गांवों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की बेहद कमी, सबसे ज्यादा बड़े राज्य प्रभावित

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नई दिल्ली। बीते दिनों ही पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की सबको स्वास्थ्य सेवा देने की अभिनव आयुष्मान भारत योजना लॉन्च की है। इसमें 11 करोड़ गरीब परिवारों के 5 सदस्यों को हर साल 5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस दिया जा रहा है, लेकिन दूसरी हकीकत ये है कि गांवों में मौजूद सरकारी स्वास्थ्य केंद्र सबसे आगे हैं। वजह ये है कि इन केंद्रों में जरूरी डॉक्टर हैं ही नहीं। हालत ये है कि 1974 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोई भी डॉक्टर नहीं है। यूपी में डॉक्टरों की जबरदस्त कमी है। कर्नाटक और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी हालात ऐसे ही हैं। कुल मिलाकर 57 फीसदी ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ पुरुष या महिला दाई के जरिए ही काम चलाया जा रहा है। जबकि, अगर स्वास्थ्य केंद्रों में सभी पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए और सारा स्टाफ रखा जाए, तो आयुष्मान भारत जैसी योजना की शायद जरूरत ही न पड़े।

इन राज्यों में इतने कम हैं सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर
यूपी में 2209 सरकारी डॉक्टर, 1412 की कमी
कर्नाटक में 2136 सरकारी डॉक्टर, 223 की कमी
बिहार में 1786 सरकारी डॉक्टर, 113 की कमी
गुजरात में 1229 सरकारी डॉक्टर, 163 की कमी
ओडिशा में 940 सरकारी डॉक्टर, 340 की कमी
मध्यप्रदेश में 954 सरकारी डॉक्टर, 217 की कमी
छत्तीसगढ़ में 341 सरकारी डॉक्टर, 444 की कमी
हिमाचल प्रदेश में 492 सरकारी डॉक्टर, 46 की कमी
उत्तराखंड में 215 सरकारी डॉक्टर, 42 की कमी
अरुणाचल प्रदेश में 122 सरकारी डॉक्टर, 21 की कमी
नगालैंड में 122 सरकारी डॉक्टर, 4 की कमी
मिजोरम में 56 सरकारी डॉक्टर, सभी पदों पर नियुक्ति
दादरा और नागर हवेली में सभी 8 पदों पर सरकारी डॉक्टर

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