विशेषज्ञों का दावा : खुद को दीजिए महत्व तो नजदीक नहीं फटकेगा डिप्रेशन

60 0

लंदन। अवसाद या डिप्रेशन का मतलब मनोविज्ञान के क्षेत्र में मनोभावों संबंधी दुख से होता है। इसे रोग या सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है। मेडिकल साइंस में कोई भी व्यक्ति डिप्रेशन की अवस्था में स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है। अब एक अध्‍ययन में विशेषज्ञों ने दावा किया है कि अवसाद से बचने के लिए खुद को महत्व देना बेहद जरूरी है, भले ही आपकी उपलब्धियां नकारात्मक ही क्‍यों ना रही हों।

किसने किया अध्‍ययन ?

यह अध्ययन न्यू साउथ वेल्स स्थित ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी में किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि अपनी असफलताओं को नजरअंदाज कर कभी-कभी खुद को दुलार करना चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा किसी भी उम्र में पूर्णता या परफेक्शनिज्म का नकारात्मक असर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। पूर्णता की चाह रखने वाले लोग अक्सर बहुत अच्छा करने की कोशिश में अन्य की तुलना में काफी आगे निकल जाते हैं। इस कोशिश में कई बार उन्हें निराशा भी हाथ लगती है, जो इस निराशा से उबर नहीं पाते वे अवसाद का शिकार हो जाते हैं।

क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का ?

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान पूर्णता और अवसाद के बीच किशोरों और वयस्कों में एक जैसा संबंध पाया है। प्रमुख शोधकर्ता और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मेडलीन फरारी ने कहा कि पूर्णता की चाह रखने वालों से लोग उम्मीद भी बहुत लगा लेते हैं। कई बार वे दूसरों की उम्मीद पर जीने लगते हैं। वे हर समय सहमे रहते हैं कि कहीं उनसे कोई गलती न हो जाए। जब कभी ऐसा होता है तो वे खुद को ही कोसने लगते हैं। मेडलीन का कहना है कि ऐसी स्थिति में आत्म करुणा या खुद के साथ दुलार करने से अवसाद से बचा जा सकता है। खुद के लिए ऊंचे मानदंड बनाना हमेशा सही नहीं होता है। यह शोध ‘प्लस वन ऑनलाइन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

और क्‍या कहा गया है शोध में ?

शोध में कहा गया है कि कई बार पूर्णता दुर्भावनापूर्ण भी होती है। इसके तहत व्यक्ति खुद की आलोचना करता है, गलतियां करने से डरता है और दूसरों से नकारात्मक मूल्यांकन को सहन नहीं कर पाता है। पूर्व में हुए अध्ययन में भी पूर्णतावाद से नकारात्मक अवसाद का खतरा बढ़ने का संबंध देखा गया है। मेडलीन की टीम ने एक हजार से अधिक किशोर और युवाओं में सवाल-जवाब के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया कि आत्म करुणा दिखाने या उसकी कमी का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर हुआ। शोधकर्ताओं ने दुर्भावनापूर्ण पूर्णतावाद में गहरा संबंध बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद के प्रति करुणा दिखाते हैं,  उनमें अवसाद की आशंका कम होती है।

Related Post

टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री खुद से 20 साल छोटी इस एक्ट्रेस संग कर रहे डेट !

Posted by - September 3, 2018 0
मुंबई। बॉलीवुड और क्रिकेट जगत का नाता काफी पुराना है। क्रिकेट स्टार्स और बॉलीवुड एक्ट्रेसेस की लव स्टोरी का कनेक्शन…

हो जाएं अलर्ट, बर्गर और प्रोसेस्ड मीट बढ़ाता है महिलाओं में कैंसर का खतरा

Posted by - November 5, 2018 0
वाशिंगटन। बर्गर, पिज्जा, जंक फूड और प्रोसेस्‍ड मीट का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने वाली महिलाओं के लिए एक बुरी खबर है।…

बुराड़ी कांड : ऑटोप्‍सी रिपोर्ट में नया खुलासा – आत्‍महत्‍या नहीं करना चाहता था परिवार

Posted by - September 15, 2018 0
नई दिल्‍ली। उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में 11 सदस्यों के उनके घर में मृत मिलने के मामले में सीएफएसएल की…

मिसाल : गांववालों की प्यास बुझाने को 70 साल के सीताराम ने अकेले खोद डाला कुआं

Posted by - May 26, 2018 0
छतरपुर। बिहार में दशरथ मांझी ने अपने हौसले और जज्‍बे से अकेले पहाड़ को काटकर रास्‍ता बना दिया था। अब…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *