किसानों को अब जहरीले कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचाएगा नया Gel

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नई दिल्‍ली। ज्‍यादातर किसान खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव करते समय कोई सुरक्षात्मक तरीका नहीं अपनाते हैं। यही कारण है कि कीटनाशकों में मौजूद जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से उनके स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। कई बार तो उनकी मौत तक हो जाती है। इसी को ध्‍यान में रखकर भारतीय वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसा जेल तैयार किया है, जो कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से किसानों को बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

किसने बनाया Gel ?

इस जेल को बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल बायोलॉजी एंड रीजनरेटिव मेडिसिन (इनस्टेम) के शोधकर्ताओं ने न्यूक्लियोफिलिक पॉलिमर से तैयार किया है। पाली-ऑक्सिम नामक इस जेल को त्वचा पर लगा सकते हैं, जो कीटनाशकों और फफूंदनाशी दवाओं में मौजूद जहरीले रसायनों के अलावा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले खतरनाक ऑर्गो फॉस्फोरस यौगिक को निष्क्रिय कर सकता है। इसे लगाने से हानिकारक रसायनों का दुष्प्रभाव मस्तिष्क और फेफड़ों में गहराई तक नहीं पहुंच पाता। चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस जेल को प्रभावी पाया गया है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि जल्द ही इंसानों पर भी इसका परीक्षण किया जा सकता है।

कैसे नुकसान पहुंचाते हैं कीटनाशक ?

शोधकर्ताओं का कहना है कि कीटनाशकों में मौजूद रसायनों के संपर्क में आने से तंत्रिका तंत्र में मौजूद असिटल्कोलिनेस्टरेस (AChE) एंजाइम प्रभावित होता है। यह एंजाइम न्यूरोमस्क्यूलर कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। त्वचा के जरिये कीटनाशकों के शरीर में प्रवेश करने पर जब इस एंजाइम की कार्यप्रणाली बाधित होती है तो तंत्रिका तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे इंसान संज्ञानात्मक रूप से अक्षम हो सकता है और गंभीर मामलों में मौत भी हो सकती है।

चूहों पर परीक्षण सफल

शोधकर्ताओं ने अध्‍ययन के दौरान इस जेल को चूहों पर लगाने के बाद उन्हें घातक एमपीटी कीटनाशक के संपर्क में छोड़ दिया। शोधकर्ताओं ने पाया कि उनके शरीर में मौजूद AChE एंजाइम के स्तर में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। इससे वैज्ञानिकों को यकीन हो गया कि यह जेल त्वचा के जरिये शरीर में कीटनाशकों के प्रवेश को रोक सकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि पॉली-ऑक्सीम जेल से उपचारित चूहों पर कीटनाशकों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जबकि जिन चूहों पर जेल का उपयोग नहीं किया गया था, उन पर जहर का दुष्प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया। यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘साइंस एडवांसेस’ में प्रकाशित किया गया है।

जल्‍द ही इंसानों पर होगा परीक्षण

अध्‍ययन करने वाली टीम के एक वरिष्ठ सदस्य डॉ. प्रवीण कुमार वेमुला का कहना है, ‘फिलहाल हम जानवरों पर सुरक्षा से जुड़े व्यापक अध्ययन कर रहे हैं, जो चार महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद इंसानों में इस जेल के प्रभाव को दर्शाने के लिए हम एक प्रारंभिक अध्ययन की योजना बना रहे हैं।’ कीटनाशकों के दुष्‍प्रभाव को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने कई किसानों और उनके परिवारों के साथ बातचीत भी की है। उनमें से किसी के पास सुरक्षा के कोई साधन नहीं थे। कई किसानों ने बताया कि वे कीटनाशकों का छिड़काव करने के बाद दर्द महसूस करते हैं।

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