सेहत अच्‍छी है या खराब, बहुत कुछ राज खोल देती हैं आपकी आंखें

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नई दिल्‍ली। हमारी आंखें हमें सिर्फ दुनिया ही नहीं दिखातीं, बल्कि हमारे शरीर के अंदर क्या चल रहा है, यह भी बताती हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि वास्तव में आंखें हमारी सेहत की खिड़की होती हैं। अगर आपको कोई बीमारी है तो आपकी आंखों को देखकर इसका पता आसानी से चल जाता है। कई बार ऐसा होता है कि हम डॉक्‍टर के पास अपनी आंखों की जांच कराने जाते हैं, लेकिन वहां पता चलता है कि हमें तो कोई और ही बीमारी है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही बीमारियों के बारे में जिनके बारे में हमें आंखों के जरिए पता चल सकता है –

कॉर्निया के पास ग्रे रिंग

अगर कॉर्निया या आंखों के रंगीन भाग के पास धूसर रंग का रिंग जैसा दिखाई दे तो यह सामान्यत: इसका संबंधा ट्राइ ग्लिसराइड के उच्च स्तर से होता है। बढ़ा हुआ ट्राइ ग्लिसराइड हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है। इस ग्रे रिंग को चिकित्सीय भाषा में कॉर्नियल अर्कस या अर्कस सेनिलिस कहते हैं। अर्कस सेनिलिस, कॉर्निया के किनारों में गहराई में वसा (लिपिड्स) के जमाव के कारण होता है।

पलकों पर दाने या फोड़ा

कई बार पलकों के ऊपर दाने या फिर फोड़ा निकल आता है। यह त्वचा के कैंसर का संकेत हो सकता है। अगर यह फोड़ा लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा हो, उस जगह के पलकों के बाल झड़ गए हों, तो समझिए कि आपको ‘बैसल सेल कार्सिनोमा’ है। इसमें पलकों पर धीरे-धीरे लाल रंग की एक छोटा-सी गांठ बन जाती है। न्यूयॉर्क आई कैंसर सेंटर के अनुसार, अधिकतर मामलों में फोड़ा निचली पलक में होता है, हालांकि कुछ लोगों में यह निचली पलक के बाद ऊपरी पलक पर भी हो जाता है। अगर ट्यूमर के आसपास पलकों के बाल झड़ जाएं, तो यह संकेत है कि ट्यूमर मैलिग्नेंट (कैंसरयुक्त) है। ऐसे में तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।

सूजी या लटकी हुई पलकें

सूजी या लटकी हुई पलकें बेल्स पाल्सी, अस्थायी फैशियल पैरालिसिस का संकेत देती हैं। अगर बोलने में समस्या हो रही हो तो यह स्ट्रोक का भी लक्षण हो सकता है। बहुत कम मामलों में यह एक ऑटो इम्यून डिजीज जिसे ‘मियासथेनिया ग्रैविस’ कहते हैं, उसका संकेत हो सकता है। इसमें सूजन और इम्यून तंत्र से संबंधित दूसरी समस्याओं के कारण मांसपेशियां और आंखों के आसपास के दूसरे ऊतक प्रभावित होते हैं।

आंखों के पीछे पीले धब्‍बे

डायबिटीज के कारण भी हमारी आंखें प्रभावित होती हैं। डायबिटीज होने पर यह आंखों की रेटिना की रक्त नलिकाओं को प्रभावित कर सकता है। रेटिना की कुछ महीन नलिकाओं में हैमरेज हो सकता है या पीले रंग (रक्त की वसा) का जमाव हो सकता है, इसे ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ कहते हैं। यह डायबिटीज रोगियों में दृष्टि प्रभावित होने और दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण है। रूटीन आई चेकअप से ही कई लोगों की डायबिटीज पकड़ में आती है। हालांकि जल्द डायग्नोसिस और उपचार से 95 फीसदी मामलों में दृष्टिहीनता से बचा जा सकता है।

निचली पलकों में पीलापन

अगर निचली पलकों को नीचे की तरफ खींचने पर वे पीली दिखाई देती हैं, तो यह एनिमिया का लक्षण हो सकता है। हालांकि डॉक्‍टरों का कहना है कि यह आंतरिक रक्तस्त्राव का संकेत भी हो सकता है। बता दें कि एनिमिया आयरन की कमी के कारण होता है। आयरनयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन या आयरन सप्लीमेंट्स से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।

उभरी हुई आंखें

कई लोगों की आंखें बहुत अधिक उभर जाती हैं। यह ओवर-एक्टिव थायरॉइड (ग्रेव्स डिजीज) का लक्षण हो सकता है। इसे ‘ग्रेव्स ऑपथैलमोपैथी’ कहते हैं। इसके कारण 30 प्रतिशत लोगों में यह समस्या हो जाती है। इसकी वजह से आंखों से संबंधित दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे आंखों में दबाव बढ़ना, दर्द, आंखें फूलना, लाल हो जाना, सूजन, प्रकाश के प्रति अतिसंवेदनशील होना, डबल विजन या रोशनी का चले जाना। ग्रेव्स डिजीज महिलाओं और ज्‍यादा उम्र के लोगों में अधिक होती है।

पीली आंखें

अगर रेटिना के आसपास का सफेद हिस्‍सा पीला हो जाता है तो यह लिवर से संबंधित समस्याओं का लक्षण है। उदाहरण के लिए, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियांआंखों के सफेद भाग को पीला कर सकती हैं। रंग में यह परिवर्तन बिलिरूबिन (रसायन जो हीमोग्लोबिन के टूटने से बनता है) के कारण होता है। लिवर से संबंधित सभी रोग गंभीर प्रकृति के होते हैं और अगर समय रहते उपचार न कराया जाए तो लिवर क्षतिग्रस्‍त हो सकता है।

ऑप्टिक नर्व का पीला पड़ना

ऑप्टिक नर्व्स का काम मस्तिष्क से रेटिना तक सूचनाएं पहुंचाना होता है। अगर ऑप्टिक नर्व पीली पड़ जाती है तो यह ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ या ‘ब्रेन ट्यूमर’ का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति को हल्‍के में नहीं लेना चाहिए। मल्टीपल स्क्लेरोसिस और ब्रेन ट्यूमर गंभीर स्थितियां हैं। डॉक्‍टर से संपर्क कर इनका तुरंत उपचार कराना चाहिए।

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