जलवायु परिवर्तन ने किया था सिंधु घाटी सभ्यता का विनाश, हुआ था कुछ ऐसा

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नई दिल्ली। सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी नदी घाटी सभ्यताओं में से एक है। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि सिंधु घाटी में करीब 2500 ईसा पूर्व हुए तापमान और मौसमी चक्र में बदलाव की शुरुआत के चलते हड़प्पावासियों को सिंधु के बाढ़ के मैदानों से काफी दूर बसने पर मजबूर होना पड़ा था।

रिसर्चर्स का मानना है कि सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार भारत के बड़े हिस्से में था। यह सिंधु नदी के किनारे से लेकर लुप्त हो गई सरस्वती नदी के किनारे तक बसी थी। अमेरिका के वुड्स होल ओश्नोग्राफिक इंस्टीट्यूशन (डब्ल्यूएचओआई) के शोधकर्ताओं ने बताया कि हड़प्पा के लोगों ने परिष्कृत शहरों का निर्माण किया, मल-प्रवाह पद्धतियों का आविष्कार किया जो प्राचीन रोम से पहले के हैं और मेसोपोटामिया में बस्तियों के साथ लंबी दूरी के व्यापार में शामिल रहे।

इसके बावजूद 1800 ईसा पूर्व तक इस उन्नत सभ्यता ने अपने-अपने शहर छोड़ दिए थे और हिमालय के निचले हिस्से में स्थित छोटे गांवों की तरफ जाने लगे थे। डब्ल्यूएचओआई के एक भूवैज्ञानिक लिवियु गियोसन ने कहा 2500 ईसा पूर्व में सिंधु घाटी के ऊपर तापमान और मौसमी चक्र में बदलाव की शुरुआत से मॉनसून की बारिश धीरे-धीरे कम होने लगी जिससे हड़प्पा शहरों के पास खेती मुश्किल या असंभव होने लगा।

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