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अध्ययन में खुलासा : समाज में उन्माद फैलाती हैं नकारात्‍मक खबरें

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लंदन। एक अध्‍ययन में सामने आया है कि आतंकवाद, बीमारियों का प्रकोप, प्राकृतिक आपदा और अन्य संभावित खतरों पर आधारित खबरें जब विभिन्‍न माध्‍यमों के जरिए समाज में फैलती हैं तो ये नकारात्मकता और उन्माद को बढ़ावा देती हैं। ब्रिटेन में किया गया यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जिसमें नकारात्मक खबरों के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव की पड़ताल की गई है।

क्‍या कहा शोधकर्ताओं ने ?

ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय के थॉमस हिल्स ने कहा कि आज समाज में विभिन्‍न तरह के जोखिम बढ़ते जा रहे हैं। यह शोध बताता है कि वास्तविक दुनिया में खतरों में लगातार कमी आने के बावजूद विश्व में खतरे क्यों बढ़ रहे हैं ? हिल्स ने कहा कि सूचना के ज्यादा साझा होने पर उसमें से तथ्य गायब होने लगते हैं। ऐसे में सूचनाओं का स्वरूप इतना बिगड़ जाता है कि उसमें सुधार करना मुश्किल हो जाता है। उन्‍होंने कहा कि सोशल मीडिया पर खबरों (सही और फर्जी दोनों तरह की), अफवाहों, रीट्वीटों और संदेशों के प्रसार से समाज पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यहां तक कि यह पता लगने के बावजूद कि अमुक खबर गलत थी, यह दहशत के प्रसार को कम नहीं कर पाती।

कैसे किया अध्‍ययन ?

शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर 154 प्रतिभागियों का विश्लेषण किया। उन्हें 11-11 लोगों के 14 समूह में बांटा गया और प्रत्येक समूह के एक व्यक्ति को संतुलित , तथ्यात्मक समाचार पढ़वाया गया। इसके बाद उसी खबर पर दूसरे व्यक्ति को एक संदेश लिखने को कहा गया। इसी तरह से तीसरे ने चौथे व्यक्ति के लिए संदेश लिखा और आगे भी यही क्रम चलता रहा। हर समूह में , डरावने विषयों पर खबरें जैसे-जैसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास गईं, वैसे ही वे सूचनाएं तेजी से नकारात्मक , पक्षपातपूर्ण और दहशत भरी हो गईं। इसके बाद जब मूल निष्पक्ष तथ्य फिर से प्रतिभागियों के सामने रखे गए, तब भी उनके अंदर से यह डर दूर नहीं हो पाया।

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