स्‍टडी में दावा : सबसे आम दवाइयां भी आपको धकेल रही हैं डिप्रेशन में !

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वाशिंगटन। वैसे तो डॉक्‍टर अवसाद या डिप्रेशन के ढेर सारे कारण बताते हैं लेकिन अमेरिका में हुए एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि सबसे ज़्यादा इस्तेमाल में आने वाली दवाइयों के कारण भी डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ सकता है।

क्‍या कहा गया है अध्‍ययन में ?

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा किए गए ताजा अध्ययन के मुताबिक, दिल की बीमारियों के लिए दी जाने वाली दवाइयां, गर्भनिरोधक दवाइयां और कुछ दर्दनिवारक दवाइयों के साइड-इफेक्ट से डिप्रेशन हो सकता है। अध्‍ययन की मुख्य लेखक डिमा काटो ने कहा, ‘कई लोगों को हैरानी होगी कि उनकी दवाइयों का भले ही मूड, घबराहट या डिप्रेशन से कोई लेना देना ना हो, लेकिन फिर भी उन्हें दवाइयों की वजह से अवसाद के लक्षण महसूस हो सकते हैं और अवसाद भी हो सकता है।’ हालांकि ये साफ़ नहीं है कि क्या दवाइयां ख़राब मूड की वजह हो सकती हैं।

कैसे किया अध्‍ययन ?

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने अध्‍ययन के दौरान अमेरिका के 18 वर्ष या उससे ज़्यादा उम्र के 26,000 लोगों से बात की। इन लोगों ने 2005 से 2014 के बीच कम से कम एक तरह की डॉक्टर की लिखी दवाई ली थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन में भाग लेने वाले लोगों में से एक तिहाई में अवसाद के लक्षण पाए गए। यह भी पाया गया कि डॉक्टर की लिखी इन दवाइयों में से 37 फ़ीसदी में अवसाद को संभावित साइड इफेक्ट बताया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी भी कारण से बीमार होने पर आपको उदासी महसूस हो सकती है या यह भी हो सकता है कि अध्ययन में भाग लेने वाले लोग पहले कभी डिप्रेशन का शिकार रहे हों।

ऐसे लोगों में अवसाद की दर ज़्यादा

  • एक तरह की दवाई लेने वाले 7 फ़ीसदी लोग
  • दो तरह की दवाई लेने वाले 9 फ़ीसदी लोग
  • तीन या उससे ज़्यादा दवाइयां लेने वाले 15 फ़ीसदी लोग
  • अमेरिका में करीब 5 फ़ीसदी लोग अवसाद से पीड़ित हैं

क्‍या कहना है विशेषज्ञों का ?

विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अध्ययन में दवाइयों और अवसाद के ख़तरे की बात तो कही गई है, लेकिन इसके कारण और असर का ज़िक्र नहीं है। रॉयल कॉलेज ऑफ साइकैट्रिस्ट के प्रोफेसर डेविड बाल्डविन कहते हैं, ‘जब किसी को कोई शारीरिक बीमारी होती है तो दिमागी तनाव होना आम है। ऐसे में ये कोई हैरानी की बात नहीं है कि दिल और गुर्दे की बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाइयों को अवसाद के ख़तरे से जोड़कर देखा जाए।’ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिका में हुए इस अध्ययन के सारे पहलू दुनिया के बाकी हिस्सों पर लागू नहीं होते।

दवाई पर निर्भर करता है ख़तरा

  • गर्भनिरोधक दवाइयों से अवसाद एक आम साइड-इफेक्ट हो सकता है, लेकिन दूसरी दवाइयों के साथ यह इतना आम नहीं है।
  • 10 में से 1 व्यक्ति को आमतौर पर साइड-इफेक्ट होता है, जबकि 10 हज़ार में से एक को कभी-कभार साइड-इफेक्ट हो जाता है।
  • इसकी जानकारी दवाई के पैकेट के अंदर दिए जाने वाले काग़ज़ पर लिखी होती है और ऑनलाइन सर्च करके भी इस बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है।

रॉयल फार्मास्युटिकल सोसायटी के प्रोफेसर डेविड टेलर कहते हैं, ‘ये भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि क्या दवाई की वजह से अवसाद होने का कोई व्यावहारिक स्पष्टीकरण दिया गया है।’ उनका कहना है कि गर्भनिरोधक गोली का हार्मोन लेवल और मूड से सीधा संबंध है, लेकिन दिल की बीमारी की दवाइयों के मामले में ये पता लगाना मुश्किल है कि अवसाद का कारण दवाई है या कोई दूसरी स्थिति। प्रोफेसर टेलर कहते हैं, ‘अभी हम इस बारे में पता लगाने में इतने अच्छे नहीं हैं। हम नहीं बता सकते कि अवसाद का कारण दवाई है या कोर्स के समय की कोई और वजह जिसका दवाई से कोई लेना-देना नहीं है।’ प्रोफेसर टेलर सलाह देते हैं कि अगर आप फ़िलहाल इनमें से कोई भी दवाई ले रहे हैं और आप में अवसाद का कोई लक्षण नहीं है तो घबराने की ज़रूरत नहीं।

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