पहली बार हाथियों पर लगेंगे रेडियो कॉलर, आबादी क्षेत्र में आने से पहले मिल जाएंगे संकेत

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नई दिल्‍ली। जंगल से आबादी वाले क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही का पता लगाने के लिए देश में पहली बार हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाए जाने की तैयारी चल रही है। ये रेडियो कॉलर साधारण नहीं, बल्कि काफी अत्याधुनिक होंगे। जिस हाथी पर यह रेडियो कॉलर लगा होगा, उसके आबादी क्षेत्र से 500 मीटर की दूरी पर होने पर उसके बारे में पता चल जाएगा। इसकी मदद से वन विभाग किसी अनहोनी से पहले ही हाथियों को वापस जंगल में खदेड़ सकेंगे।

छत्‍तीसगढ़ से होगी शुरुआत

भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने बताया कि देश के करीब 10 राज्यों में 30 हजार से अधिक हाथियों का प्राकृतिक निवास स्थल है। पिछले कुछ सालों में देखने में आया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष निरंतर बढ़ रहा है। कई दफा हाथी आबादी में घुसकर जान-माल को काफी नुकसान पहुंचाते हैं, तो कई दफा हाथियों को भी इंसान के गुस्से का शिकार होना पड़ता है। इस तरह की घटनाओं रोकने के लिए संस्थान ने छत्तीसगढ़ से हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाने की शुरुआत की है। यहां दो हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया गया है।

कैसे काम करेंगे रेडियो कॉलर ?

डॉ. माथुर ने बताया कि ये रेडियो कॉलर स्मार्ट फोन की एक विशेष एप्लिकेशन से जुड़े होंगे। यदि रेडियो कॉलर वाला हाथी आबादी क्षेत्र की तरफ बढ़ेगा तो आबादी से 500 मीटर पहले ही इस बात का संकेत मिल जाएगा। अब तक के रेडियो कॉलर सेटेलाइट से जुड़े होते थे, जिसका संकेत विशेष उपकरण पर ही आता था और इसे सिर्फ तकनीकी रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति ही पढ़ सकता था। इस बार जो रेडियो कॉलर लगाए जा रहे हैं, वे काफी अत्याधुनिक हैं और आम आदमी भी इनके संकेतों को अपने मोबाइल पर पढ़ सकता है।

समय रहते पता चलेगा हाथियों का मूवमेंट

डॉ. वीबी माथुर ने बताया कि रेडियो कॉलर के माध्यम से यह देखा जाएगा कि किस समय आबादी की तरफ हाथियों का ज्‍यादा मूवमेंट होता है और ऐसा वे किन परिस्थितियों में कर रहे हैं। इसके अलावा इन रेडियो कॉलर से हाथियों के अन्य व्यवहार का भी पता चल पाएगा। इसकी मदद से यह भी बताया जा सकेगा कि किन कारणों से हाथियों का व्यवहार हिंसक हो जाता है।

संघर्ष में इंसान को ज्‍यादा नुकसान

हाथियों के आबादी क्षेत्र में आने से इंसानों और फसलों के अलावा हाथियों को भी खतरे का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2017 में संसद में रखी गई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2016 में मानव-हाथी संघर्ष में 419 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि 59 हाथियों की भी मौत हुई थी। कई बार हाथी जंगल से निकल कर रेल की पटरियों तक पहुंच जाते हैं और उन्‍हें अपनी जान गंवानी पड़ती है। उम्‍मीद जताई जा रही है कि रेडियो कॉलर से हाथियों के साथ-साथ इंसानों के भी जान-माल की सुरक्षा हो सकेगी। बता दें कि वर्तमान में 10 राज्यों में हाथियों का वास है। इनमें उत्तराखंड, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, असम, मेघालय, नागालैंड शामिल हैं।

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