दक्षिण अफ्रीका के इंजीनियरिंग छात्रों का कारनामा, इंसान के पेशाब से बनाई ईंट

66 0

नई दिल्‍ली। इंजीनियरिंग के कुछ छात्रों ने पर्यावरण को ध्‍यान में रखते हुए एक अनोखा प्रयोग किया है। दरअसल, इन छात्रों ने इंसान के पेशाब से ईंट बनाने में कामयाबी पाई है। आपको सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन यह कारनामा कर दिखाया है दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन विश्वविद्यालय के कुछ इंजीनियरिंग छात्रों ने। पेशाब से निर्मित इस ईंट को ‘बायो ब्रिक्‍स’ नाम दिया गया है।

कैसे बनती है पेशाब से ईंट  

इंजीनियरिंग छात्रों सुजैन लैम्बर्ट और वुखेता मखरी ने इस ईंट को बनाने के लिए इंसान के पेशाब के अलावा रेत और बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है। पेशाब से ईंट बानने की इस प्रक्रिया को माइक्रोबायल कार्बोनेट प्रीसिपिटेशन कहा जाता है। दरअसल, इस प्रक्रिया में शामिल बैक्टीरिया एक एंजाइम पैदा करता है, जो पेशाब में यूरिया को अलग करता है। यह कैल्शियम कार्बोनेट बनाता है, जो रेत को ठोस स्‍लेटी ईंटों में बदल देता है। छात्रों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में सामान्य तापमान की ही जरूरत पड़ती है। बताया जा रहा है कि यह ईंट आम चूना-पत्थर की ईंटों से काफी मजबूत होती हैं। खास बात यह है कि पूरी तरह से तैयार होने के बाद इन ईंटों से पेशाब की जरा सी भी गंध नहीं आती।

पर्यावरण के लिए सुरक्षित

केप टाउन विश्वविद्यालय में इन छात्रों के निरीक्षक डॉक्‍टर रैंडल बताते हैं कि ईंट बनाने की यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है, जैसे समुद्र में कोरल (मूंगा) बनता है। उन्‍होंने कहा कि सामान्य ईंटों को भट्ठियों में उच्च तापमान में पकाया जाता है, जिसकी वजह से काफी मात्रा में कार्बन-डाईऑक्साइड बनती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। इसके विपरीत पेशाब से बनने वाली ईंट में प्रदूषण नहीं होता और यह पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

एक ईंट बनाने में पेशाब की मात्रा

माना जाता है कि इंसान एक बार में 200 से 300 मिलीलीटर पेशाब करता है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, एक बायो-ब्रिक बनाने में 25-30 लीटर पेशाब की जरूरत होती है। यह मात्रा थोड़ी ज्यादा लग सकती है, लेकिन एक किलो खाद बनाने के लिए भी लगभग इतना ही पेशाब लगता है। ऐसे में बड़ी संख्‍या में ईंट तैयार करने के लिए काफी ज्‍यादा पेशाब इकट्ठा करना होगा।

मनचाहे आकार में बना सकते हैं ईंट

डॉक्‍टर रैंडल बताते हैं कि बायो-ब्रिक्स के आकार और क्षमता को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। उन्‍होंने बताया, ‘जब पिछले साल हमने इस प्रक्रिया को शुरू किया तो जो ईंट हमने बनाई वह आम चूना पत्थर से बनने वाली ईंट के लगभग 40 प्रतिशत तक मजबूत थी। कुछ महीनों बाद हमने इस क्षमता को दोगुना कर दिया और कमरे में जीरो तापमान के साथ उसमें बैक्टीरिया को शामिल किया ताकि सीमेंट के कण लंबे समय तक रहें।’

Related Post

प्रिंस हैरी को गिफ्ट में मिलीं 4 चीजें, जिन्हें इस्तेमाल करने में उन्हें आएगा मजा ही मजा

Posted by - May 19, 2018 0
नई दिल्ली। आज यानी शनिवार को दुनिया की सबसे बड़ी शादी है। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हर किसी की…

राष्ट्रपति भवन का किचन देख खुद की आखों पर यकीन नहीं कर पाएंगे आप

Posted by - July 4, 2018 0
नई दिल्‍ली। पूरी दुनिया में भारत अपनी मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले हर बड़े देश के राष्ट्राध्यक्ष…

विधायकों में से ही चुना जाएगा हिमाचल का अगला मुख्‍यमंत्री

Posted by - December 21, 2017 0
मुख्‍यमंत्री पद के दावेदारों में जयराम ठाकुर का नाम सबसे आगे नई दिल्‍ली। हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *