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रिपोर्ट : भारत में पति के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं एक तिहाई महिलाएं

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नई दिल्ली। हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में यह खुलासा हुआ है कि भारत में करीब एक-तिहाई शादीशुदा महिलाएं पतियों के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं। अध्‍ययन में एक चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इनमें से कई महिलाओं को पति के हाथों पिटाई से कोई फर्क नहीं पड़ता है। 21वीं सदी में जहां महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं, उनकी ये सोच चिंता का विषय है।

किसने किया अध्‍ययन ?

बड़ोदरा के एक गैर सरकारी संगठन ‘सहज’ ने ‘इक्वल मीजर्स 2030’ के साथ मिलकर यह अध्ययन किया है। बता दें कि ‘इक्वल मीजर्स 2030’ नौ सिविल सोसाइटी और निजी क्षेत्र के संगठनों की ब्रिटेन के साथ वैश्विक साझेदार भी है। शोधकर्ताओं ने अपने विश्लेषण में यह निष्‍कर्ष निकालने के बाद लैंगिक आधार पर हिंसा को देश की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बताया है।

क्‍या कहा गया है रिपोर्ट में ?

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) 4 के आंकड़ों का हवाला देते हुए ‘सहज’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 15 से 49 साल के आयु वर्ग की महिलाओं में से करीब 27 प्रतिशत ने 15 साल की उम्र से ही हिंसा बर्दाश्त करने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एक ओर तो भारत में आर्थिक विकास की दर अच्छी है, वहीं दूसरी ओर वह जाति, वर्ग और लिंग के आधार पर भेदभाव का सामना कर रहे लोगों के लिए समान विकास हासिल करने में बहुत पीछे है।’

चौंकाते हैं सर्वे के आंकड़े

वर्ष 2015-2016 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में घरेलू हिंसा को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। सर्वे में शामिल 49 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि पति अगर मारता हो तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है। सर्वे में शामिल 3672 महिलाओं में से करीब 75 प्रतिशत औरतों ने कहा कि शराब पीने की वजह से पति गुस्से में आकर उन पर हाथ उठाते हैं। 16  फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनके पति शराब नहीं पीते, फिर भी उन्हें पीटते हैं। उधर, महाराष्ट्र में हुए सर्वे के दौरान कई महिलाओं ने माना कि अगर वे अपने पति की बात नहीं मानेंगी तो वो उन्हें पीटेगा ही। अगर पति घर के काम न करने या बच्चों का ध्यान नहीं रखने पर उन्हें मारता है तो इसमें कुछ गलत नहीं है।

लैंगिक हिंसा चिंता की बात

‘सहज’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘भारत में विवाहित महिलाओं में से करीब एक तिहाई महिलाएं पति के हाथों हिंसा का शिकार हैं। कई महिलाएं पति के हाथों पिटाई को स्वीकार कर चुकी हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी अभिनव पहल के बावजूद पितृसत्तात्मक रवैया महिलाओं के सामाजिक दर्जे को लगातार कमजोर कर रहा है। इसका नतीजा लड़कियों के कमजोर स्वास्थ्य, उनकी मृत्यु के मामलों से लेकर जन्म के समय यौन अनुपात बिगड़ने के रूप में सामने आता है।’

स्टडी में खुलासा : ज्यादातर विकासशील देशों में घरेलू हिंसा को है मौन स्वीकृति

इन देशों में घरेलू हिंसा अपराध नहीं

आपको जानकर अचरज हो सकता है कि आज भी दुनिया में कुछ देश ऐसे हैं जहां घरेलू हिंसा को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है। आइए नजर डालते हैं इन देशों पर –

बर्किना फासो : जब बात होती है महिलाओं के अधिकारों और उनके खिलाफ घरेलू हिंसा को रोकने की तो पश्चिमी अफ्रीका का यह देश इसमें काफी पीछे है। महिलाओं के लिए यहां अभी केवल एक कानून है, जो स्‍कूल में पढ़ने वाली लड़कियों की रक्षा के लिए है। यह कानून लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं से निपटने के लिए है, लेकिन इस कानून से घरेलू हिंसा की घटनाओं पर रोक नहीं लगती।

हैती : कैरेबियाई द्वीप के इस छोटे से देश में महिलाओं की स्थिति बहुत ही दयनीय है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के एक अधिकारी के अनुसार, हैती की 70 फीसदी महिलाएं लैंगिक भेदभाव के कारण होने वाली हिंसा की शिकार हैं। इस गरीब देश में महिलाओं की तरफ से लड़ने के लिए अभी तक कोई कानून भी नहीं है।

लेबनान : कहने को तो लेबनान में वर्ष 2014 में ही घरेलू हिंसा को लेकर कानून पास हो गया था, लेकिन इस कानून में ऐसे कोई प्रावधान नहीं हैं जो महिलाओं को उनके घर में होने वाली हिंसा से बचा सकें। यह कानून मुख्‍य रूप से रेप और जबरन वेश्‍यावृत्ति जैसी घटनाओं को रोकने के लिए है। यहां स्‍थानीय पुलिस के पास हर साल 2600 से अधिक फोन कॉल घरेलू हिंसा के मामलों के ही आते हैं।

कांगो : द डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो पिछले कई सालों से गृहयुद्ध से जूझ रहा है। इसका सीधा असर यहां की कानून व्‍यवस्‍था पर पड़ा है। घरेलू हिंसा के साथ-साथ मेरिटल रेप जैसे मामलों के लिए यहां अभी तक कोई ठोस कानून नहीं बन सका है।

ईरान : मिडिल ईस्‍ट के इस देश का महिलाओं को लेकर रिकॉर्ड काफी खराब रहा है। तेल से सम्‍पन्‍न राष्‍ट्र ईरान में भी घरेलू हिंसा के मामलों से निपटने के लिए अभी कोई कानून नहीं है। जो महिलाएं पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की हिम्‍मत जुटाती भी हैं, उनसे सुबूत मांगे जाते हैं। ऐसे में यहां की महिलाएं पिटते हुए भी अपने पति के साथ रहने को मजबूर रहती हैं।

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