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स्टडी : हड्डियों-मांसपेशियों की तरह दिमाग को भी प्रभावित करती है अंतरिक्ष यात्रा

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बर्लिन। रूसी अंतरिक्ष-यात्रियों पर किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि अंतरिक्ष में लंबी-लंबी अवधि बिताने से न सिर्फ मांसपेशियों और हड्डियों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि दिमाग पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। बताया जा रहा है कि अपने तरह का यह पहला अध्ययन है जिसमें अंतरिक्ष मिशन के बाद मस्तिष्‍क की संरचनाओं पर स्‍टडी की गई है।

किसने किया अध्‍ययन ?

जर्मनी के म्यूनिख में स्थित लुडविग मैक्सीमिलियन यूनिवर्सिटी (LMU) के शोधकर्ताओं ने इस बारे में अध्‍ययन किया है। ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित इस अध्ययन में दिखाया गया है कि दिमाग के तीन मुख्य टिशू ग्रुप्स में आने वाले बदलाव का, मिशन खत्म होने के कम से कम 6 महीने तक पता लगाया जा सकता है। यह अध्ययन 10 अंतरिक्ष यात्रियों पर किया गया। इन सभी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में औसतन 189 दिन बिताए थे।

कैसे किया अध्‍ययन ?

अपने अध्ययन के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने ‘मैग्नेटिक रेजोनेन्स टोमोग्राफी’ (MRT) तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क की तस्वीरें ली गईं। ये तस्वीरें अंतरिक्ष यात्रियों के अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले और फिर लंबी अंतरिक्ष यात्रा से लौटने के बाद ली गईं। इसके अलावा, 7 अंतरिक्ष यात्रियों के मस्तिष्क की जांच, उनके अंतरिक्ष यात्रा से लौटने के 7 माह बाद भी की गई।

क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का ?

लुडविग मैक्सीमिलियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर जू यूलेनबर्ग ने बताया, ‘अध्ययन में सामने आया है कि अंतरिक्ष मिशन के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के मस्तिष्क की संरचनाओं में बदलाव संभव है। हालांकि यूलेनबर्ग ने कहा कि इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है कि मस्तिष्क के अलग-अलग टिशू गुरुत्वाकर्षण को लेकर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि सामान्य गुरुत्व में लौटने पर तंत्रिका संरचना में कोई बदलाव आते हैं या नहीं, और यदि आते भी हैं तो ये बदलाव किस हद तक होते हैं।

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