शोध में खुलासा : वायु प्रदूषण से एक साल में दोगुने हुए फेफड़े के कैंसर के मामले

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नई दिल्ली हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि हवा में PM 2.5 की मात्रा अधिक होने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। हवा में मौजूद धूल के महीन कण जिन्हें ‘पार्टिकुलेट मैटर’ या PM कहा जाता है, वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं। यह प्रदूषण की वजह से होने वाले फेफड़ों के कैंसर की प्रमुख वजह है। आंकड़ों के अनुसार, एक साल में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में दोगुने से अधिक बढ़ोतरी हुई है।

PM 2.5  में कई घातक तत्‍व

वर्ष 2013 में ‘इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी)’ ने भी वायु प्रदूषण को कैंसर का प्रमुख कारण माना था।  प्रदूषण को इसलिए  कैंसर का कारण माना जाता है क्योंकि यह धूम्रपान और मोटापे की तरह ही प्रत्यक्ष रूप से कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। PM 2.5  में आयरन, कॉपर, जिंक, मैंगनीज तथा अन्य धातुएं और नुकसानदायक पॉलीसाइक्लिक एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन और लिपोपॉलीसैकराइड आदि शामिल होते हैं।

कैसे करता है प्रभावित ?

दिल्‍ली के मैक्स हेल्थकेयर के आंकोलॉजी विभाग में प्रमुख कंसलटेंट डॉ. गगन सैनी का कहना है, ‘PM 2.5 से होने वाले नुकसान का प्रमाण फ्री रैडिकल, मैटल और ऑर्गेनिक कंपोनेंट के रूप में दिखाई देता है। ये फेफड़ों के जरिए आसानी से हमारे रक्त में घुलकर फेफड़ों की कोशिकाओं को क्षति पहुंचाते हैं। ये पदार्थ फेफड़ों में फ्री रैडिकल बनने की प्रक्रिया को और बढ़ा सकते हैं तथा स्वस्थ कोशिकाओं में मौजूद डीएनए के लिए भी नुकसानदेह होते हैं।’ डॉ. सैनी बताते हैं, ‘PM 2.5 शरीर में इंफ्लेमेशन को भी बढ़ावा देता है। वैसे तो इंफ्लेमेशन हमारे शरीर में होने वाले रोजमर्रा के संक्रमणों से निपटता है, लेकिन इसकी अधिकता होने से केमिकल एक्टीवेशन बढ़ जाता है। इससे कोशिकाओं में असामान्य तरीके से विभाजन होता है, जो कैंसर का शुरुआती कारण बनता है।

एक साल में दोगुने हुए मामले

आंकड़ों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर के 80,000 नए मामले सामने आए हैं। इनमें धूम्रपान नहीं करने वाले लोग भी शामिल हैं और ऐसे लोगों में कैंसर के मामले 30 से 40 फीसदी तक बढ़े हैं। इनमें 30 से 40 वर्ष की आयुवर्ग के युवा, अधिकतर महिलाएं और साथ ही एडवांस कैंसर से ग्रस्त धूम्रपान न करने वाले लोग शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका कारण मोटापा या शराब का सेवन भी हो सकता है, लेकिन सबसे ज्‍यादा जोखिम वायु प्रदूषण से है। डॉ. सैनी बताते हैं कि दिल्ली स्थित AIIMS में फेफड़ों के कैंसर के मामले 2013-14 में 940 से बढ़कर 2015-16 में दोगुने से ज्‍यादा 2,082 तक जा पहुंचे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि वायु प्रदूषण इसके लिए काफी हद तक जिम्‍मेदार है।

दूसरे कैंसर का भी है कारण

डॉ. सैनी का कहना है कि वायु प्रदूषण न सिर्फ फेफड़ों के कैंसर के लिए जिम्‍मेदार है, बल्कि इसके कारण स्तन कैंसर, जिगर के कैंसर और अग्नाशय के कैंसर होने की भी आशंका है। वायु प्रदूषण मुख और गले के कैंसर का भी कारण बनता है। ऐसे में अगर हम मानव जाति को बचाना चाहते हैं तो वायु प्रदूषण से सभी को मिलकर मुकाबला करना होगा।

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