अब उम्र से पहले ही खराब हो रहे घुटने, हर 6 में से एक व्यक्ति आर्थराइटिस से पीड़ित

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नई दिल्‍ली। एक समय था जब घुटनों में दर्द को बढ़ती उम्र की निशानी समझा जाता था, पर आजकल कम उम्र में ही लोग इस समस्‍या से ग्रस्‍त हो रहे हैं। आज भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग घुटने की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनमें से 4 करोड़ लोगों को घुटना बदलवाने (टोटल नी रिप्लेसमेंट) की जरूरत है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हमारे देश में हर 6 में से एक व्यक्ति आर्थराइटिस से पीड़ित है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिलाएं इस समस्‍या से ज्‍यादा पीडि़त हैं।  

पीडि़तों में 63 प्रतिशत महिलाएं

हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 50  या इससे अधिक उम्र की 63 प्रतिशत महिलाएं घुटनों की समस्या से परेशान हैं। अध्ययन में शामिल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. निगेल एर्डन के अनुसार, यह पहला अध्ययन है, जिसमें सिर्फ महिलाओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन में 44 से 57 साल आयु वर्ग की 1000 से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया।

घुटनों के दर्द को हल्‍के में ना लें

12 साल तक चले इस अध्ययन में सामने आया कि इसकी वजह घुटनों में किसी प्रकार की चोट, मोटापा या रेडियोग्राफिक ऑस्टियो अर्थराइटिस होता है। रिसर्च के अनुसार जिनका बीएमआई यानी मोटापा अधिक है, उनमें घुटनों के दर्द की शिकायत ज्यादा रहती है। यह समझना जरूरी है कि घुटनों का दर्द कोई सामान्‍य दर्द नहीं है, बल्कि इसके कई गंभीर कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख कारण जिनके कारण उम्र से पहले ही घुटने खराब हो रहे हैं –

मोटापा

समय से पहले घुटनों में दर्द होने का एक प्रमुख कारण मोटापा है। शरीर का वजन बढ़ने का सबसे ज्यादा असर घुटनों पर ही पड़ता है। जब जरूरत से ज्याजा वजन घुटनों पर पड़ने लगता है तो जोड़ों में दर्द होने लगता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि उम्र के हिसाब से वजन को नियंत्रित रखा जाए।

मांसपेशियों में बदलाव

कई बार मांसपेशियों में बदलाव होने के कारण भी उम्र से पहले ही जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। 20 से 60 साल की आयु के बीच मांसपेशियां करीब 40 फीसदी तक सिकुड़ जाती हैं और उनमें ताकत कम होने लगती हैं। जब हम शारीरिक क्रियाएं करते हैं तो कूल्हों और टांगों की मांसपेशियां पर शरीर का भार उठाते हैं, मगर उम्र के साथ मांसपेशियों की क्षमता कम होने से टांगों पर अधिक दबाव पड़ता है। यही वजह है कि हमारे घुटनों में दर्द होने लगता है।

ऑस्टियोपो‍रोसिस

यह बीमारी आजकल 20 से 30 वर्ष की आयु के करीब 14 प्रतिशत लोगों में भी बहुत आम हो गई है। इस बीमारी में शरीर की हड्डियों की रक्षा करने वाले कार्टिलेज टूट जाते हैं। जब हड्डियों को मजबूत करने वाले तत्व टूट जाते हैं तो उनमें दर्द होना शुरू हो जाता है।

आर्थराइटिस

पुराने जमाने में आर्थराइटिस की समस्या केवल उम्रदजराज लोगों में ही देखने को मिलती थी, मगर आजकल छोटे बच्चे भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। आर्थराइटिस होने का खतरा सबसे ज्यादा महिलाओं को होता है। नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ. अतुल मिश्रा बताते हैं, ‘हमारे देश में घुटने की आर्थराइटिस का प्रकोप चीन की तुलना में दोगुना तथा पश्चिमी देशों की तुलना में 15 गुना है। इसका कारण यह है कि भारतीय लोगों में जेनेटिक एवं अन्य कारणों से घुटने की आर्थराइटिस से पीड़ित होने का खतरा अधिक होता है।’ आज देश में घुटने की आर्थराइटिस से पीडित लगभग 30 प्रतिशत मरीज 45 से 50 साल के हैं, जबकि 18 से 20 प्रतिशत रोगी 35 से 45 साल के हैं।

बर्साइटिस

घुटने में चोट लगने, भाग-दौड़ करने के कारण भी जोड़ों के आस-पास सूजन होने लगती है। यह समस्या सबसे ज्यादा खिलाड़ियों और जिम जाने वाले लोगों को होती है। इसके अलावा जिन लोगों का वजन जरूरत से ज्यादा है उनको भी घुटनों, कंधा, कोहनी, कूल्हा और घुटनों में दर्द होने लगता है। इसके अलावा एक और बीमारी है टेन्टीनाइटिस। इस बीमारी में सीढ़ियां चढ़ते और उतरते समय घुटने में सामने की ओर दर्द बढ़ जाता है। टेन्टीनाइटिस धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वाले लोगों को ज्यादा होता है।

खानपान और जीवनशैली भी जिम्‍मेदार

विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों मेट्रो शहरों के लोगों को ज्यादातर बीमारियां तय आयु से 15 साल पहले होने लगी हैं। इसके पीछे एक वजह हमारी खराब जीवनशैली और खानापान भी है।  डॉक्‍टरों का कहना है कि ज्‍यादातर भारतीय उठने-बैठने में घुटने के जोड़ का अधिक इस्तेमाल करते हैं। इस कारण शरीर के अन्य जोड़ों की तुलना में घुटने जल्दी खराब होते हैं। हमारे देश में लोग पूजा करने, खाना खाने, खाना बनाने और बैठते समय पालथी मारकर बैठते हैं। इसके अलावा पारंपरिक शौचालयों में भी घुटने के बल बैठना पड़ता है। ये सभी कारण घुटनों के दर्द के लिए जिम्‍मेदार हैं। इसके अलावा मौजूदा समय में जंक फूड और फास्ट फूड के बढ़ते इस्तेमाल तथा खान-पान की गलत आदतों के कारण शरीर की हड्डियों को कैल्शियम और जरूरी खनिज नहीं मिल पा रहे हैं।  इससे हड्डियां घिसने और कमजोर होने लगी हैं और युवाओं में भी आर्थराइटिस व ओस्टियो आर्थराइटिस की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।

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