आप जानते हैं, रिटायरमेंट के बाद वफादार कुत्तों को गोली मार देती है भारतीय सेना !

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नई दिल्‍ली। भारतीय सेना हो या पुलिस, उनके साथ कुत्ते भी पूरी लगन के साथ अपनी ड्यूटी निभाते हैं। दरअसल, वफादारी की बात जब भी आती है तो सबसे पहले कुत्ते का नाम ही लिया जाता है। सेना के साथ हमेशा कुत्ते भी होते हैं, जो कई काम में उनकी मदद करते हैं। कुत्ते अपने मालिक के लिए जान तक देने को तैयार रहते हैं। लेकिन भारतीय सेना रिटायरमेंट के बाद अपने ही वफादार कुत्तों को गोली मार देती है। आइए जानते हैं कि आखिर सेना ऐसा क्‍यों करती है ?

क्‍यों साथ होते हैं कुत्ते ?

दरअसल, कुत्ते के सूंघने की प्रवृत्ति काफी तेज होती है। कुत्तों में खोजी प्रवृत्ति भी मौजूद होती है। इनके सूंघने की क्षमता इतनी तीव्र होती है कि आप उसका अंदाजा नहीं लगा सकते। कुत्ते उन जगहों पर भी पहुंच सकते हैं जहां इंसान नहीं पहुंच सकते। सेना इनके जरिए बम और आतंकियों का पता लगाती है। यही कारण है कि जासूसी के लिए कुत्तों को हमेशा इस्‍तेमाल किया जाता है। सेना इन कुत्तों को खास ट्रेनिंग देकर इनका इस्तेमाल करती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि वे कुत्ते जिन्हें इंडियन आर्मी ट्रेंड करती है, रिटायरमेंट के बाद उन्‍हें गोली मार देती है।

क्‍यों मारते हैं कुत्तों को गोली ?

दरअसल, सेना से एक आरटीआई के जरिए यह सवाल पूछा गया था कि आखिर जिन कुत्तों को इतनी मेहनत और लगन से आर्मी ट्रेंड करती है, उनको रिटायरमेंट के बाद क्‍यों मार दिया जाता है ?  सेना ने इसके जवाब में बताया कि असल में ऐसा सुरक्षा की दृष्टि से किया जाता है। इंडियन आर्मी की मानें तो कुत्तों को मारने के पीछे प्रमुख कारण सुरक्षा का ध्यान रखना है। इस बात की आशंका हमेशा बनी रहती है कि रिटायर होने के बाद कुत्ते कहीं गलत लोगों के हाथ न लग जाएं, क्योंकि कुत्ते को सेना के हर गुप्त स्थान के बारे में पूरी जानकारी होती है। कुत्ते के गलत हाथों में पड़ने पर सेना और देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

यह भी है एक वजह

इसके अलावा, कुत्तों को मारने की एक और वजह बताई जाती है। माना जाता है कि एक उम्र के बाद कुत्ते बीमार पड़ जाते हैं। इंडियन आर्मी का कहना है कि‍ वह कुत्ते की अच्छी तरह देखभाल करती है, उसका इलाज करवाती है। बावजूद इसके अगर कुत्ते के स्वास्थ्य में किसी तरह का कोई सुधार नहीं होता, तो उसे गोली मार दी जाती है, ताकि कुत्ते की मौत तड़प कर ना हो।

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