अब कार पार्क करने के लिए ना हों परेशान, एल्गोरिदम सुलझाएगा यह समस्या

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  • भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र साईं निखिल रेड्डी ने पार्किंग की जगह ढूंढ़ने को बनाया एल्गोरिदम

ह्यूस्टन। दुनिया के सभी प्रमुख महानगरों की एक कॉमन समस्या है कार पार्किंग। सभी महानगरों के लोगों को कार पार्किंग के लिए जूझना पड़ता है। अमेरिका में बड़ी संख्‍या में लोग कार तो खरीद ले रहे हैं, लेकिन उसे खड़ा करने के लिए जगह नहीं बच रही। अब इस समस्‍या का समाधान भारतीय मूल के एक अमेरिकी छात्र ने गणित के माध्यम से निकालने का प्रयास किया है। इस छात्र ने कार पार्क करने की जगह तलाश करने के लिए एक खास एल्गोरिदम विकसित किया है।

साईं निखिल रेड्डी मेट्टुपल्ली (दाहिने)

किसने डेवलप किया एल्गोरिदम ?

इस एल्गोरिदम को डेवलप किया है राजस्थान में पिलानी के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग में स्नातक साईं निखिल रेड्डी मेट्टुपल्ली ने। साईं निखिल इन दिनों हंट्सविले में अल्बामा विश्वविद्यालय में आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। रेड्डी को अपने इस काम के लिए 2018 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ओपन हाउस प्रतिस्पर्धा में दूसरा स्थान मिला था।

कैसे काम करेगी यह तकनीक ?

अल्‍बामा विश्वविद्यालय के अनुसार, साईं का काम बिग डाटा एनेलेटिक्स और सीखने की गहन तकनीकों पर आधारित है। इससे उन वाहन चालकों को आसानी होगी, जो अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए खाली जगह की तलाश में रहते हैं। बता दें कि बिग डाटा एनेलेटिक्स एक जटिल प्रक्रिया है और इसके जरिये बड़े और विभिन्न आंकड़ों के कई समुच्चयों का परीक्षण करके छिपे प्रारूपों, अज्ञात संबंधों, बाजार के चलन और ग्राहकों की पसंद के बारे में पता लगाया जाता है। साईं के मुताबिक, उनकी तकनीक पार्किंग के साइज और गाड़ियों की संख्या को गिनती है और इसके बाद कुछ नतीजे पर आती है।

क्‍या कहना है साईं निखिल का ?

इंजीनियरिंग छात्र साईं निखिल ने बताया कि उन्‍होंने अपने प्रयोग के लिए यूनिवर्सिटी के पार्किंग जोन को चुना। साईं ने बताया, इसके लिए मुझे पहले उपर्युक्त दिन चुनने की चुनौती थी। ऐसे में अपने प्रयोग के लिए उन्होंने ऐसा दिन चुना, जब सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच छात्रों और फैकल्टी के सदस्यों को गाड़ी खड़ी करने की जगह ढूंढने में खासी परेशानी हो रही थी। साईं ने बताया कि वे ऐसी तकनीक बनाना चाहते थे, जिसमें इंस्टॉल करने या महंगे इन-ग्राउंड सेंसर के मेंटेनेंस जैसा झंझट न हो। उनकी यह तकनीक पार्किंग के साइज और गाड़ियों की संख्या को कैल्कुलेट करने के बाद जगह की स्थिति बताती है। साईं को उनकी योजना को मूर्त रूप देने में कम्प्यूटर विज्ञान की सहायक प्राध्यापक विनीता मेनन ने भी काफी मदद की।

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