रिपोर्ट : यूजर्स का डाटा शेयर करते हैं गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद 90% एंड्रॉयड एप्स

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नई दिल्‍ली। हाल ही में जारी एक अध्‍ययन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद लगभग 90 फीसदी एंड्रॉयड एप्स अपने यूजर्स के डाटा में ताक-झांक करते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये एप्स गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट के साथ एंड्रॉयड यूजर्स का डाटा शेयर करते हैं, हालांकि यूजर्स को इसकी भनक भी नहीं लग पाती है।

किसने किया अध्‍ययन ?

ऑक्सफोर्ड ने मोबाइल एप्स और यूजर सिक्योरिटी में उनके दखल का पता लगाने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद 9.59 लाख एंड्रॉयड एप्स पर रिसर्च किया। रिसर्च में पता चला कि एंड्रॉयड के 90% ऐप्स यूजर के निजी डेटा में सेंध लगाते हैं। ये डेटा अपने सर्वर पर स्टोर करते हैं। ये एप्स न सिर्फ यूजर डेटा चोरी करते हैं, बल्कि उसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर भी करते हैं। इस रिपोर्ट से यह बात साफ हो गई है कि प्ले स्टोर पर मौजूद ये सारे एप्स अपने यूजर्स के साथ धोखा करते हैं।

कहां करते हैं डाटा शेयर ?

रिपोर्ट के अनुसार, चोरी होने वाले डेटा का 50% से ज्यादा हिस्सा फेसबुक, ट्विटर और गूगल के साथ शेयर किया जाता है। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि गूगल और फेसबुक के अलावा ये एंड्रायड एप्स ई-कॉमर्स कंपनियों को भी यूजर्स का डाटा शेयर करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद कई एप्स अमेजन, ट्विटर, वेरिजॉन और माइक्रोसॉफ्ट को यूजर्स का डाटा शेयर करते हैं। अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को यूजर डेटा की मदद से यूजर तक जरूरी विज्ञापन पहुंचाने में मदद मिलती है।

सबसे ज्‍यादा डाटा गूगल को

अध्‍ययन में सामने आया कि गूगल की पैरेंट कंपनी एल्फाबेट की सबसे ज्यादा 88%  एप्स तक पहुंच है, यानी 88% एप्स ऐसे हैं, जिनका स्टोर किया हुआ यूजर डेटा एल्फाबेट को आसानी से उपलब्ध हो रहा है। कई एप्स तो ऐसे हैं, जो एक से अधिक कंपनियों से यूजर डेटा शेयर करते हैं। रिसर्च से पता चला कि 10% एप्स ऐसे हैं, जो एक बार में 20-20 कंपनियों से यूजर डेटा शेयर कर रही हैं।

क्‍यों करते हैं डाटा शेयर ?

दरअसल सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ई-कॉमर्स साइट्स को यूजर से जुड़ी जानकारी मिलने पर उन्हें इससे खासा फायदा होता है। इसी जानकारी के आधार पर वो यूजर को कोई खास विज्ञापन या कंटेंट दिखाते हैं। बता दें कि ऑनलाइन एडवरटाइजिंग का बिजनेस आज करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए तक का हो चुका है। वहीं प्रमुख शोधकर्ता रुबेन बिन्स का कहना है, ‘हम ये नहीं कह रहे कि यूजर डेटा का इस्तेमाल करने वाले हर एप इसका दुरुपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि यूजर डेटा स्टोर किया जा रहा है और इसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर भी किया जा रहा है।

क्‍या कहना है गूगल का

इस रिसर्च सामने आते ही गूगल बैकफुट पर आ गया है। गूगल का कहना है, ‘ये तो हमारे कुछ सामान्य फंक्शन हैं। जरूर रिसर्च करने वालों को कुछ गलतफहमी हुई है। डेटा सिक्योरिटी को लेकर हमारी बेहद स्पष्ट पॉलिसी है। उसका उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई होगी। गूगल का कहना है कि वेबसाइट पर प्ले स्टोर पर मौजूद एप्स के बारे में जो भी दावा किया गया है, वो सही नहीं है।

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