आप जानते हैं, वाइन से दौड़ती है प्रिंस चार्ल्स की कार और कुकिंग ऑयल से शाही ट्रेन !

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लंदन। अगर आपसे कहा जाए कि ऐसी भी कोई कार है जो पेट्रोल की जगह वाइन से चलती है तो आप इस पर यकीन नहीं करेंगे। लेकिन यह कोई कपोल कल्‍पना नहीं, बल्कि हकीकत है। जी हां, ब्रिटेन के प्रिंस चा‌र्ल्स की 50 साल पुरानी कार पेट्रोल, डीजल या गैस की बजाय इंग्लैंड की मशहूर व्हाइट वाइन से चलती है। प्रिंस चार्ल्स ने 14 नवम्‍बर को अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बन रही एक डॉक्यूमेंट्री में अपने इन प्रयोगों से पर्दा उठाया है।

पर्यावरण संरक्षण की चिंता

बता दें कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के बेटे चार्ल्स लग्जरी कारों के जितने बड़े शौकीन हैं, उतने ही पर्यावरण प्रेमी भी हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर काफी मुखर रहने वाले चार्ल्स ने न सिर्फ अपनी कार, बल्कि राजघराने की शाही ट्रेन को भी ईको-फ्रेंडली बनाया है। पर्यावरण को ध्‍यान में रखकर उन्होंने अपनी एस्टन मार्टिन कार में खास तब्‍दीली कराई है, ताकि वह वाइन से चल सके और उससे कम से कम प्रदूषण हो। इतना ही नहीं, ब्रिटेन की शाही ट्रेन को चलाने में भी डीजल नहीं, बल्कि कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल होता है।

तोहफे में मिली थी एस्टन मार्टिन

बताते हैं कि महारानी ने प्रिंस चार्ल्स को वर्ष 1969 में उनके 21वें जन्मदिन के मौके पर लग्जरी कारें बनाने वाली कंपनी एस्टन मार्टिन की डीबी-5 वोलांत मॉडल कार तोहफे में दी थी। यह कार प्रिंस आज भी चलाते हैं। प्रिंस चार्ल्‍स का कहना है, ‘दुनिया में जब बायोफ्यूल टेक्नोलॉजी आई तो इसने मेरा ध्यान खींचा। वर्ष 2008 में मैंने एस्टन मार्टिन के इंजीनियरों से इस कार को पूरी तरह से बायोफ्यूल से चलने लायक बनाने को कहा।’

करनी पड़ी काफी रिसर्च

प्रिंस चार्ल्स बताते हैं, ‘शुरू में इंजीनियरों ने मुझे काफी समझाने की कोशिश की कि कार को बायोफ्यूल से चलाने लायक बनाने में वह खराब भी हो सकती है, लेकिन मैंने उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि अगर इंजीनियर ऐसा नहीं कर सके तो मैं यह कार नहीं चलाऊंगा।’ इसके बाद इंजीनियरों ने काफी रिसर्च की और पता चला कि व्हाइट वाइन को कार में बतौर बायोफ्यूल इस्तेमाल कर इसे चलाया जा सकता है। प्रिंस चार्ल्स के मुताबिक अब यह कार पहले से कम प्रदूषण फैलाती है और इसकी परफॉर्मेंस भी पहले से बेहतर हो गई है।

कैसे दौड़ती है कार ?

आप सोच रहे होंगे कि पेट्रोल टैंक में वाइन डालते ही कार चल पड़ती है, लेकिन ऐसा नहीं है। एस्टन मार्टिन के इंजीनियरों का कहना है कि प्रिंस चार्ल्स की यह कार एक खास मिश्रण वाले E-85  ईंधन से चलती है। इस ईंधन में 85% तक व्हाइट वाइन और 15% पेट्रोल होता है। इस खास ईंधन को ‘बायोएथनॉल’ भी कहा जाता है। इंजीनियरों ने चार्ल्स की पसंदीदा कार के ईंधन और कम्बश्चन सिस्टम को अपग्रेड कर उसे बायोएथनॉल से चलने लायक बनाया है।

ब्रिटेन राजघराने की शाही ट्रेन, जो कुकिंग ऑयल से चलती है

कैसे चलती है शाही घराने की ट्रेन ?

बता दें कि प्रिंस चार्ल्स अपनी कार से पहले राजघराने की शाही ट्रेन ‘रॉयल सोवरिन’ को भी ईको-फ्रेंडली बना चुके हैं। इस ट्रेन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए चार्ल्स ने काफी मेहनत की और ट्रेन ऑपरेटर और लोकोमोटिव इंजीनियरों के साथ गंभीरता से काम किया। 100% बायोफ्यूल से चलने वाली इस शाही ट्रेन में खाना बनाने के बाद बच गए कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल होता है। दरअसल, विदेशों में एक बार खाना बनाने के बाद बचे हुए तेल को इस्तेमाल नहीं किया जाता है। बायोफ्यूल के इस्तेमाल से इस ट्रेन से होने वाला कार्बन उत्सर्जन 20% तक कम हो गया है।

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