जिस मछली को आप स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं, उसे खाने से कैंसर भी हो सकता है

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नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात से ज्यादातर मछलियां देशभर में भेजी जाती हैं। दिल्ली समेत उत्तरी और पूर्वी राज्यों में खूब मछली खाई जाती है, लेकिन खाने वालों को ये नहीं पता कि यही मछली उनके लिए कैंसर जैसी बड़ी और खतरनाक बीमारियों का सबब बन सकती है।

दरअसल, मछलियों को आंध्र, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे दूर-दराज के राज्यों से बाकी जगह भेजने में ट्रकों या ट्रेनों का सहारा लिया जाता है। बाजार तक पहुंचने में मछलियों की खेप को 4 से 5 दिन का वक्त लगता है। नियम ये है कि मछलियों को आइसबॉक्स में रखकर भेजा जाए, लेकिन कई राज्यों में स्वास्थ्य विभाग की जांच से पता चला कि मछलियों को फॉर्मेलिन जैसे खतरनाक रसायन में डुबोकर भेजा जा रहा है। बता दें कि फॉर्मेलिन या फॉर्मेल्डिहाइड नाम का ये रसायन किसी मरी हुई चीज को प्रिजर्व करने के काम आता है।

डॉक्टरों के मुताबिक फॉर्मेलिन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। इसके अलावा नर्वस सिस्टम पर ये रसायन गंभीर असर करता है। फॉर्मेलिन में डूबी मछली खाने से पेट की तमाम दिक्कतों से शुरुआत होती है।

बता दें कि गोवा में इस साल जुलाई के बाद अब नवंबर में भी बाहरी राज्यों से मछली के आयात पर रोक लगा दी गई है। गोवा सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की जांच में पाया कि बाहरी राज्यों से आने वाली मछलियों को फॉर्मेलिन में डुबोया गया था।

मछली बेचने वालों ने फॉर्मेलिन में डूबी मछलियों की पहचान का तरीका बताया है। उनके मुताबिक ताजा मछली के गिल्स गहरे लाल रंग के होते हैं। बासी मछलियों के गिल्स का रंग मैरून हो जाता है। फॉर्मेलिन का इस्तेमाल करने से गिल्स का रंग तो गहरा लाल रहता है, लेकिन उसका मांस ढीला पड़ जाता है। अगर मछली का शरीर मुलायम नहीं पड़ा है, तो इसका मतलब ये है कि वो ज्यादा पुरानी नहीं है।

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