दिवाली पर पटाखों से सावधान रहें प्रेग्नेंट महिलाएं, जहरीले धुएं से गर्भपात का खतरा

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नई दिल्ली। दिवाली में पटाखों की धूम नहीं हो तो शायद कुछ कमी सी लगती है, लेकिन अगर पटाखे हमारी सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो हमें इनके इस्तेमाल के बारे में अच्‍छे से सोचने की जरूरत है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों सिर्फ दो घंटे के लिए ही पटाखों का इस्‍तेमाल करने की इजाजत दी है। डॉक्‍टरों का कहना है कि पटाखों के धुएं का गर्भवती महिलाओं पर काफी अधिक दुष्‍प्रभाव होता है, ऐसे में उन्‍हें इनसे दूर रहने की सलाह दी जाती है।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर ?

नई दिल्‍ली के जेपी हॉस्पिटल के पल्मोनरी व क्रिटिकल केयर मेडिसिन के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि दिवाली वैसे तो अपने साथ बहुत सारी खुशियां लेकर आती है, लेकिन दमा,  सीओपीडी या एलर्जिक रहाइनिटिस से पीड़ित मरीजों की समस्या इन दिनों बढ़ जाती है। पटाखों में मौजूद छोटे कण सेहत पर बुरा असर डालते हैं, जिसका असर फेफड़ों पर पड़ता है। उनका कहना है कि बच्‍चों और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं हमारी सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है –

फेफड़े हो सकते हैं प्रभावित

डॉक्‍टरों का कहना है कि पटाखों के धुएं से फेफड़ों में सूजन आ सकती है, जिससे फेफड़े अपना काम ठीक से नहीं कर पाते। कभी-कभी तो नौबत यहां तक भी पहुंच सकती है कि ऑर्गेन फेलियर और मौत तक हो सकती है। ऐसे में पटाखों के धुएं से बचने की कोशिश करनी चाहिए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को खुद को धुएं से बचाकर रखना चाहिए, क्‍योंकि इनके फेफड़े बहुत नाजुक होते हैं। दिल के मरीजों को भी पटाखों से बचकर रहना चाहिए।

बच्‍चों व प्रेग्‍नेंट महिलाओं को खतरा अधिक

डॉक्‍टर खास तौर पर बच्‍चों और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पटाखों से निकला गाढ़ा धुआं खासतौर पर छोटे बच्चों में सांस की समस्याएं पैदा करता है। पटाखों में हानिकारक रसायन होते हैं, जिनके कारण बच्चों के शरीर में टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ जाता है और उनके विकास में रुकावट पैदा करता है। पटाखों के धुएं से गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को भी ऐसे समय में घर के अंदर ही रहना चाहिए।

हो सकता है अस्‍थमा का अटैक

पटाखों के धुएं की वजह से अस्थमा या दमा का अटैक भी आ सकता है। पटाखों के जलने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं जो दमा के मरीजों के लिए खतरनाक हैं। दरअसल, दिवाली के दौरान पटाखों के कारण हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है। धूल के कणों पर कॉपर, जिंक, सोडियम, लेड,  मैग्‍नीशियम, कैडमियम, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसें जमा हो जाती हैं। इन गैसों के हानिकारक प्रभाव होते हैं। हानिकारक विषाक्त कणों के फेफड़ों में पहुंचने से व्यक्ति को जान का खतरा भी हो सकता है।

हार्ट अटैक व स्‍ट्रोक की आशंका

डॉक्‍टरों का कहना है कि पटाखों के धुएं से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी पैदा हो सकता है। पटाखों में मौजूद लेड सेहत के लिए खतरनाक है। इसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। जब पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। दिमाग को पर्याप्त मात्रा में खून न पहुंचने के कारण व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो सकता है।

बढ़ाते हैं कैंसर का खतरा भी

पटाखे को रंग-बिरंगा बनाने के लिए इनमें रेडियोएक्टिव और जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। ये पदार्थ जहां एक ओर हवा को प्रदूषित करते हैं, वहीं इनसे कैंसर की आशंका भी रहती है। धुएं से दिवाली के दौरान हवा में पीएम का लेवल बढ़ जाता है। जब लोग इन प्रदूषकों के संपर्क में आते हैं तो उन्हें आंख, नाक और गले की समस्याएं हो सकती हैं। पटाखों का धुआं, सर्दी जुकाम और एलर्जी का कारण बन सकता है और इस कारण छाती व गले में कन्जेशन भी हो सकता है।

पटाखों का शोर भी पहुंचाता है नुकसान

छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दिल के मरीजों को पटाखों के शोर से बचकर रहना चाहिए। इनके फेफड़े बहुत नाजुक होते हैं। कई बार बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति पटाखों के शोर के कारण दिल के दौरे का शिकार हो जाते हैं। कुछ लोगों की तो शॉक लगने के कारण मौत तक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 100 डेसिबल से ज्यादा आवाज का हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। शोर के कारण तनाव, अवसाद, उच्च रक्तपचाप, सुनने में परेशानी और टिन्नीटस जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। ज्यादा शोर में रहने से रक्तचाप 5 से 10 गुना बढ़ जाता है। टिन्नीटस के कारण तो व्यक्ति की याददाश्त तक जा सकती है।

बरतें ये सावधानियां

डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि पटाखों के प्रदूषण से बचने के लिए कोशिश करें कि पटाखें न जलाएं या कम जलाएं। उन्होंने सलाह दी कि प्रदूषित हवा से बचें, क्योंकि यह तनाव और एलर्जी का कारण बन सकती है। इससे बचने के लिए अपने मुंह को रूमाल या कपड़े से ढककर रखें। दमा आदि के मरीज इन्हेलर साथ रखें। घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें ता‍कि पटाखों का धुआं अंदर न आ सके। यात्रा की दौरान कार की खि‍ड़कियां भी खोलकर न रखें। इस दौरान आप मास्‍क का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं। अगर स्थिति ज्‍यादा गंभीर हो जाए तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। खुद अपना इलाज करने का प्रयास ना करें।

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