ODF के मामले में यूपी आखिर क्यों है पिछड़ा, आंकड़ों से सच्चाई आई सामने

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लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच को रोकने के लिए मोदी सरकार ने 2018 का लक्ष्य तय किया था, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसा बड़ा राज्य इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। आंकड़े और गांवों की हकीकत इसकी वजह का खुलासा कर रहे हैं।

यूपी में 20 करोड़ 40 लाख लोग रहते हैं। ये जनसंख्या ब्राजील की कुल जनसंख्या के बराबर है और राज्य का करीब 3 फीसदी हिस्सा स्वच्छता के मानदंडों पर खरा नहीं उतरता। बता दें कि अक्टूबर 2018 तक बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, असम और कर्नाटक के साथ यूपी की सरकार भी अपने राज्य को खुले में शौच से मुक्त यानी (ODF) घोषित नहीं कर सकी।

यूपी सरकार के आंकड़ों को देखें, तो वो खुले में शौच मुक्त की दिशा में प्रगति की बात कहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में सिर्फ 35.2 फीसदी घरों में ही शौचालय थे। जबकि, सरकारी दावा है कि अक्टूबर 2018 में 99.9 फीसदी घरों में शौचालय बन गए हैं। सरकार के ये दावे उसकी इस बात का पोल खोलते हैं कि 31 दिसंबर 2018 तक राज्य को खुले में शौच मुक्त आखिर घोषित क्यों नहीं किया जा सका।

मई 2017 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य को अक्टूबर 2018 तक खुले में शौच मुक्त कर दिया जाएगा। यानी 75 जिलों में 1 करोड़ 55 लाख शौचालय बन जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक 1 करोड़ 41 लाख शौचालय ही बन सके हैं। सरकार कहती है कि हर महीने 20 लाख शौचालय बनाए गए, यानी हर मिनट 47 शौचालय बने।

रायबरेली जिले में indiaspend ने जब सर्वे किया, तो पाया कि 2014 से 2018 तक जिले में सिर्फ 40 हजार शौचालय ही बनाए गए। 2018-19 में 2 लाख शौचालयों की जरूरत थी, लेकिन बने सिर्फ डेढ़ लाख। जबकि, स्वच्छ भारत मिशन की वेबसाइट बताती है कि रायबरेली जिले के 83.61 फीसदी गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

जो शौचालय बनाए गए हैं, उनमें से तमाम उपयोग करने लायक नहीं हैं। indiaspend ने पाया कि इनमें से तमाम में पानी की व्यवस्था नहीं है। शौचालयों में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। दरवाजे भी कई शौचालयों में नहीं लगाए गए हैं। मल के निस्तारण के लिए जो सोकपिट बनाया गया है, वो छोटा है और इसकी वजह से एक गांव में लोगों ने पास में बने हैंडपंप का पानी तक इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। उन्हें ये आशंका है कि छोटे सोकपिट की वजह से हैंडपंप का पानी दूषित हो गया है।

कुल मिलाकर यूपी के हर जिले को खुले में शौच मुक्त करने का दावा फिलहाल सही नहीं है। आने वाले दिनों में काम की गुणवत्ता सुधारकर और तेजी से काम करके ही इस लक्ष्य को राज्य हासिल कर सकता है।

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