अगर किसानों ने पराली जलाना बंद नहीं हुआ तो 2050 तक इतना बढ़ जाएगा प्रदूषण : स्टडी

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नई दिल्ली। पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और पंजाब यूनिवर्सिटी की एनवायरनमेंट स्टडीज की स्टडी में ये बात समाने आई है कि अगर किसानों ने पराली जलाना बंद नहीं हुआ तो 2050 तक डेढ़ गुना बढ़ जाएगा प्रदूषण बढ़ जाएगा। पराली गेहूं और धान के अवशेष को कहते हैं।

पीजीआई के एनवायरनमेंट हेल्थ के एडिशनल प्रोफेसर और रिसर्चर रविंद्रा खैवाल का कहना है कि पॉलिसी मेकर को पराली के प्रदूषण को कम करने के लिए जल्द से जल्द नीति बनानी होगी। कई ऐसी तकनीक उपलब्ध हैं, जिनसे पराली को जलाने के बजाय उन्हें किसी दूसरे उपयोग में लाया जा सकता है।

साल 2017 में पूरे भारत में करीब 488 मीट्रिक टन पराली उत्पन्न हुई। इसमें करीब 24 फीसदी अवशेषों को खेतों में जलाया गया। अगर इसका इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाता तो देशभर की कुल बिजली की मांग का दस फीसदी हिस्सा पराली से पूरा किया जा सकता है।

बता दें, 24 फीसदी पराली जलाने से 824 गीगा ग्राम पीएम 2.5, 58 गीगा ग्राम एलिमेंटल कार्बन (ईसी), 239 गीगा ग्राम आर्गेनिक कार्बन, 211 टेराग्राम सीओ2 का उत्सर्जन हुआ। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है पराली जलाने से कितना ज्यादा प्रदूषण होता है।

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