बेटे को जन्म देने वाली माताओं को इस गंभीर दिक्कत का होना पड़ता है शिकार !

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लंदन। हर महिला मां बनना चाहती है और ज्यादातर घरों में बेटे का जन्म बेटियों के मुकाबले खुशियों को दोगुना भी करता है, लेकिन केंट यूनिवर्सिटी की ताजी रिसर्च बताती है कि बेटों को जन्म देने वाली माताओं को एक गंभीर दिक्कत का शिकार होना पड़ता है।

केंट यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि बेटों को जन्म देने वाली माताओं में से औसतन 97 फीसदी को डिप्रेशन हो जाता है, जबकि बेटियों को जन्म देने वाली माताओं को कम डिप्रेशन होता है।

केंट यूनिवर्सिटी की रिसर्चर सारा जोन्स और सारा मेयर्स ने बताया कि बेटों के जन्म के बाद माताओं में गुस्सा, अवसाद, हीनभावना के मामले ज्यादा देखे जाते हैं। इसे डॉक्टरी भाषा में पोस्टनेटल डिप्रेशन या पीएनडी कहते हैं। सारा जोन्स का ये भी कहना है कि जो महिलाएं प्रसव के वक्त गंभीर खतरे से जूझती हैं, उनमें खासकर डिप्रेशन देखा जाता है। ऐसे में परिवार और उनके पति को हमेशा उनके साथ खड़े होने की जरूरत पड़ती है। हालांकि, बेटों के जन्म से पीएनडी का रिश्ता किस तरह है, इसे लेकर जोन्स और मेयर्स रिसर्च को आगे बढ़ा रही हैं।

दोनों का कहना है कि इसके अलावा बच्चे के जन्म से पहले ही होने वाले माता-पिता को इस बारे में बताने की जरूरत है। डॉक्टरों को बताना चाहिए कि बच्चे के जन्म के बाद शारीरिक और मानसिक स्तर पर क्या-क्या परिवर्तन हो सकते हैं। इसके अलावा नई जिम्मेदारी को ठीक से उठाने के तौर-तरीके भी महिलाओं और उनके पति को बताने की जरूरत पर रिसर्च में जोर दिया गया है। रिसर्च में कहा गया है कि बच्चे के जन्म के बाद उसे ही परिवार अहम मानने लगता है। ऐसे में बच्चे की माता को लगता है कि उसे अब परिवार में पहले जैसा स्तर हासिल नहीं है। इसके अलावा बच्चे की देखरेख में शारीरिक श्रम भी बहुत होता है। जोन्स और मेयर्स के मुताबिक महिलाओं में डिप्रेशन की वजह ये भी हो सकती है।

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