जानिए देश में कहां खुला हाथियों के लिए पहला अस्पताल, क्या है इसकी खासियत

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नई दिल्‍ली। आपने भी शायद कभी ना कभी हाथी की सवारी की होगी। कभी आपने सोचा है कि हाथी जब बीमार या घायल हो जाए तब उसका इलाज कैसे होता होगा ? दुधारू पशुओं और कुत्‍तों के लिए तो क्‍लीनिक हैं, लेकिन हाथियों के अस्‍पताल के बारे में आपने नहीं सुना होगा क्‍योंकि आम जानवरों की तरह उसका इलाज नहीं किया जा सकता। लेकिन अब अपने देश में हाथियों के लिए पहला और इकलौता अस्पताल खुल गया है। मथुरा में पिछले हफ्ते ही इस अस्‍पताल का उद्घाटन किया गया।

किसने बनाया यह अस्पताल ?

हाथी की भारतीय संस्कृति में हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कभी यह राजसी शान का प्रतीक रहा, युद्ध में भी इसने भाग लिया, मंदिरों में पूजा में शामिल रहा और अब भी बारात, जुलूस में मौजूद रहता है। अब इनकी देखभाल के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस नामक संस्‍था ने वन विभाग के साथ मिलकर मथुरा जिले में एक हॉस्पिटल का निर्माण किया है। संस्था ने फरह ब्‍लॉक के चुरमुरा गांव के समीप 12 हजार वर्गफीट एरिया में यह अस्पताल खोला है। यह संस्था पहले से ही चुरमुरा गांव में हाथियों के लिए एक आश्रय एवं पुनर्वास गृह का संचालन कर रही है, जहां देश भर से रेस्क्यू किए गए हाथी रहते हैं। इस समय संस्था के आश्रय और पुनर्वास केंद्र में 20 हाथी हैं। बता दें कि यह संस्था आगरा के कीठम में भालू संरक्षण केंद्र का भी संचालन कर रही है।

क्‍या कहते हैं संस्‍था के सीईओ ?

संस्था के को-फाउंडर और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथियों के संरक्षण के मामले में यह अस्पताल मील का पत्थर साबित होगा। इस अस्पताल में अब घायल और बीमार हाथियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा और अच्छे से उनकी देख-रेख हो सकेगी। संस्था के वरिष्ठ वेटरनरी ऑफिसर डॉ. यदुराज खाड़पेकर के अनुसार, ‘बंधक से मुक्त कराए गए हर हाथी के साथ कुछ ना कुछ समस्‍या रहती है। जैसे उसका शरीर बहुत कमजोर हो चुका होता है क्योंकि उसको पौष्टिक भोजन नहीं मिलता। उसके पांव में घाव होते हैं। वे सामाजिक रूप से अलग-थलग हो चुके होते हैं, मानसिक रूप से वे टूट चुके होते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए इंसान पर निर्भर होते हैं।’ इस अस्‍पताल में उन्‍हें इन समस्‍याओं से राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

क्‍या है इस अस्‍पताल की खासियत

  • इस अस्‍पताल में घायल हाथियों के लिए विशेष सुविधा है। जैसे वायरलेस डिजिटल एक्सरे, जिसमें हाथी के पास मशीन ले जाकर एक्सरे किया जा सकता है।
  • अस्‍पताल में लेजर ट्रीटमेंट और सबसे जरूरी दांत के एक्सरे की भी सुविधा है। दूसरी अन्य सुविधाएं जैसे थर्मल इमेजिंग, अल्ट्रासोनोग्राफी, हाइड्रोथेरेपी भी यहां मौजूद है।
  • हाथियों को बेहोश करने के लिए यह एक अलग तरह की बंदूक है।
  • इस अस्‍पताल में हाथी को अकेले में रखने की सुविधा भी बनाई गई है।
  • एक्‍सरे, अल्‍ट्रासाउंड के साथ ही अन्य जांचों के लिए अस्पताल में एक पैथालॉजी लैब भी बनाई गई है।
  • हाथी को 24 घंटे निगरानी में रखने के लिए कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा यह अस्पताल अन्य विशेषज्ञों को सिखाने के लिए एक अच्छा केंद्र है।

भारत में हाथियों की स्थिति

वर्ष 2017 के सेंसस के अनुसार, भारत के जंगलों में 27,312 हाथी हैं, जबकि 2012 के सेंशस के अनुसार हाथियों की संख्या 29,391 से 30,711 के बीच थी। यह सेंशस एशियन नेचर कंजरवेशन फाउंडेशन द्वारा 23 राज्यों में किया गया। इस सेंशस को भारत के पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है। आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में सर्वाधिक 6,049 हाथी हैं, जबकि असम में 5,712 और केरल में 3,054 हाथी हैं। एक आंकड़े के अनुसार, भारत में अब भी लगभग 3000 हाथी निजी लोगों के पास हैं। इनमें सर्कस और अन्य लोग जो हाथी से काम लेते हैं शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि हाथियों की संख्या लगातार घट रही है, जो चिंता का विषय है। जानकार बताते हैं कि 100 साल पहले भारत में करीब 10 लाख हाथी थे।

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