इलाज न हो तो पीड़ित व्यक्ति की आंखों की रोशनी जा सकती है, किडनी फेल हो सकती है, हृदय से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं और यहां तक की अंग काटने तक की नौबत आ सकती है। दुनियाभर में टाइप 2 डायबिटीज तेजी से फैल रहा है जिसका संबंध मोटापा और एक्सर्साइज की कमी से है।

इंसुलिन बहुत महंगी
इंसुलिन 97 साल पुरानी दवा है, जिसे 20वीं सदी में ‘चमत्कारी दवा’ कहा गया था। ऐसे में इतने सालों बाद भी ये दवा इतनी महंगी क्यों है? ये एक बड़ा सवाल है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1554 अरब रुपए के वैश्विक इंसुलिन बाजार का 99 फीसद हिस्सा तीन मल्टीनेशनल कंपनियों- नोवो नोरडिस्क, इलि लिली एंड कंपनी और सनोफी के पास है। इसके साथ ही बाजार के आकार के लिहाज से इन कंपनियों के पास 96 फीसदी हिस्सेदारी है। यही तीन कंपनियां पूरे अमरीका को इंसुलिन की आपूर्ति करवाती हैं। स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ संजय बासु कहते हैं कि एशिया और अफ्रीका के देशों में इंसुलिन की सबसे ज्यादा कमी देखने को मिल रही है। दुनिया भर के 132 देशों में से 91 से ज्यादा देश इंसुलिन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाते हैं। लेकिन इसके बावजूद ये दवा लोगों के लिए काफी महंगी है क्योंकि करों के साथ-साथ सप्लाई चेन पर होने वाले खर्च की वजह से ये दवा लोगों की पहुंच से बाहर हो जाती है।

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Posted by - January 17, 2018 0
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