अरबों खर्च, लेकिन रूस की आबादी से ज्यादा भारतीयों को नहीं मिलता पीने का साफ पानी

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नई दिल्ली। अरबों रुपए खर्च हो गए हैं, लेकिन रूस की आबादी से ज्यादा ग्रामीण भारतीयों को अब भी पीने का साफ पानी मुहैया नहीं है। हालत ये है कि 16 करोड़ से ज्यादा लोगों को गांवों में पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। वो भी तब, जबकि 2017 तक पांच साल में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छ पेयजल मिशन नाम की योजना पर 89 हजार 956 करोड़ का खर्च हो चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छ पेयजल मिशन के तहत 2017 तक 35 फीसदी घरों तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य था। ताकि, हर व्यक्ति को हर दिन कम से कम 40 लीटर साफ पानी मिल सके, लेकिन सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि इस लक्ष्य का आधा भी हासिल नहीं किया जा सका है।

मोदी सरकार ने भी जुलाई 2018 में संसद में एक सवाल के जवाब में माना है कि करीब 18 फीसदी ग्रामीण आबादी में हर व्यक्ति को हर रोज 40 लीटर से भी कम साफ पानी मिलता है। जबकि, सरकार ने अगस्त 2017 में संसद में ही बताया था कि 50 फीसदी ग्रामीण घरों में पाइप के जरिए साफ पानी पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। सरकार ने तब बताया था कि साल 2022 तक 90 फीसदी ग्रामीण घरों में पाइप से पानी की सप्लाई सुनिश्चित कर दी जाएगी।

दिसंबर 2017 तक सिर्फ 44 फीसदी ग्रामीण इलाकों और 85 फीसदी सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में ही पीने का साफ पानी पहुंचाया जा सका था। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि गांवों की 18 फीसदी आबादी और 17 फीसदी घरों तक ही पाइप से पीने का पानी पहुंचाया जा सका है। बता दें कि जल संसाधन मंत्रालय ने 2017 में अनुमान लगाया था कि भारत में साल 2025 तक हर व्यक्ति को 1341 घन मीटर पानी मिल सकेगा। जबकि, 2025 तक ये घटकर 1140 घन मीटर हो जाएगा। ऐसे में बड़ी आबादी के लिए साफ पानी तो दूर की बात, पानी मिलना तक मुश्किल होने की बात मंत्रालय के सर्वे में सामने आई थी।

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