इस तरह भारत में हर साल होने वाली लाखों मौतों को जा सकता है रोका

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नई दिल्ली। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च से पता चला था कि भारत में डॉक्टरों की लापरवाही से हर साल औसतन 52 लाख लोगों की मौत होती है। इसकी बड़ी वजह अस्पताल में लाए जाने वाले मरीजों के इलाज के मामले में ज्ञान की कमी बताई गई है। इसे रोकने के लिए विशेषज्ञों ने बड़ा सुझाव दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों और नर्सों के लिए विशेष पाठ्यक्रम चलाकर इन मौतों में से ज्यादातर को रोका जा सकता है। यहां तक कि मौतों का आंकड़ा आधे तक घट जाने की बात उन्होंने कही है। पाठ्यक्रम में बताया जाएगा कि गंभीर बीमार या जख्मी लोगों की किस तरह देखभाल की जानी चाहिए।

ब्रिटेन की रॉयल लिवरपूल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों और नर्सों के लिए एक्यूट क्रिटिकल केयर कोर्स शुरू करना चाहिए। इसे ब्रिटेन में 1980 के दशक में तैयार कर लागू किया गया था। जिसके बाद वहां भी डॉक्टरों की गफलत से होने वाली मौतों की संख्या में काफी गिरावट देखने को मिली है। यहां तक कि सेप्सिस जैसी खतरनाक स्थिति में भी ये कोर्स काफी फायदेमंद रहा है।
बता दें कि ब्रिटेन और अमेरिका में सर्जरी के जानकार डॉक्टरों के लिए दो दिन का ये पाठ्यक्रम जरूरी कर दिया गया है। ब्रिटेन में हर साल डॉक्टरों की लापरवाही से 98 हजार और अमेरिका में औसतन हर साल करीब 4 लाख मरीजों की मौत के मामले सामने आने के बाद ये पाठ्यक्रम जरूरी किया गया।

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