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ऐसा करें ज्यादातर वक्त, तो पार्किंसन डिजीज के शिकार लोगों को मिलेगी राहत

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आयोवा। अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी की रिसर्च में बताया गया है कि अगर कोई खतरनाक दिमागी बीमारी पार्किंसन का शिकार हुआ है, तो उसे ज्यादातर वक्त एक काम करने से काफी राहत मिल सकती है।

आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर एलिजाबेथ स्टेगमोलर ने एक रिसर्च की है। इस रिसर्च से पता चला कि पार्किंसन के मरीज अगर लगातार गाना गाएं या उसकी धुन गुनगुनाएं, तो उन्हें तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही बीमारी का असर भी जल्दी नहीं होता है। एलिजाबेथ और उनकी टीम ने 17 पार्किंसन मरीजों के दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और दिमाग में कॉर्टिसॉल के स्तर को मापकर ये नतीजा निकाला है। इन मरीजों ने बताया कि जब वे कोई गीत गाते या उसकी धुन गुनगुनाते हैं, तो उन्हें अवसाद, तनाव और गुस्से से मुक्ति मिलती है।

एलिजाबेथ ने बताया कि इन लोगों में शारीरिक और मानसिक स्तरों की जांच गीत गाने से एक घंटे पहले और एक घंटे बाद लिया गया। इससे पता चला कि पार्किंसन के मरीज बिल्कुल बच्चों जैसा व्यवहार करते हैं। जब वे कोई गीत गाते हैं या धुन गुनगुनाते हैं, तो उनको बहुत खुशी मिलती है। एलिजाबेथ ने पाया कि आमतौर पर पार्किंसन के मरीज अपने शरीर के अंगों को हिला नहीं सकते, लेकिन गीत गाते या धुन गुनगुनाते वक्त उनकी उंगलियां और हाथ लय और ताल के साथ हरकत करते दिखाई दिए। बता दें कि पहली बार ऐसी रिसर्च हुई है, जिसमें पार्किंसन के मरीजों में दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और दिमाग में कॉर्टिसॉल स्तर की जांच की गई। स्टेगमोलर ने बताया कि स्टडी के बाद सभी मरीजों में तनाव और दुख की भावना कम पाई गई।

इससे पहले रिसर्च करने वाली इसी टीम ने पाया था कि गीत गाने से सांस के मरीजों को फायदा होता है और पार्किंसन के मरीज अगर गाना गाते हैं, तो वे भोजन भी ठीक से निगल पाते हैं। रिसर्च टीम का कहना है कि इससे दिमाग से नियंत्रित होने वाली शारीरिक क्रिया काफी बेहतर हो जाती है और पार्किंसन के मरीजों के जीवन में भी सुधार आता है।

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