शोध में आया सामने, दर्द में पैरासिटामॉल या आईबूप्रोफेन से ज्यादा फायदेमंद हल्दी

89 0

रोम। भारत में चोट लगने या मोच आने पर देसी इलाज के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी की ताकत को अब विदेशी विशेषज्ञों ने भी स्वीकार कर लिया है। एक शोध में खुलासा हुआ है कि दर्द में पैरासिटामॉल और आईबूप्रोफेन से ज्यादा लाभदायक हल्दी होती है। इन दवाओं के दुष्प्रभाव हैं, लेकिन हल्दी का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है।

किसने किया शोध ?

मिलान स्थित एक प्रमुख दवा निर्माता कंपनी ने इस पर शोध किया तो पता चला कि खेल के दौरान लगने वाली चोट या मोच के दर्द में हल्दी दर्द निवारक दवाओं जितनी ही कारगर है। खास बात यह है कि इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। यह शोध यूरोपियन रिव्यू फॉर मेडिकल एंड फारमाकोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है।

कैसे किया शोध ?

शोध के दौरान रग्बी के 50 चोटिल खिलाड़ियों को हल्दी दी गई, जिससे उन्हें पैरासिटामॉल या आईबूप्रोफेन दवाओं जितनी ही राहत मिली। इन रग्बी खिलाड़ियों को हड्डियों और मांसपेशियों में तकलीफ थी। इन्हें एक ग्राम करक्यूमिन तत्व वाली एल्गोकर टैबलेट 10 दिनों तक दिन में दो बार दी गई। प्रत्येक 20 दिनों में इनकी स्थिति का परीक्षण किया गया। डॉ. डी पेरो ने कहा कि अध्ययन में देखा गया कि एल्गोकर टैब्लेट लेने वाले ज्यादातर मरीजों को राहत मिली। वहीं शोध के दौरान देखा गया कि पारंपरिक दर्द निवारक लेने वाले 16 फीसदी मरीजों में गैस्ट्रिक समस्याएं देखने को मिलीं।

क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का ?

प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर फ्रांसेस्को डी पेरो ने कहा कि इस शोध से पता चलता है कि हल्दी में पाए जाने वाले तत्व करक्यूमिन से तैयार उत्पाद हड्डी और मांसपेशियों से संबंधित दर्द में सुरक्षित दर्द निवारक हो सकते हैं। पूर्व में हुए शोध में करक्यूमिन का सकारात्मक प्रभाव गठिया के मरीजों में देखा जा चुका है। इसके अलावा यह कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों में भी अधिक कारगर है।

याददाश्‍त बढ़ाने में भी सहायक

यूनीवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हुए एक अन्‍य शोध में पता चला है कि हल्दी के सेवन से याददाश्त 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही अवसाद में भी यह राहत पहुंचाती है। हल्दी में मौजूद तत्व करक्यूमिन मस्तिष्क के उन हिस्सों में प्रोटीन जमा नहीं होने देता है, जो याददाश्त और भावनाओं को देखते हैं। हल्दी का पीला रंग करक्यूमिन तत्व के कारण होता है। समझा जाता है कि यह तत्व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के साथ ही याद्दाश्त भी दुरुस्त करता है। इसमें इनफ्लेमेशन यानी जलन, सूजन या उत्तेजना को कम करने की क्षमता होती है। इनफ्लेमेशन का संबंध पूर्व के शोधों में डिमेंशिया और गंभीर अवसाद से साबित हो चुका है।

Related Post

स्टडी : जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री घोंघे के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

Posted by - October 17, 2018 0
लंदन। जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के समंदरों का पानी तेजी से अम्‍लीय हो रहा है, जिसके कारण समुद्री…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *