धरती के लिए अच्छी खबर, पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली ओजोन परत हुई दुरुस्त

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वॉशिंगटन। धरती के लिए अच्छी खबर है। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पराबैंगनी किरणों से धरती के जीवधारियों की सुरक्षा करने वाली ओजोन की परत में हुआ छेद काफी घट गया है। एरोसॉल वाले स्प्रे और फ्रिज और एसी में इस्तेमाल होने वाले क्लोरो-फ्लोरो कार्बन वाली गैसों का इस्तेमाल कम होने से ऐसा हुआ है।

ओजोन धरती के वायुमंडल की वो परत है, जो सूरज की पराबैंगनी किरणों से धरती के जीवों की रक्षा करती है। पराबैंगनी किरणों से त्वचा के कैंसर के अलावा फसलों को नुकसान पहुंचता है और अन्य समस्याएं भी दिखाई देती हैं।

बता दें कि 1970 के दशक के बाद से धरती के चारों ओर फैली ओजोन की परत महीन होती गई थी। अंटार्कटिका के पास इसमें छेद भी हो गया था। जिससे सूरज से आने वाली पराबैंगनी किरणें धरती तक पहुंच रही थीं। ओजोन ही पराबैंगनी किरणों को रोकता है। पराबैंगनी किरणों से त्वचा कैंसर हो जाता है और इंसान और अन्य जीव अंधे तक हो जाते हैं। ओजोन की परत महीन होने पर वैज्ञानिकों ने दुनिया को खतरे से आगाह किया था। जिसके बाद ओजोन की परत को महीन करने में जिन रसायनों और गैसों का हाथ था, उनका इस्तेमाल पूरी दुनिया में बंद कर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट इक्वेडोर के क्विटो में एक सम्मेलन में जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने पाया है कि साल 2030 तक उत्तरी गोलार्ध के ऊपर ओजोन की परत पूरी तरह ठीक हो जाएगी। साथ ही अंटार्कटिका के पास ओजोन की परत में बना छेद भी 2060 तक खत्म हो जाएगा। ओजोन की परत में सुधार की प्रक्रिया दक्षिणी गोलार्ध में कुछ धीमी जरूर है, लेकिन यहां की ओजोन परत सदी के मध्य तक फिर से अपनी मोटाई को हासिल कर लेगी।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर की ओर से रिपोर्ट को सह प्रायोजित किया गया है। सेंटर के मुताबिक ये अच्छी खबर है। अगर ओजोन को कमजोर करने वाले तत्व बढ़ते, तो इससे भयानक असर पड़ता। पूरी दुनिया ने कदम मिलाकर इस खतरे को दूर कर दिया है।

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