अब 3डी सेंसर तकनीक बताएगी हकीकत, पता लग जाएगा हमारे शहर हैं कितने साफ

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नई दिल्‍ली। वैज्ञानिकों ने शहरों में सड़कों के किनारे अनधिकृत रूप से फेंके जाने वाले कचरे की मात्रा का पता लगाने के लिए अब एक नया तरीका खोजा है। दरअसल, शोधकर्ताओं ने 3डी सेंसर तकनीक पर आधारित एक नई पद्धति विकसित की है, जिसकी मदद से शहरी कचरे के प्रबंधन का सही-सही आकलन किया जा सकेगा।

आधे से अधिक कचरा सड़कों पर ?

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, सार्वजनिक कचरा संग्रह केंद्रों के अलावा कहीं पर भी खुले में कचरा फेंकना गैर-कानूनी है। प्रतिदिन निकलने वाले म्युनिसिपल कचरे के एकत्रीकरण की क्षमता भारत के ज्‍यादातर शहरों में 50 से 90 प्रतिशत तक है। बाकी का कचरा सड़कों के किनारे या फिर खुले प्लॉटों में फेंक दिया जाता है। इस तकनीक के उपयोग से पता चला है कि दिल्ली में सड़कों के किनारे या खुले में अनधिकृत रूप से फेंके गए कचरे की मात्रा करीब 5.57 लाख टन है, जो रोज निकलने वाले कचरे से 62 गुना अधिक है।

कैसे काम करती है यह तकनीक ?

कचरे की मात्रा का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने 3डी सेंसर का उपयोग किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के शोधकर्ता डॉ. अजय सिंह नागपुरे ने बताया कि आमतौर पर इन सेंसर्स का उपयोग 3डी प्रिंटिंग के लिए किया जाता है। इस डिवाइस में लगे हाई डेफिनेशन रंगीन कैमरे और संवेदनशील इन्फ्रारेड प्रोजेक्टर की मदद से वस्तुओं की मात्रा का सटीक आकलन किया जा सकता है। इससे कचरे की मात्रा के साथ-साथ कचरे के विभिन्न प्रकारों – जैसे मलबा, प्लास्टिक और जैविक रूप से अपघटित होने वाले कचरे का भी पता लगा सकते हैं।

दिल्‍ली में 4 स्‍थानों पर सर्वेक्षण ?

इस शोध के लिए दिल्ली के चार ऐसे इलाकों में कचरे का सर्वेक्षण किया गया, जो विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन इलाकों में बृजपुरी, भोगल, जंगपुरा एक्सटेंशन और सफदरजंग एन्कलेव शामिल हैं। डॉ. नागपुरे ने बताया, ‘म्युनिसिपल कचरे का आकलन करने के लिए हमने पहली बार 3डी सेंसर तकनीक का उपयोग किया है, इसलिए अध्ययन क्षेत्र में सेंसर्स का उपयोग करने से पहले उनकी वैधता की जांच की गई है।’

क्‍या पता चला सर्वेक्षण में ?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में कचरे के संग्रह की वार्षिक क्षमता 83 प्रतिशत है, यानी नगरपालिका द्वारा इतना अपशिष्ट एकत्रित किया जाता है और लैंडफिल में ले जाया जाता है। लेकिन, सर्वेक्षण में कचरे को एकत्र करने की क्षमता विभिन्न इलाकों में अलग-अलग पाई गई। इसका संबंध आर्थिक स्थिति से भी है। सर्वेक्षण के अनुसार, निम्न आय वर्ग वाले इलाकों में यह क्षमता 67 प्रतिशत है, जबकि उच्च आय वाले क्षेत्रों में 99 प्रतिशत तक है। उच्च आय वर्ग की कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कचरा इकट्ठा करने की सुविधा है और साथ ही कचरा संग्रह केंद्रों और म्युनिसिपल कर्मचारियों की उपलब्धता भी अच्छी है। हालांकि कम आय वर्ग वाले क्षेत्रों में इन सुविधाओं की काफी कमी है।

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