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अब भांग से होगा कैंसर और मिरगी का उपचार, शोध में जुटे वैज्ञानिक

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नई दिल्ली। अब कैंसर और मिरगी जैसे रोगों का उपचार भांग की मदद से किया जाएगा। वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के वैज्ञानिक कैंसर, मिरगी और स्किन सेल एनीमिया (खून की कमी) जैसे रोगों के उपचार के लिए भांग के औषधीय उपयोग पर शोध कर रहे हैं।

शोध के लिए मिला लाइसेंस

सीएसआईआर और भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान (IIIM) के निदेशक डॉ. राम विश्वकर्मा ने बताया, ‘हमें जम्मू-कश्मीर सरकार से शोध कार्यक्रम के संचालन का लाइसेंस मिला है। हमने इस पर पहले ही काम शुरू कर दिया है। भांग के पौधे से बनी दवाओं का परीक्षण पशुओं पर शुरू कर दिया गया है। मानव पर औषधि के रूप में भांग के उपयोग की अनुमति के लिए जल्द ही हम भारत के ड्रग महानियंत्रक (DCGI) से मिलेंगे। बता दें कि बांबे हेंप कंपनी (BOHECO) के सहयोग से CSIR-IIIM को भांग उगाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अप्रैल 2017 में लाइसेंस जारी किया था।

टाटा मेमोरियल में होगा पहला परीक्षण

भांग के पौधे से तीन तरह की ऐसी दवाइयों को विकसित किया है जिनका इस्तेमाल मिर्गी, कैंसर, और स्किन सेल जैसे रोगों के उपचार में किया जा सकता है। डॉ. राम विश्वकर्मा के मुताबिक ये दवाएं लोगों को दो साल के भीतर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।  उन्‍होंने बताया कि प्राथमिक तौर पर भांग से प्राप्त औषधि का परीक्षण सबसे पहले मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में किया जाएगा। बता दें कि BOHECO की स्थापना वर्ष 2013 में की गई थी। यह CSIR के साथ साझेदारी में भांग के चिकित्सा और औद्योगिक उपयोग का अध्ययन करने वाला भारत में पहला स्टार्टअप है।

भांग में ढेर सारे औषधीय गुण

BOHECO के सह-संस्थापक जहान पेस्टोन जामास का कहना है कि मिरगी जैसे क्रॉनिक रोगों के इलाज में भांग से बनने वाली दवाइयां असरदार साबित हो सकती हैं। जामास ने कहा, ‘भांग में टेट्रा हाइड्रो कैनाबिनोल (THC) नामक एक रसायन होता है, जिससे नशा होता है। इसके अलावा भांग में सारे औषधीय गुण होते हैं। कई अनुसंधान से पता चला है कि भांग का दुष्प्रभाव नगण्य होता है जबकि औषधीय गुणों के कारण मानसिक रोगों के अलावा कैंसर के इलाज में भी इससे निर्मित दवाइयों का उपयोग हो सकता है।’ उन्होंने बताया कि THC का उपयोग दर्द निवारक दवाओं में किया जाता है, जो कैंसर पीड़ित मरीजों को दर्द से राहत दिलाने में असरदार होती है।

दवाइयों के लिए भांग की खेती जरूरी

जामास ने कहा कि दवाई बनाने के लिए भांग की खेती करने की जरूरत है, लेकिन वर्तमान नारकोटिक्स कानून में भांग की पत्ती और फूल दोनों को शामिल करने से इसमें रुकावट आती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसी नीतियां बनाई जाएं जिससे अनुसंधान के उद्देश्य से भांग की खेती करने की अनुमति मिले। उन्होंने बताया कि गांजे से 15,000 उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार की औषधियों के रूप में किया जा सकता है।

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