स्टडी : दुनिया में लगातार कम हो रही बाघों की संख्या, सिर्फ 6 प्रजातियां बचीं

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नई दिल्‍ली। देश और दुनिया में लगातार घटते जंगलों के कारण कई वन्‍य जीवों की प्रजातियों के लुप्‍त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में किए गए एक अध्‍ययन में बताया गया है कि दुनियाभर में जंगलों में बाघों की संख्या लगातार कम हो रही है। आज की तारीख में केवल इनकी 6 उप-प्रजातियां ही बची रह गई हैं।

कौन सी प्र‍जातियां बचीं ?

इसी हफ्ते जारी अध्‍ययन के नतीजों से वैज्ञानिकों ने इस बात पुष्टि की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बाघों की शेष बची 6 उपप्रजातियों में बंगाल टाइगर, आमुर बाघ (साइबेरियाई बाघ), दक्षिणी चीन बाघ, सुमात्रा के बाघ, भारतीय-चीनी बाघ और मलाया के बाघ शामिल हैं। बाघ की अन्य 3 उप-प्रजातियां पहले ही विलुप्त हो चुकी हैं जिनमें कैस्पियन, जावा के बाघ और बाली के बाघ शामिल हैं। बाघों के जीवित न रहने के लिए सबसे ज्यादा खतरा उनके रहने की जगह कम होने और अवैध शिकार से है। यह अध्ययन ‘करंट बायोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है।

बाघों की प्रजातियों पर सहमति नहीं

यह बात भी सामने आई है कि वैज्ञानिक बाघों की उप-प्रजातियों को लेकर एकमत नहीं हैं। किसी का कहना है कि बाघों के दो प्रकार हैं और दूसरे मानते हैं कि इनकी संख्‍या 5 या 6 हैं। इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता बीजिंग की पेकिंग यूनिवर्सिटी के शु जिन लोउ ने कहा, ‘बाघों की उप-प्रजातियों की संख्या को लेकर सर्वसम्मति नहीं होने से भी विलुप्त होने के कगार पर मौजूद इस नस्ल को बचाने के वैश्विक प्रयासों को आंशिक रूप से झटका लगा है।’ हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि इस अध्ययन के परिणामों से पूरी दुनिया में 4,000 से भी कम बचे बाघों को बचाने के प्रयास तेज करने में सहायता मिलेगी।

भारत में सबसे ज्‍यादा बाघों की मौत

आज दुनिया भर में मौजूद 70 फीसदी बाघ भारत में हैं, लेकिन बाघ की मौत के मामले भी सबसे ज्यादा यहीं हैं। पिछले दो सालों में बाघों की मौत के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2016-2017 में भारत में करीब 237 बाघों की मौत हुई है। वर्ष 2016 में 122 बाघों की मौत हुई, जो 2015 के मुकाबले 50 फीसदी (80 मौतें) ज्यादा है। हालांकि राष्‍ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) का कहना था कि 2016 में 98 बाघों की मौत हुई है, वहीं वर्ष 2017 में 115 बाघों ने अपनी जान गंवाई है। मध्य प्रदेश में बाघों की अच्छी खासी आबादी है, लेकिन इस राज्‍य में 13 महीनों में 33 बाघों की मौत हुई है। मौत का ये आंकड़ा पूरे देश में सबसे ज्यादा है। एनटीसीए के मुताबिक वर्ष 2016 में भी मध्य प्रदेश में 31 बाघों की मौत हुई थी।

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